8 सूत्रीय मांगों को लेकर सफाई वाहनों से गूंजा आंदोलन का ऐलान, भोपाल में प्रदेश भर के सफाई कर्मचारी जुटे


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Bhopal: एमपी के सफाई कर्मचारी अपनी-अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं. प्रदेश के सभी नगर पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम के करीब 25 हजार सफाई कर्मी इस हड़ताल में शामिल हैं. राजधानी भोपाल के शाहजहानी पार्क में कर्मचारी धरने पर बैठे हैं और अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. क्या है पूरा मामला, जानिए…

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भोपाल में सफाई कर्मचारियों का हल्ला बोल, नीलम पार्क में क्यों जुट रहे 10 हजार Zoom

PIC CREDIT- NEWS18

शिवकांत आचार्य(भोपाल), 

MP Sanitation Workers Protest: दिवाली से पहले मध्य प्रदेश के सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने की पूरी तैयारी पर हैं. अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के बैनर तले राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में प्रदेश भर से करीब 10 हजार सफाई कर्मचारी जुटेंगे और धरना प्रदर्शन करेंगे. इसकी सूचना कर्मचारियों तक पहुंचाने के लिए सफाई वाली गाड़ियों में अनाउंसमेंट भी कराया गया है.

क्या हैं सफाई कर्मचारियों की मांगें
कर्मचारियों की मुख्य मांग वेतन में बढ़ोतरी और नियमितीकरण (Regularization) की है. संविदा और अस्थायी कर्मचारियों को रेगुलर किया जाए, यह उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है. इसके अलावा कर्मचारी चाहते हैं कि 29 दिवसीय दैनिक वेतन भोगियों को या तो नियमित किया जाए या उन्हें 25 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए. विनियमित कर्मचारियों (Regulated employees) को नियमित करने की मांग भी उठाई गई है. कर्मचारियों ने कुल 8 सूत्रीय मांगें सरकार के सामने रखी हैं.

4 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
यूनियन ने साफ कहा है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो 4 नवंबर से प्रदेश भर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी. कर्मचारियों के मुताबिक, वे लंबे समय से अपनी बात रखते आ रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं मिला, इसलिए अब उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है.

कामकाज पर पड़ सकता है असर
ऐसे मामलों में अगर हड़ताल होती है तो प्रदेश की नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषदों में कामकाज पर असर हो सकता है. सफाई कर्मियों के काम बंद करने से कचरा उठाने और सड़कों की सफाई जैसे रोजमर्रा के काम रुक सकते हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा. त्योहार के मौसम में यह स्थिति प्रशासन के लिए भी चुनौती बन सकती है. अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार कर्मचारियों से बातचीत कर समय रहते कोई समाधान निकालती है या नहीं. फिलहाल, सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं.



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