Govind Jaiswal IAS Success Story: पिता चलाते थे रिक्शा, बेटा गोविंद जायसवाल बना IAS, संभालेगा उपराज्यपाल के प्रधान सचिव की कमान

Govind Jaiswal IAS Success Story: पिता चलाते थे रिक्शा, बेटा गोविंद जायसवाल बना IAS, संभालेगा उपराज्यपाल के प्रधान सचिव की कमान


नई दिल्ली (Govind Jaiswal IAS). यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है. कई लोग मानते हैं कि इसे पास करने के लिए महंगी कोचिंग अनिवार्य है. लेकिन आईएएस गोविंद जायसवाल ने यह धारणा बदल दी. उन्होंने सफलता की ऐसी इबारत लिखी, जो लाखों युवाओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है. रिक्शा चालक के बेटे से देश के प्रतिष्ठित प्रशासनिक पदों तक का उनका सफर साबित करता है कि इरादे मजबूत हों तो गरीबी और अभाव भी सपनों की उड़ान को नहीं रोक सकते.

हाल ही में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 2007 बैच के AGMUT कैडर के आईएएस गोविंद जायसवाल को उपराज्यपाल (LG) का प्रधान सचिव नियुक्त किया है. इसके साथ ही उन्हें श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है. शून्य से शिखर तक पहुंचने वाले गोविंद जायसवाल का सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है. इसमें उनके पिता के त्याग और उनके खुद के अटूट अनुशासन की अनूठी कहानी छिपी है. पढ़िए आईएएस की सक्सेस स्टोरी.

रिक्शा चालक का बेटा बना आईएएस: गोविंद जायसवाल की संघर्ष भरी कहानी

उत्तर प्रदेश के वाराणसी के अलईपुरा इलाके की तंग और छोटी सी कोठरी से निकलकर देश के सर्वोच्च प्रशासनिक पदों तक पहुंचने वाले गोविंद जायसवाल का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. उन्हें यह सफलता रातों-रात नहीं मिली. इसके पीछे आंसुओं, त्याग और अंतहीन संघर्षों का लंबा इतिहास है.

गरीबी और बीमारियों से घिरा परिवार

गोविंद का शुरुआती जीवन काफी सामान्य था. उनके पिता के पास 35 रिक्शे थे, जिससे परिवार का गुजारा आराम से चलता था. फिर समय का पहिया घूमा. गोविंद की मां को गंभीर बीमारी (ब्रेन हेमरेज) हो गई. उनके इलाज के लिए पिता को एक-एक करके सारे रिक्शे बेचने पड़े. साल 2005 में मां के निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. हालात इतने बदतर हो गए कि कई बार सिर्फ सूखी रोटी खाकर ही दिन गुजारना पड़ता था. लेकिन पिता नारायण जायसवाल ने अपने बच्चों की पढ़ाई की लौ कभी बुझने नहीं दी.

पैरों में जख्म थे, पिता चलाते रहे रिक्शा

गोविंद जायसवाल यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली गए तो उन्हें हर महीने खर्चे के लिए पैसों की जरूरत होती थी. तब तक उनके पिता के पैरों में सेप्टिक और गंभीर जख्म हो चुके थे. डॉक्टरों के मना करने पर भी वह रिक्शा चलाते थे. कई बार खुद भूखे रहकर पैसे बचाते थे, जिससे बेटा दिल्ली में पढ़ाई जारी रख सके. गोविंद ने भी पैसों की तंगी के कारण दिल्ली में न तो महंगी कोचिंग जॉइन की और न ही आराम तलब की जिंदगी चुनी. वे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे. पैसे बचाने के लिए उन्होंने एक वक्त का खाना और चाय तक छोड़ दी थी.

पहले ही प्रयास में यूपीएससी सीएसई में मिली 48वीं रैंक

अपनी मेहनत, लगन और दर्शनशास्त्र-इतिहास जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ के दम पर गोविंद जायसवाल ने साल 2006 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली. यह उनका पहला अटेंप्ट था और इसी में 48वीं रैंक हासिल कर उन्होंने इतिहास रच दिया. हिंदी मीडियम से पढ़ाई करके इतनी बड़ी सफलता हासिल करना उस समय देशभर में चर्चा का विषय बन गया था. आईएएस गोविंद जायसवाल की संघर्ष गाथा पर आधारित फिल्म भी बन चुकी है. इसका नाम ‘अब दिल्ली दूर नहीं’ है.

प्रशासनिक सफर और नई जिम्मेदारी

आईएएस अधिकारी बनने के बाद गोविंद जायसवाल ने अपनी कार्यकुशलता से हर मोर्चे पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है. उनकी पत्नी चंदन चौधरी भी आईपीएस अधिकारी हैं. इन दोनों की अरेंज्ड मैरिज हुई थी. हाल ही में आईएएस गोविंद जायसवाल को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के प्रधान सचिव जैसी अहम जिम्मेदारी मिली है. इससे साबित हो गया है कि प्रतिभा किसी पहचान या अमीरी की मोहताज नहीं होती, वह अपनी मेहनत से मुकाम खुद तय करती है.

आईपीएस चंदना चौधरी से की अरेंज्ड मैरिज

गोविंद की बहन ममता के अनुसार, 2011 में जब गोविंद नागालैंड में पोस्टेड थे, तब उनके बहनोई के जरिए यह रिश्ता आया था. इसके बाद गोविंद ने साइबर कैफे जाकर चंदन की सोशल मीडिया प्रोफाइल देखी और रिश्ता आगे बढ़ा. चंदन की नानी ने गोविंद से मिलकर रिश्ता पक्का किया था. उनका मानना था कि छोटी सी कोठरी में पढ़कर आईएएस बनने वाला लड़का जीवन में बहुत नाम कमाएगा. शुरुआती दौर में ट्रेनिंग के कारण चंदन शादी के मूड में नहीं थीं, लेकिन नानी के कहने पर उन्होंने हामी भरी.



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