नई दिल्ली (Govind Jaiswal IAS). यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है. कई लोग मानते हैं कि इसे पास करने के लिए महंगी कोचिंग अनिवार्य है. लेकिन आईएएस गोविंद जायसवाल ने यह धारणा बदल दी. उन्होंने सफलता की ऐसी इबारत लिखी, जो लाखों युवाओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है. रिक्शा चालक के बेटे से देश के प्रतिष्ठित प्रशासनिक पदों तक का उनका सफर साबित करता है कि इरादे मजबूत हों तो गरीबी और अभाव भी सपनों की उड़ान को नहीं रोक सकते.
रिक्शा चालक का बेटा बना आईएएस: गोविंद जायसवाल की संघर्ष भरी कहानी
गरीबी और बीमारियों से घिरा परिवार
गोविंद का शुरुआती जीवन काफी सामान्य था. उनके पिता के पास 35 रिक्शे थे, जिससे परिवार का गुजारा आराम से चलता था. फिर समय का पहिया घूमा. गोविंद की मां को गंभीर बीमारी (ब्रेन हेमरेज) हो गई. उनके इलाज के लिए पिता को एक-एक करके सारे रिक्शे बेचने पड़े. साल 2005 में मां के निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. हालात इतने बदतर हो गए कि कई बार सिर्फ सूखी रोटी खाकर ही दिन गुजारना पड़ता था. लेकिन पिता नारायण जायसवाल ने अपने बच्चों की पढ़ाई की लौ कभी बुझने नहीं दी.
पैरों में जख्म थे, पिता चलाते रहे रिक्शा
पहले ही प्रयास में यूपीएससी सीएसई में मिली 48वीं रैंक
अपनी मेहनत, लगन और दर्शनशास्त्र-इतिहास जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ के दम पर गोविंद जायसवाल ने साल 2006 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली. यह उनका पहला अटेंप्ट था और इसी में 48वीं रैंक हासिल कर उन्होंने इतिहास रच दिया. हिंदी मीडियम से पढ़ाई करके इतनी बड़ी सफलता हासिल करना उस समय देशभर में चर्चा का विषय बन गया था. आईएएस गोविंद जायसवाल की संघर्ष गाथा पर आधारित फिल्म भी बन चुकी है. इसका नाम ‘अब दिल्ली दूर नहीं’ है.
प्रशासनिक सफर और नई जिम्मेदारी
आईएएस अधिकारी बनने के बाद गोविंद जायसवाल ने अपनी कार्यकुशलता से हर मोर्चे पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है. उनकी पत्नी चंदन चौधरी भी आईपीएस अधिकारी हैं. इन दोनों की अरेंज्ड मैरिज हुई थी. हाल ही में आईएएस गोविंद जायसवाल को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के प्रधान सचिव जैसी अहम जिम्मेदारी मिली है. इससे साबित हो गया है कि प्रतिभा किसी पहचान या अमीरी की मोहताज नहीं होती, वह अपनी मेहनत से मुकाम खुद तय करती है.
आईपीएस चंदना चौधरी से की अरेंज्ड मैरिज
गोविंद की बहन ममता के अनुसार, 2011 में जब गोविंद नागालैंड में पोस्टेड थे, तब उनके बहनोई के जरिए यह रिश्ता आया था. इसके बाद गोविंद ने साइबर कैफे जाकर चंदन की सोशल मीडिया प्रोफाइल देखी और रिश्ता आगे बढ़ा. चंदन की नानी ने गोविंद से मिलकर रिश्ता पक्का किया था. उनका मानना था कि छोटी सी कोठरी में पढ़कर आईएएस बनने वाला लड़का जीवन में बहुत नाम कमाएगा. शुरुआती दौर में ट्रेनिंग के कारण चंदन शादी के मूड में नहीं थीं, लेकिन नानी के कहने पर उन्होंने हामी भरी.