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Home Loan EMI : मकान खरीदारों के लिए असली मुसीबत अभी आना बाकी है. कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने कहा है कि आरबीआई आने वाले समय में रेपो रेट 0.75 फीसदी और बढ़ा सकता है. इसका मतलब है कि होम लोन सहित सभी तरह के खुदरा कर्ज की ब्याज दरें भी बढ़ जाएंगी और आम आदमी पर ईएमआई का बोझ भी बढ़ने की पूरी आशंका है.
आरबीआई ने अक्टूबर में 0.25 फीसदी रेपो रेट बढ़ाया था.
नई दिल्ली. सस्ते कर्ज का दौर अब खत्म हो चुका है. रिजर्व बैंक ने अक्टूबर की एमपीसी बैठक में 0.25 फीसदी रेपो रेट बढ़ाकर इसका साफ संकेत दे दिया है. लेकिन, मकान खरीदारों पर असली खतरा तो अभी आना बाकी है. कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) रेपो रेट में अभी 0.75 फीसदी की और बढ़ोतरी कर सकता है. इसका मतलब है कि 50 लाख के होम लोन पर करीब 2,400 रुपये महीने की ईएमआई और बढ़ने वाली है.
कोटक महिंद्रा ने कहा कि भारतीय कंपनियां एआई आधारित कारोबार विकसित करने की दिशा में काम कर रही हैं. यदि निवेशकों को अमेरिका की एआई आधारित कंपनियों का मूल्यांकन अधिक लगता है, तो इक्विटी निवेश का प्रवाह उलटकर भारत की ओर आ सकता है. कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक और गैर-कार्यकारी निदेशक कोटक ने समूह की ब्रोकिंग इकाई की ओर से जारी एक विशेष वीडियो संदेश में कहा कि हमने आरबीआई की ओर से पहली बढ़ोतरी देखी है. मुझे ब्याज दरों में 0.50 से 0.75 फीसदी की और वृद्धि की संभावना दिखती है.
कितना बढ़ सकता है लोन का बोझ
कोटक की मानें तो आरबीआई अभी 0.75 फीसदी ब्याज दर और बढ़ा सकता है. ऐसे मान लीजिए किसी ने 50 लाख का होम लोन 20 साल के लिए 8 फीसदी की ब्याज दर पर लिया है तो उन्हें अभी 41,822 रुपये की ईएमआई भरनी पड़ती है और पूरे टेन्योर में 50,37,281 रुपये ब्याज के रूप में चुकाने होंगे. लेकिन, ब्याज में 0.75 फीसदी बढ़ोतरी होने पर होम लोन पर प्रभावी दर 8.75 फीसदी हो जाएगी. इस तरह, ईएमआई बढ़कर 44,186 रुपये हो जाएगी. इसका मतलब है कि हर महीने करीब 2,400 रुपये का बोझ बढ़ जाएगा और पूरे टेन्योर में ब्याज के रूप में 56,04,529 रुपये चुकाने होंगे, जो करीब 5.70 लाख रुपये ज्यादा है.
एआई ने बाजार को दबाव में रखा
एआई के बारे में उन्होंने कहा कि पिछले साल भारत को एआई के लिहाज से निवेश के लिए कम आकर्षक बाजार के रूप में देखा गया. कंपनियों के ऊंचे मूल्यांकन के कारण विदेशी निवेशकों ने भारत से पैसा निकाला और विदेशों में एआई से जुड़े अवसरों में निवेश किया. ग्लोबल कंपनियां अपनी एआई संबंधी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए जिस स्तर पर कर्ज ले रही हैं, उससे कई मामलों में कंपनियों का मूल्यांकन काफी बढ़ गया है. भारत भी अपनी एआई क्षमता विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. ऐसे में यदि निवेश का प्रवाह उलटता है, तो भारत को भी इसका लाभ मिल सकता है.
भारतीय कंपनियों के पास ज्यादा मौके
उन्होंने कहा कि अन्य देशों की तुलना में भारत में कंपनियों का मूल्यांकन कम है और यहां आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं भी मजबूत हैं. एआई में जरूरत से ज्यादा निवेश के कारण बने दबाव में कमी आने के साथ भारत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) स्थिर होने की उम्मीद है. इसका फायदा भारतीय कंपनियों को मिल सकता है, क्योंकि चीन और अमेरिका दोनों ही बाजार एआई के दबाव में चल रहे हैं.