रामपुर: फसल कटने के बाद खेत में बची पराली को किसान अक्सर बेकार समझकर जला देते हैं, लेकिन यही पराली खेत की मिट्टी के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. अगर किसान इसका सही तरीके से इस्तेमाल करें तो न सिर्फ मिट्टी की सेहत सुधरेगी, बल्कि सिंचाई और मजदूरी का खर्च भी कम हो सकता है. रामपुर में किसान लहसुन और मिर्च की खेती में पराली का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे खेत में नमी बनी रहती है और खरपतवार भी कम उगते हैं. जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा भी किसानों को पराली जलाने की बजाय उसे खेत में सड़ाकर इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं.
इस तरीके से खेत में सड़ाएं पराली
जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा बताते हैं कि किसानों को धान की कटाई के बाद पराली को खेत में ही सड़ाने की कोशिश करनी चाहिए. इसके लिए धान की कटाई के दो दिन बाद मिट्टी पलटने वाले हल से खेत की जुताई करें. इसके बाद प्रति हेक्टेयर 25 किलोग्राम पराली डालकर खेत में पानी भर दें. इससे पराली धीरे-धीरे सड़कर मिट्टी में मिल जाएगी और उसकी उर्वरता बढ़ाने में मदद करेगी.
उन्होंने बताया कि रामपुर में गेहूं का रकबा अधिक है. ऐसे में यहां के किसानों के लिए पराली का सही इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है.
लहसुन-मिर्च की खेती में मिल रहा फायदा
रामपुर के किसान लहसुन और मिर्च की खेती में भी पराली का अच्छा इस्तेमाल कर रहे हैं. खेत में बुवाई के बाद पराली की हल्की परत बिछा दी जाती है. इससे मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है. साथ ही पराली धीरे-धीरे सड़कर मिट्टी में जैविक पदार्थ और पोषक तत्व बढ़ाने में मदद करती है.
किसान रमेश के मुताबिक, पहले उन्हें हर चार से पांच दिन में खेत की सिंचाई करनी पड़ती थी, लेकिन पराली बिछाने के बाद एक बार पानी देने पर खेत करीब एक हफ्ते तक नम रहता है. इससे पानी की बचत होती है और सिंचाई का खर्च भी कम हो जाता है.
खरपतवार और मजदूरी का खर्च होगा कम
पराली का इस्तेमाल करने का एक फायदा यह भी है कि इससे खेत में बेकार घास यानी खरपतवार कम उगते हैं. दरअसल, खेत में पराली की परत बिछने से जमीन पर सीधी धूप नहीं पहुंच पाती, जिससे खरपतवार को बढ़ने का मौका कम मिलता है. पहले किसानों को खेत की घास साफ कराने के लिए मजदूर लगाने पड़ते थे, जिससे अतिरिक्त खर्च होता था. लेकिन पराली का इस्तेमाल करने से निराई-गुड़ाई की जरूरत और मजदूरी का खर्च कम हो सकता है.
पैदावार में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का दावा
लहसुन और मिर्च की खेती करने वाले किसान रमेश बताते हैं कि इस तरीके से फसल की पैदावार में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखने को मिली है. पराली धीरे-धीरे सड़कर मिट्टी में मिलती है, जिससे जैविक कार्बन बढ़ाने और मिट्टी को मुलायम बनाने में मदद मिलती है. साथ ही मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों के लिए भी अनुकूल माहौल बनता है. इससे जमीन की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है.
पराली जलाने से बचें किसान
जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा का कहना है कि किसानों को पराली जलाने की बजाय उसे खेत में सड़ाने की सलाह दी जाती है. इससे खेत की मिट्टी को फायदा मिलता है और पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को भी रोका जा सकता है. किसानों को चाहिए कि फसल कटने के बाद पराली को बोझ समझने की बजाय खेती में ही उसका सही इस्तेमाल करें.