Tarun Tejpal Supreme Court hearing। Tushar Mehta Kapil Sibal Argument in Supreme Court। तेजपाल पर तुषार मेहता-सिब्‍बल में तीखी बहस, मांग पर घमासान

Tarun Tejpal Supreme Court hearing। Tushar Mehta Kapil Sibal Argument in Supreme Court। तेजपाल पर तुषार मेहता-सिब्‍बल में तीखी बहस, मांग पर घमासान


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तरुण तेजपाल पर तुषार मेहता-कपिल सिब्‍बल में तीखी बहस, छोटी सी मांग पर घमासान

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Tarun Tejpal Supreme Court Hearing: तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 5 नवंबर तक टल गई है. तेजपाल के वकील कपिल सिब्बल ने दिवाली पर उनकी रिहाई की पुरजोर वकालत करते हुए कहा कि निचली अदालत ने उन्हें बरी किया था, इसलिए उन्हें त्योहार पर घर आने देना चाहिए. गोवा सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रिहाई की मांग का कड़ा विरोध किया.

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कोर्ट में तीखी बहस हुई.

नई दिल्‍ली. तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल के 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 5 नवंबर तक के लिए टल गई है. हालांकि, इस सुनवाई के दौरान तेजपाल की पैरवी कर रहे देश के दिग्गज वकील कपिल सिब्बल और गोवा सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के बीच दिवाली की रिहाई को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली. सुनवाई की शुरुआत में जब तुषार मेहता ने मामले को आगे टालने की मांग की, तो कपिल सिब्बल ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई. लेकिन उन्होंने तुरंत कोर्ट से तेजपाल को त्योहार के मौके पर राहत देने की वकालत कर दी. सिब्बल ने बेहद आक्रामक अंदाज में अदालत से गुहार लगाई, “यदि वे समय लेना चाहते हैं तो ले सकते हैं, लेकिन तेजपाल को इस दिवाली पर घर आने की अनुमति दी जानी चाहिए.”

‘निचली अदालत ने तो बरी किया था… तो फिर अंदर क्यों रहें?’
कपिल सिब्बल की इस मांग का सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कड़ा विरोध किया और तर्क दिया कि तेजपाल इस समय सजायाफ्ता हैं, इसलिए उन्हें रिहा नहीं किया जा सकता. इस पर सिब्बल ने तुंरत पलटवार करते हुए कहा” तो क्या हुआ? यह दोषसिद्धि निचली अदालत के बरी करने के फैसले को पलटने के बाद हुई है. वह दिवाली पर घर आ सकते हैं. उन्हें जेल के अंदर क्यों रहना चाहिए?” सिब्बल ने जोर देकर कहा कि चूंकि सत्र अदालत ने तेजपाल को बरी कर दिया था और हाईकोर्ट का फैसला उस बरी किए जाने के खिलाफ आया है, इसलिए त्योहार पर राहत पाना उनका हक बनता है.

गोवा सरकार का सख्त ऐतराज, अब 5 नवंबर को फैसला
गोवा सरकार ने सिब्बल की इस अंतरिम रिहाई की अर्जी का पुरजोर विरोध किया. सरकार का कहना था कि हाईकोर्ट से 10 साल की सजा पा चुके अपराधी को दिवाली के नाम पर कोई रियायत नहीं मिलनी चाहिए. न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्न बी. वराले की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की सुनवाई 5 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी.

क्या है पूरा मामला?
गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में नवंबर 2013 में अपनी जूनियर सहकर्मी के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी. हाईकोर्ट ने मई 2021 के सेशंस कोर्ट के बरी करने वाले फैसले को रद्द कर दिया था, जिसके बाद सितंबर में तेजपाल ने सरेंडर किया था और वे इस वक्त नॉर्थ गोवा की कोलवाले सेंट्रल जेल में बंद हैं. गोवा सरकार ने तेजपाल की सजा को उम्रकैद में बदलने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, तो वहीं तेजपाल ने अपनी सजा के खिलाफ अपील की है.



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