हिमाचल में 9 माह में 63 मर्डर, 279 रेप और 833 किडनैपिंग केस, देवभूमि में लगातार बढ़ रहा क्राइम का ग्राफ

हिमाचल में 9 माह में 63 मर्डर, 279 रेप और 833 किडनैपिंग केस, देवभूमि में लगातार बढ़ रहा क्राइम का ग्राफ


शिमला. हिमाचल प्रदेश में पुलिस और सरकार कानून व्यवस्था को लेकर बड़े बड़े दावे करती है. लेकिन हकीकत कुछ और है. पुलिस के अपने ही आंकड़े ही कानून व्यवस्था की सारी कलई खोल रहे हैं. साल 2026 में 9 महीनों यानी 1 जनवरी 2026 से 30 सितंबर 2026 तक प्रदेश के अलग-अलग पुलिस थानों में हत्या, दुष्कर्म, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध के सैकड़ों मामले दर्ज किए गए.

0हिमाचल पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में प्रदेश में 63 हत्याएं, हत्या के प्रयास के 80 मामले और दुष्कर्म के 279 मामले दर्ज हुए. सबसे अधिक संख्या अपहरण के मामलों की रही, जिनका आंकड़ा 833 तक पहुंच गया है.

आंकड़ों को समय के हिसाब से देखें तो देवभूमि हिमाचल में हर दिन औसतन 2 से ज्यादा अपहरण के मामले सामने आए. महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के 373 और क्रूरता के 117 मामले दर्ज होना भी गंभीर चिंता का विषय है. इसके अलावा आत्महत्या के लिए उकसाने के 46, ईव-टीजिंग के 137 और चेन स्नैचिंग के 10 मामले सामने आए.

मिनटों और घंटों में अपराध का हिसाब

1 जनवरी से 30 सितंबर 2026 तक कुल 273 दिन यानी 6,552 घंटे होते हैं. इसी अवधि में दर्ज मामलों को समय के औसत में बदलें तो तस्वीर इस तरह सामने आती है.

  • हत्या के कुल 63 मामले- औसतन हर 4 दिन 8 घंटे 34 मिनट में एक हत्या.
  • हत्या का प्रयास के 80 मामले- औसतन हर 3 दिन 9 घंटे 54 मिनट में एक मामला; यानी करीब हर 82 घंटे में एक केस
  • दुष्कर्म के 279 मामले- औसतन हर 23 घंटे 34 मिनट में एक मामला, यानी लगभग हर दिन एक से अधिक केस
  • अपहरण के 833 मामले- औसतन हर 7 घंटे 52 मिनट में एक मामला, यानी करीब हर 8 घंटे में एक अपहरण का केस.
  • महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के 373 मामले- औसतन हर 17 घंटे 33 मिनट में एक मामला
  • महिलाओं के साथ क्रूरता: 117 मामले- औसतन हर 2 दिन 8 घंटे 18 मिनट में एक केस
  • आत्महत्या के लिए उकसाना: 46 मामले- औसतन हर 5 दिन 22 घंटे 26 मिनट में एक मामला
  • ईव-टीजिंग: 137 मामले — औसतन हर 47 घंटे 49 मिनट में एक मामला केस
  • चेन स्नैचिंग: 10 मामले — औसतन हर 27 दिन 7 घंटे में एक मामला
  • दहेज निषेध अधिनियम: 4 मामले  औसतन हर 68 दिन 6 घंटे एक केस
  • अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम: 12 मामले- औसतन हर 22 दिन 18 घंटे एक मामला

अपहरण के 833 मामले, महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल

अपहरण के 833 मामले इस अवधि में दर्ज अपराधों के बीच सबसे बड़ा आंकड़ा हैं. औसतन हर दिन तीन से कुछ कम अपहरण के मामले दर्ज हुए. वहीं, दुष्कर्म के 279 मामलों का मतलब है कि नौ महीनों में औसतन हर दिन एक से अधिक केस दर्ज हुआ. महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के 373 और ईव-टीजिंग के 137 मामले भी महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े करते हैं.महिलाओं के साथ क्रूरता के 117 मामलों और आत्महत्या के लिए उकसाने के 46 मामलों को भी गंभीरता से देखने की जरूरत है. नौ महीनों में हत्या के 63 और हत्या के प्रयास के 80 मामले दर्ज होना भी कानून-व्यवस्था के लिहाज से अहम है. इसके साथ ही चेन स्नैचिंग के 10, दहेज निषेध अधिनियम के तहत चार और अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत 12 मामले दर्ज हुए.

सुक्खू सरकार के कार्यकाल के दौरान अपराध का ग्राफ

सुक्खू सरकार के अब तक के कार्यकाल को देखें तो साल 2023 में 92 मर्डर हुए थे, 2024 में 83 और 2025 में 84 हत्याएं हुई थीं. इसी तरह हत्या के प्रयास के 2023 में 75 मामले थे, 2024 में भी 75  और 2025 में 84 केस दर्ज हुए थे. महिलाओं के प्रति अपराध की बात करें तो 2023 में रेप के 344 मामले थे, 2024 में 330 और 2025 में 397 मामले दर्ज हुए थे. 2023 में अपहरण के 438 मामले थे, 2024 में 490 और 2025 में 574 केस दर्ज हुए थे जो 2026 के 9 महीनों में ही 833 पहुंच गए हैं. महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के 2023 में 506 मामले थे, 2024 में 496 और 2025 में 521 मामले थे. इसी तरह महिलाओं के प्रति क्रूरता के 2023 में 218 मामले थे, 2024 में 178 और 2025 में 156 मामले दर्ज हुए थे.



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