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Job Pressure : बैंगलुरु के एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डिन पर अपनी पोस्ट में बताया कि उनके करियर का सबसे मुश्किल समय जोहो में काम करना था. उन्होंने कंपनी के फाउंडर की तारीफ भी की और अपने मानसिक तनाव के लिए प्रबंधन को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया. हालांकि, यह जरूर कहा कि कोई जगह दुनिया के सबसे अच्छी हो सकती है लेकिन आपके लिए खराब अनुभव साबित हो सकता है.
जोहो भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी है, जिसने देसी वॉट्सऐप बनाया है.
नई दिल्ली. भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो (Zoho) के फाउंडर श्रीधर वेम्बू का नाम अक्सर तारीफ के लिए लिया जाता है, लेकिन बैंगलुरु के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन (LinkedIn) पर कुछ ऐसा लिखा कि बवाल हो गया. इस युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपने करियर के सबसे मुश्किल दौर को याद करते हुए बताया कि जोहो ने उनके तीन साल बर्बाद कर दिए. हालांकि, उन्होंने कंपनी के फाउंडर श्रीधर वेम्बू की तारीफ की और कंपनी के मैनेजमेंट को भी दोष देने से इनकार कर दिया.
अभी फ्लिपकार्ट में बतौर सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर काम करने वाले युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर केवल अग्रवाल ने बताया कि मैं साल 2015 से 2018 तक जोहो में रहा और यहां अपनी पहली नौकरी को लेकर काफी उत्साहित था. लगा कि सपना सच हो गया है. मैं कंपनी में तकनीकी स्टॉफ के रूप में भर्ती हुआ था और नौकरी मिलने पर काफी खुश भी था. लेकिन, जल्द ही मेरा अनुभव खराब होने लगा और उम्मीद से अलग परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. उन्होंने बताया कि जोहो में काम करते समय लगातार तनाव और चिंता में रहने लगा. मेरा आत्मविश्वास भी कमजोर हो गया और कोडिंग से तो नफरत होने लगी. मैंने इस बात की उम्मीद भी छोड़ दी थी कि जिंदगी में कभी कुछ कर पाउंगा.
तनाव बढ़ने की गलती किसकी
अग्रवाल ने कंपनी पर निशाना साधने के बजाय बताया कि वहां काम करते समय वर्किंग लाइफ और पर्सनल लाइफ के बीच तालमेल नहीं बिठा सका. पता नहीं क्यों, लेकिन जैसे ही मैंने जोहो छोड़कर उससे भी छोटी कंपनी मिशीपे (MishiPay) ज्वाइन की तो महज सालभर के भीतर ही मेरा आत्मविश्वास और उत्साह वापस आ गया. उन्होंने कहा कि कभी-कभार चीजें सही नहीं बैठतीं और इसमें किसी की गलती भी नहीं होती. हो सकता है कि आप सबसे अच्छी जगह काम कर रहे हों, लेकिन वहां आपके लिए अच्छा न हो. ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हो रहा था.
जोहो को नहीं दिया दोष
अग्रवाल ने अपनी इस स्थिति के लिए जोहो को दोष नहीं दिया और न ही कंपनी के फाउंडर वेम्बू की आलोचना की. उन्होंने कहा कि वेम्बू उन कुछ लोगों में से हैं, जिनका मैं बहुत सम्मान करता हूं और जिन्हें अपना आदर्श मानता हूं. साथ ही इस स्थिति के लिए मैं खुद को भी दोष नहीं दूंगा. मैं जब परेशान रहने लगा तो नौकरी बदलने के बारे में सोचना शुरू कर दिया. यही मेरे लिए सबसे सही फैसला था, क्योंकि लगातार तनाव में रहने से करियर को काफी नुकसान होने लगा था.
दबाव में दिख रहा आईटी सेक्टर
अग्रवाल ने अपनी बात ऐसे समय में सोशल मीडिया पर शेयर की है, जब भारतीय आईटी सेक्टर लगातार दबाव में चल रहा है. देश के 2,178 प्रोफेशनल के बीच कराए एक सर्वे में पता चला है कि 35 फीसदी कर्मचारियों ने हालिया अप्रेजल में सैलरी नहीं बढ़ने या कटौती होने की बात कही है. इतना ही नहीं, 10 में से 6 कर्मचारियों ने 5 फीसदी या उससे भी कम सैलरी हाइक की बात कही. अग्रवाल की पोस्ट के बाद कई यूजर ने कमेंट भी किया और कहा कि बिना टॉक्सिक वर्कप्लेस पर अंगुली उठाए और खुद को दोष दिए, इतनी बड़ी बात कहना आसान नहीं है. उन्होंने अग्रवाल की तारीफ करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में नया विकल्प खोजना ही बेहतर होता है.