France Protest Against Macron Inflation: फ्रांस में मैक्रों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन, 5.75 लाख लोग सड़कों पर उतरे, क्रिसमस तक चलेगा आंदोलन

France Protest Against Macron Inflation: फ्रांस में मैक्रों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन, 5.75 लाख लोग सड़कों पर उतरे, क्रिसमस तक चलेगा आंदोलन


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फ्रांस में मैक्रों के खिलाफ सबसे बड़ा प्रदर्शन, 5.75 लाख लोग सड़कों पर उतरे

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फ्रांस में महंगाई, कम वेतन और सरकारी नीतियों के खिलाफ गुरुवार को करीब 5.75 लाख लोग सड़कों पर उतरे. सितंबर में शुरू हुए आंदोलन के बाद यह एक दिन का सबसे बड़ा प्रदर्शन था. मजदूरों, छात्रों, शिक्षकों और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोगों ने रैलियां निकालीं. कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं. पुलिस ने 448 लोगों को हिरासत में लिया. प्रदर्शन क्रिस्मस तक चल सकता है.

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फ्रांस में महंगाई, कम वेतन और सरकार की नीतियों से नाराजगी अब बड़े जनआंदोलन का रूप लेती दिख रही है. गुरुवार को देशभर में करीब 5.75 लाख लोग सड़कों पर उतर आए. सरकार के अनुमान के मुताबिक, सितंबर में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद यह एक दिन में हुई सबसे बड़ी लामबंदी थी. इस दौरान मजदूरों, छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोगों ने अलग-अलग शहरों में मार्च निकाले. इतने बड़े प्रदर्शन के बावजूद दिन काफी हद तक शांत रहा, लेकिन कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं. पुलिस ने कुल 448 लोगों को हिरासत में लिया.

इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें सिर्फ छात्र या किसी एक वर्ग के लोग शामिल नहीं थे. अलग-अलग पेशों और संगठनों के लोग एक साथ सड़कों पर आए. उनकी मांगें भले अलग-अलग थीं, लेकिन महंगाई, जीवनयापन का बढ़ता खर्च, अमीर और गरीब के बीच बढ़ती दूरी और सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जाने को लेकर नाराजगी सबमें थी.

फ्रांस में सितंबर से विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला चल रहा है. गुरुवार का प्रदर्शन इसी आंदोलन का अब तक का सबसे बड़ा दिन बन गया. सरकार के मुताबिक, करीब 5.75 लाख लोगों ने देशभर में मार्च और रैलियों में हिस्सा लिया. इससे पहले 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों में कई जगह हिंसा हुई थी. उस अनुभव के बाद प्रशासन और दुकानदारों को इस बार भी बड़े पैमाने पर हिंसा की आशंका थी. लेकिन इस बार ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे. हालांकि, रेनेस, नांत, लियोन और मार्सेई समेत कई शहरों में पुलिस और उग्र प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ. लियोन में पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाया. रेनेस में कुछ लोगों ने एक होटल में तोड़फोड़ की, पुलिस पर सामान फेंका और प्रदर्शन कर रहे ट्रेड यूनियन सदस्यों पर हमला किया. अधिकारियों के मुताबिक, वहां कई दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया गया.

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फ्रांस के गृह मंत्रालय ने बताया कि देशभर में 86 जगह आग लगने की घटनाओं पर दमकलकर्मियों को भेजा गया. टूलूज के पास एक स्कूल को आग लगाकर काफी नुकसान पहुंचाया गया. फ्रांस के शिक्षा मंत्री एडुआर गेफ्रे ने इसे जानबूझकर की गई आगजनी बताया. प्रदर्शन के साथ कई क्षेत्रों में कर्मचारियों ने हड़ताल भी की. इसका असर स्कूलों, विश्वविद्यालयों, रेलवे और कुछ अस्पतालों पर पड़ा. सरकार के अनुमान के मुताबिक, देश के करीब एक तिहाई उच्च शिक्षा संस्थानों का कामकाज प्रभावित हुआ. स्कूलों के लगभग 13 फीसदी कर्मचारियों ने हड़ताल में हिस्सा लिया.

ट्रेन सेवाओं में भी कुछ जगहों पर देरी और रुकावट आई. हालांकि, अस्पतालों में हड़ताल का असर सीमित रहा. फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अस्पतालों के करीब 5 फीसदी कर्मचारी ही हड़ताल में शामिल हुए और स्वास्थ्य सेवाओं में कोई बड़ी बाधा दर्ज नहीं की गई. इससे साफ है कि आंदोलन अब केवल सड़कों पर नारे लगाने तक सीमित नहीं है. सरकारी सेवाओं और रोजमर्रा के कामकाज से जुड़े कई क्षेत्र भी इसमें शामिल हो रहे हैं.

गुरुवार की हड़ताल का आह्वान फ्रांस के कई बड़े ट्रेड यूनियनों ने किया था. इनमें शिक्षक, डाक कर्मचारी, डॉक्टर, फार्मासिस्ट और परिवहन क्षेत्र के कर्मचारी शामिल थे. हर समूह की अपनी मांगें हैं. फ्रांस के प्रमुख ट्रेड यूनियन CGT ने न्यूनतम वेतन में तुरंत 10 फीसदी बढ़ोतरी की मांग की है. वहीं CFDT यूनियन न्यूनतम मासिक वेतन में 100 यूरो यानी करीब 7 फीसदी की वृद्धि चाहती है. कर्मचारी वेतन के साथ पेंशन बढ़ाने की मांग भी कर रहे हैं.

छात्र संगठनों की मांग है कि शिक्षा बजट में 10 अरब डॉलर से ज्यादा की बढ़ोतरी की जाए. इसके अलावा स्कूलों की इमारतों और सुविधाओं पर 1.5 अरब डॉलर खर्च करने और विश्वविद्यालयों में 2.5 लाख अतिरिक्त सीटें बढ़ाने की मांग की गई है. वहीं, येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोग राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और उनकी सरकार के जाने की मांग कर रहे हैं. यह आंदोलन करीब आठ साल पहले शुरू हुआ था और अब फिर से विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय हो गया है. इसके सदस्य देश में नए संवैधानिक बदलाव की प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी कर रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों ने संकेत दिया है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन जारी रहेगा. कुछ समूहों ने क्रिसमस तक सड़कों पर उतरने की योजना बनाई है. येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोगों ने शुक्रवार और शनिवार को भी प्रदर्शन करने की तैयारी की है. अगले साल होने वाले फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव तक आंदोलन जारी रहने की आशंका भी जताई जा रही है. राष्ट्रपति मैक्रों ने युवाओं से पढ़ाई पर लौटने और स्कूल-कॉलेज फिर से खोलने की अपील की है. उन्होंने कहा कि युवाओं की बात सुनी गई है और अब शांति बहाल होनी चाहिए. हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं.

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