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भारत ने जिस दैत्य को दशकों पहले पूरी तरह से खदेड़ दिया था, वहीं अब पड़ोसी पाकिस्तान में जिंदगियां लीलने के लिए खड़ा है. यह दैत्य खासतौर पर बच्चों अपना शिकार बना रहा है. फिलहाल, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में एक 7 महीने के बच्चे के इस दैत्य का नया शिकार बना है. इसी के साथ, 2026 में इस तरह के मामलों की संख्या 9 हो गई है. क्या है पूरा मामला जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर.
भारत में दम तोड़ चुके दैत्य ने अब पाकिस्तान ने बच्चों को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है. नया मामला पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा से सामने आया है. (एआई इमेज)
दशकों की लंबी जंग के बाद भारत ने जिसको पूरी तरह हराकर खदेड़ दिया था, आज वही दैत्य पड़ोसी देश पाकिस्तान ने जिंदगियों को लीलने के लिए तैयार खड़ा है. जी हां, हम यहां पर बात पोलियो की कर रहे है, जो पाकिस्तान में बच्चों की जिंदगी पर सबसे बड़ा खतरा बनकर मंडरा रहा है. पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में पोलियो का एक नया मामला सामने आया है.
इसी के साथ, इस साल पाकिस्तान में वाइल्ड पोलियो वायरस के मामलों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है. इस बार वायरस ने 7 महीने के एक मासूम बच्चे को अपना शिकार बनाया है. पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित रीजनल रेफरेंस लैबोरेटरी फॉर पोलियो इरेडिकेशन ने गुरुवार को देश के 9वें मामले की पुष्टि की है. संक्रमित बच्चा खैबर जिले की बारा तहसील के मस्तक यूनियन काउंसिल का रहने वाला है.
खैबर में पोलियो का है यह तीसरा मामला
खैबर पख्तूनख्वा में लगातार पोलियो वायरस की मौजूदगी सामने आ रही है. इस साल अकेले खैबर जिले में यह तीसरा मामला है, जबकि पूरे खैबर पख्तूनख्वा में अब तक 7 मामले सामने आ चुके हैं. बाकी दो मामले सिंध से रिपोर्ट हुए हैं. पाकिस्तान के पोलियो अधिकारियों के अनुसार, खैबर जिले में सामने आए तीनों मामलों में मिले वायरस का जेनेटिक लिंक अफगानिस्तान में फैल रहे पोलियो वायरस से जुड़ा है. अफगानिस्तान भी इस समय पोलियो के प्रकोप से जूझ रहा है और इस साल वहां 50 मामले सामने आ चुके हैं.
अफगानिस्तान से जुड़ा वायरस, सीमा पार मंडरा रहा खतरा
खैबर और पेशावर जिलों को मिलाकर बना पेशावर ब्लॉक अफगानिस्तान की सीमा से लगा हुआ है. इसी इलाके और इसके आसपास के दक्षिणी केपीके के तमाम जिलों में लगातार पोलियो वायरस की मौजूदगी सामने आ रही है. यही वजह है कि पाकिस्तान में पोलियो की जंग ने एक बार फिर सामने आ खड़ी हुई है. वायरस के खिलाफ अभियान चलने के बावजूद सीमावर्ती इलाकों में बच्चों पर इसका खतरा लगातार बना हुआ है. पाकिस्तान की पोलियो इरेडिकेशन पहल ने साफ कहा है कि पोलियो वायरस किसी सीमा को नहीं मानता. जब तक हर बच्चे को सुरक्षित नहीं किया जाता और वायरस का ट्रांसमिशन पूरी तरह बंद नहीं होता, तब तक किसी भी बच्चे को सुरक्षित नहीं माना जा सकता है.
करीब 2.4 करोड़ बच्चों को बचाने की जंग
पाकिस्तान सरकार ने वायरस को रोकने के लिए बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन अभियान शुरू किया है. फिलहाल 97 जिलों में डोर-टू-डोर पोलियो वैक्सीनेशन कैंपेन चल रहा है. इसके तहत करीब 2.4 करोड़ बच्चों को पोलियो से बचाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके अलावा पेशावर ब्लॉक की 78 यूनियन काउंसिल में 26 से 31 अक्टूबर तक टारगेटेड इंजेक्टेबल पोलियो वैक्सीनेशन कैंपेन चलाया गया. इस अभियान में 10 साल तक की उम्र के करीब 8.29 लाख बच्चों को वैक्सीन दी गई. लेकिन नए मामले यह बता रहे हैं कि सिर्फ अभियान चलाना ही काफी नहीं है. वायरस को पूरी तरह खत्म करने के लिए लगातार वैक्सीनेशन और निगरानी की जरूरत है.
20 हजार से 9 मामलों तक पहुंचा पाकिस्तान
बीते कुछ सालों में पाकिस्तान ने पोलियो के खिलाफ लड़ाई में बड़ी कामयाबी हासिल की है. 1990 के दशक की शुरुआत में जहां देश में अनुमानित 20 हजार पोलियो केस सामने आते थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ 31 रह गई. यानी मामलों में करीब 99.8 फीसदी की कमी आई है. लेकिन 2026 में अब तक 9 मामले सामने आ चुके हैं. इनमें 7 केस खैबर पख्तूनख्वा और 2 सिंध से हैं. आपको बता दें कि पोलियो की बेहद संक्रामक बीमारी है. इसका कोई इलाज नहीं है और संक्रमण होने पर शरीर में जिंदगीभर के लिए पैरालिसिस हो सकता है. कुछ मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है.