70 साल की मंजू के हाथों में है गजब का हुनर, मुजफ्फरपुर में यहां 40 साल से खिला रही घर जैसा खाना, पेट भरने के लिए जुटती है भीड़

70 साल की मंजू के हाथों में है गजब का हुनर, मुजफ्फरपुर में यहां 40 साल से खिला रही घर जैसा खाना, पेट भरने के लिए जुटती है भीड़


मुजफ्फरपुर: आज के दौर में जहां लोग रात होते ही अपनी दुकानें बंद कर घर लौट जाते हैं. वहीं, बिहार के मुजफ्फरपुर के सरैयागंज चौराहे पर एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला ऐसी भी हैं, जो पिछले करीब 40 सालों से लगातार लोगों का पेट भरने में जुटी हैं. रात के 8 बजे से लेकर 12 बजे तक उनकी छोटी सी दुकान सजती है. यहां मजदूर, रिक्शा चालक, ठेला चालक और राहगीर देर रात तक पहुंचते हैं और बेहद कम कीमत में घर जैसा स्वादिष्ट भोजन करते हैं.

जानें दुकान की लोकेशन

सरैयागंज मुजफ्फरपुर के प्रमुख और व्यस्त इलाकों में से एक है. इसी इलाके में मुख्य सड़क के किनारे मंजू देवी अपनी छोटी सी दुकान लगाती हैं. उम्र भले ही 70 साल के करीब हो गई है, लेकिन उनके काम करने का जज्बा आज भी बरकरार है. करीब चार दशक से वे इसी तरह लोगों को भोजन उपलब्ध करा रही हैं. सबसे खास बात यह है कि मौसम चाहे गर्मी का हो, ठंड का या बरसात का, वे अपनी दुकान लगाने की कोशिश करती हैं.

जानें भोजन की कीमत

मंजू देवी ने बताया कि वह प्रतिदिन रात करीब 9 बजे दुकान लगाती हैं और रात 12 बजे तक लोगों को खाना खिलाती हैं. उनके यहां 20 रुपये से लेकर 50 रुपये तक में भरपेट भोजन मिल जाता है. खाने में गेहूं की रोटी, चावल, मक्के की रोटी, अंडा, मछली और भुजिया जैसी कई चीजें उपलब्ध रहती हैं. इन सभी व्यंजनों को वे अपने घर पर ही तैयार करती हैं.

पारंपरिक भोजन खाकर कहेंगे वाह!

यहां की सबसे खास बात यह है कि मंजू देवी के यहां पारंपरिक मक्के की रोटी भी मिलती है, जिसे लोग काफी पसंद करते हैं. भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए वे सरसों, धनिया, मिर्च और अन्य पारंपरिक मसालों का इस्तेमाल करती हैं. उनका कहना है कि उनके यहां गरीब परिवारों से लेकर आर्थिक रूप से संपन्न लोग तक भोजन करने और पैक कराकर ले जाने पहुंचते हैं. इस काम में उनके पति भी कभी-कभी हाथ बंटाते हैं. वहीं, उनका बेटा भी अब उनके साथ रहता है और सहयोग करता है. उम्र और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद मंजू देवी का यह काम लगातार जारी है.

यहां रात करीब साढ़े दस बजे जब शहर की अधिकतर दुकानें बंद होने लगती हैं, तब भी मंजू देवी की दुकान पर ग्राहकों का आना-जाना लगा रहता है. कोई मजदूरी करके लौट रहा होता है, तो कोई रिक्शा या ठेला चलाने के बाद भूख मिटाने पहुंचता है. यहां कम कीमत और घर में बने भोजन के कारण यह दुकान ऐसे लोगों के लिए किसी सहारे से कम नहीं है, जिन्हें देर रात सस्ते और अच्छे खाने की तलाश रहती है.

मंजू देवी की यह छोटी सी दुकान केवल रोजी-रोटी कमाने का जरिया नहीं, बल्कि पिछले 40 वर्षों से शहर के लोगों के साथ जुड़ा एक भरोसा भी बन चुकी है. बिना किसी बड़े होटल या रेस्टोरेंट की सुविधा के वे अपने हाथों के स्वाद से लोगों का दिल जीत रही हैं.



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