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Satna Street Food: सतना के एक छोटे से समोसे के ठेले ने स्वाद के दम पर अपनी अलग पहचान बना ली है. यहां सुबह से ही छात्रों से लेकर नौकरीपेशा और मजदूरों तक की भीड़ पहुंचती है. करीब दो दशक से चल रही इस दुकान की खासियत इसकी सादगी, कम कीमत और पुराना स्वाद है.
Satna Raju Kushwaha Samosa: सतना में अगर आप सस्ते और स्वादिष्ट समोसे के शौकीन हैं तो राजू भैया के समोसे का नाम जरूर सुना होगा. यहां पिछले करीब 20 साल से एक छोटा सा टपरा लोगों को समोसे का ऐसा स्वाद दे रहा है कि एक बार खाने वाला दोबारा यहां आने से खुद को रोक नहीं पाता. खास बात यह है कि यहां सिर्फ मजदूर या आम लोग ही नहीं बल्कि नौकरीपेशा, बड़े कर्मचारी, छात्र और आसपास के दुकानदार भी समोसा खाने पहुंचते हैं. कम कीमत, गरमा-गरम समोसा और खास चटनी का स्वाद इस जगह की पहचान बन चुका है.
पहले 5 के 2 मिलते थे, अब भी जेब पर भारी नहीं
लोकल 18 से बातचीत में राजू कुशवाहा ने बताया कि जब उन्होंने यह काम शुरू किया था तब यहां 5 रुपये में 2 समोसे मिलते थे. धीरे-धीरे महंगाई बढ़ी और कुछ साल पहले कीमत में बदलाव करना पड़ा. हालांकि आज भी यहां 10 रुपये में 2 समोसे मिलते हैं जिसकी वजह से कम बजट में पेट भरकर स्वाद लेने वालों की भीड़ लगी रहती है. राजू भैया बताते हैं कि शुरुआत उन्होंने बेहद छोटे स्तर से की थी. उस समय सिर्फ एक ठेला था और थोड़े से समोसे बनाकर बेचते थे. धीरे-धीरे लोगों को स्वाद पसंद आने लगा और ग्राहकों की संख्या बढ़ती गई.
रोज 400 से 500 समोसे, इसी से चलता है परिवार
राजू के मुताबिक उनके यहां रोजाना कम से कम 400 से 500 समोसे बिक जाते हैं. इस हिसाब से रोज की बिक्री करीब 2500 रुपये तक पहुंच जाती है. हालांकि बिक्री मौसम और भीड़ के हिसाब से कम-ज्यादा भी होती रहती है. खास बात यह है कि इसी छोटे से समोसे के कारोबार ने उनके परिवार की स्थिति बदल दी. राजू भैया बताते हैं कि पहले शुरुआत करने के लिए ज्यादा साधन नहीं थे लेकिन मेहनत और लोगों के भरोसे से काम बढ़ता गया. आज बच्चों की पढ़ाई भी इसी कमाई से हुई और परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से काफी बेहतर है.
गैस पर नहीं, अंगीठी पर तैयार होते हैं समोसे
राजू भैया के समोसे की चर्चा सिर्फ कम कीमत की वजह से नहीं होती. यहां समोसे गैस पर नहीं बल्कि अंगीठी पर तैयार किए जाते हैं. यही वजह है कि इनके स्वाद में हल्का सा अलगपन महसूस होता है. गरमा-गरम समोसे के साथ मिलने वाली चटनी भी ग्राहकों को खूब पसंद आती है. यहां आने वाले कई पुराने ग्राहक बताते हैं कि आसपास कई जगह समोसे मिलते हैं लेकिन राजू भैया के यहां का स्वाद अलग है. यही स्वाद लोगों को बार-बार यहां खींच लाता है.
समोसे के साथ आलूबड़ा और ब्रेड पकोड़ा भी
यहां सिर्फ समोसे ही नहीं मिलते. राजू भैया के टपरे पर आलूबड़ा भी तैयार किया जाता है. सुबह के समय खास तौर पर छात्रों की पसंद को देखते हुए ब्रेड पकोड़ा भी बनाया जाता है और ये भी 10 रुपये में 2 मिल जाते हैं. सुबह पढ़ाई या काम पर जाने वाले लोग जल्दी से नाश्ता करने के लिए यहां पहुंचते हैं.
9 साल से खा रहे हैं पंकज, बोले- स्वाद के लिए दूर से आते हैं लोग
राजू भैया के पुराने ग्राहकों में शामिल पंकज रावत बताते हैं कि वह करीब 9 साल से यहां समोसे खा रहे हैं. उन्हें और उनके साथियों को बचपन से ही इस जगह पर आकर समोसा खाने की आदत है. पंकज ने कहा कि समोसे और चटनी का स्वाद ऐसा है कि अच्छे-अच्छे लोग भी यहां खिंचे चले आते हैं. यहां तक कि जो लोग महंगे रेस्टोरेंट में खाना पसंद करते हैं वे भी राजू भैया के टपरे पर समोसा खाने पहुंच जाते हैं.
सुबह 8 बजे खुलता है टपरा, दोपहर बाद हो जाता है बंद
राजू भैया का यह टपरा सुबह करीब 8 बजे खुलता है और दोपहर ढाई से 3 बजे के आसपास बंद हो जाता है. शाम के समय यहां दुकान नहीं लगती. इसके बावजूद सुबह से दोपहर तक ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती है. कोई दो समोसे खाने आता है तो कोई बच्चों के लिए पैक करवाता है. करीब दो दशक से चल रहे इस छोटे से टपरे ने अब आसपास के इलाके में अपनी अलग पहचान बना ली है. राजू भैया के समोसे की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां स्वाद के साथ कीमत भी ऐसी है जिसे आम आदमी आसानी से अपनी जेब में रखकर पहुंच सकता है. शायद यही वजह है कि 20 साल बाद भी इस छोटे से टपरे पर समोसे का स्वाद लोगों की जुबान पर कायम है.