दुनियाभर की चेतावनियों और कड़े प्रतिबंधों को ठेंगा दिखाते हुए उत्तर कोरिया के ‘सनकी तानाशाह’ यानी किम जोंग उन ने नया कांड कर दिया है. नॉर्थ कोरिया ने एक बार फिर अपनी नई और सबसे खौफनाक मिसाइल तकनीक का ट्रेलर दिखकर पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं. उत्तर कोरिया ने एक ऐसी घातक रणनीतिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जो आसमान से सीधे 90 डिग्री के कोण पर नीचे गिरकर पाताल में छिपे बंकरों और अंडरग्राउंड मिलिट्री ठिकानों के परखच्चे उड़ाने उड़ा सकती है. इस नई मिसाइल और इसके विनाशकारी ‘डिस्पर्सल वॉरहेड’ की पहली झलक देखकर ही पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया और उसके सहयोगियों में हड़कंप मच गया है.
क्या है ये उत्तर कोरिया की ‘वर्टिकल स्ट्राइक’ तकनीक?
उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया एजेंसी KCNA यानी कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के मिसाइल प्रशासन ने सोमवार को इस रणनीतिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया. इस परीक्षण का मुख्य मकसद मिसाइल की ‘वर्टिकल स्ट्राइक’ यानी बिल्कुल सीधे ऊपर से नीचे की तरफ हमला करने की क्षमता और उसके अंतिम चरण में उड़ने की सटीकता को जांचना था.
- सामान्य बनाम वर्टिकल स्ट्राइक: आमतौर पर क्रूज मिसाइलें जमीन या समुद्र के पैरलल यानी तिरछी दिशा में उड़ती हुई अपने टारगेट पर हमला करती हैं. लेकिन इस नई तकनीक में मिसाइल लक्ष्य के ठीक ऊपर पहुंचकर 90 डिग्री के कोण में मुड़ जाती है और सीधे नीचे गिरती है.
- गुरुत्वाकर्षण का फायदा: इस तरह सीधे गिरने से मिसाइल को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल का फायदा मिलता है, जिससे इसकी गति और टकराने की ताकत कई गुना बढ़ जाती है.
कितनी कबाही मचा सकते हैं किम जोंग उन?
उत्तर कोरिया के वारहेड संस्थान ने दावा किया है कि इस क्रूज मिसाइल में एक मध्यम आकार का ‘डिस्पर्सल वॉरहेड’ यानी क्लस्टर/सब-मुनिशन बम लगाया गया है.
ये वॉरहेड हवा में ही फटकर सैकड़ों छोटे-छोटे बमों को चारों तरफ बिखेर देता है. उत्तर कोरियाई वैज्ञानिकों के अनुसार, ये वॉरहेड 5 से 6 हेक्टेयर यानी लगभग 12 से 15 एकड़ के विशालकाय क्षेत्र को पलभर में पूरी तरह तबाह और श्मशान में तब्दील करने की क्षमता रखता है.
बता दें कि उत्तर कोरिया अपनी मिलिट्री रणनीति में बड़े पैमाने पर क्लस्टर हथियारों को शामिल कर रहा है. शनिवार को भी उत्तर कोरिया ने अपनी सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए क्लस्टर बम का परीक्षण किया था और उसने ऐलान किया है कि इस साल के अंत तक वो ऐसे कई हथियारों को अपनी सेना में तैनात कर देगा.
दक्षिण कोरिया के लिए क्यों बना काल?
उत्तर कोरिया के इस परीक्षण के पीछे सबसे बड़ा निशाना उसका पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया ही है. सोल स्थित ‘कोरिया डिफेंस एंड सिक्योरिटी फोरम’ के सैन्य विशेषज्ञ शिन जोंग-वू का मानना है कि उत्तर कोरिया ने ये तकनीक खास तौर पर दक्षिण कोरिया की भूमिगत सैन्य सुविधाओं और पहाड़ों के अंदर बनी सुरंगों के प्रवेश द्वारों को ध्वस्त करने के लिए विकसित की है.
- पहाड़ी इलाकों में छिपे ठिकाने: दक्षिण कोरिया और अमेरिकी सेना ने उत्तर कोरिया के खतरे से बचने के लिए कई महत्वपूर्ण बंकर, कमांड सेंटर और बारूद के डिपो पहाड़ों के अंदर गहरे गड्ढों में बना रखे हैं.
- तिरछे हमले बेअसर: इन भूमिगत ठिकानों पर अगर नॉर्मल एंगल यानी तिरछे एंगल से मिसाइल दागी जाए, तो पहाड़ और कंक्रीट की दीवारें मिसाइल के असर को काफी हद तक झेल लेती हैं.
- सीधा वार यानी पक्का खात्मा: लेकिन वर्टिकल स्ट्राइक मिसाइल पहाड़ों और कंक्रीट की छतों को चीरती हुई सीधे अंदर घुस जाती है और पाताल तक छिपे सैन्य बेस का सफाया कर देती है.
उत्तर कोरिया का दावा: ‘सुरक्षा के लिए युद्ध क्षमता जरूरी’
मिसाइल प्रशासन के प्रमुख ने साफ किया है कि बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए अपनी सेना की ‘वास्तविक युद्ध क्षमता’ को बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है. उनका कहना है कि इस तरह की उन्नत हथियार प्रणालियों से ही देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है और किसी भी बाहरी खतरे को रोका जा सकता है.
पड़ोसी दक्षिण कोरिया का पलटवार: ‘हमारा सिस्टम बहुत आगे है’
उत्तर कोरिया के इस खौफनाक दावे के तुरंत बाद दक्षिण कोरियाई सेना भी अलर्ट मोड पर आ गई है. दक्षिण कोरिया की सेना के प्रवक्ता कैप्टन जांग डो-यंग ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया की किसी भी उकसावे वाली हरकत का तुरंत और मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है.
दक्षिण कोरिया ने दावा किया कि उत्तर कोरिया जिस वर्टिकल स्ट्राइक तकनीक का ढिंढोरा पीट रहा है, दक्षिण कोरियाई सेना के पास उससे भी कहीं ज्यादा उन्नत और सटीक हमला करने वाली मिसाइल टेक्नोलॉजी और आधुनिक हथियार पहले से मौजूद हैं.
उत्तर कोरिया कर क्या रहा है?
इस नए मिसाइल परीक्षण ने कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है. एक तरफ जहां उत्तर कोरिया लगातार नए-नए और विनाशकारी वारहेड्स के परीक्षण कर अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है, वहीं दक्षिण कोरिया और अमेरिका भी इस खतरे का तोड़ निकालने में जुट गए हैं. किम जोंग उन का ये ‘पाताल में छेद करने वाला प्लान’ आने वाले दिनों में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के सुरक्षा समीकरणों को और अधिक खतरनाक मोड़ पर ला सकता है.