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Shimla Doctors Protest: शिमला के राजकीय दंत महाविद्यालय एवं अस्पताल के एमडीएस रेजिडेंट डॉक्टरों ने कॉलेज परिसर में जमकर प्रदर्शन किया. उनका कहना था कि पिछले तीन महीने से स्टाइपेंड नहीं मिला है. उन्हें मरीज के इलाज करने के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करके उपकरण खरीदना पड़ रहा है. उन्हें स्टाइपेंड के लिए कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है. फिर भी कोई सुन नहीं रहा है. वे लोग परेशान होकर प्रदर्शन कर रहे है.
Shimla Doctors Protest: स्टाइपेंड नहीं मिलने से नाराज राजकीय दंत महाविद्यालय एवं अस्पताल के एमडीएस रेजिडेंट डॉक्टरों ने कॉलेज परिसर में जमकर प्रदर्शन किया. उनका कहना था कि पिछले तीन महीने से स्टाइपेंड नहीं मिला है. उन्हें मरीज के इलाज करने के लिए भी अपनी जेब से पैसे खर्च करके उपकरण खरीदना पड़ रहा है. उन्हें स्टाइपेंड के लिए कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है. फिर भी कोई सुन नहीं रहा है. वे लोग परेशान होकर प्रदर्शन कर रहे है.
किराये के कमरों में रहकर उठाना पड़ रहा खर्च
कई डॉक्टरों का कहना है की एक ओर किराये के कमरों में रहकर अपना खर्च उठाना पड़ रहा है. वहीं मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी सामग्री और उपकरण भी अपनी जेब से खरीदने पड़ रहे हैं. इस वजह से डॉक्टरों ने कॉलेज परिसर में प्रदर्शन कर अपना रोष जताया। इस दौरान ‘नो स्टाइपेंड, नो वर्क’ और ‘ना बहाने, ना इनकार, हमें चाहिए अपना अधिकार’ के नारे लगाए. डॉक्टरों का कहना है कि नेशनल डेंटल कमीशन (एनडीसी) की गाइडलाइन के अनुसार हर महीने के पहले सप्ताह में स्टाइपेंड मिलना चाहिए, लेकिन यहां दो से तीन महीने तक भुगतान नहीं होता.
डॉक्टरों के लिए हॉस्टल सुविधा भी उपलब्ध नहीं
डॉ. प्रणव ने बताया कि तीसरे वर्ष में रहते हुए भी उन्हें बार-बार स्टाइपेंड के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. कहीं से भुगतान की तारीख को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं मिलता. डॉ. हृदेश कुमार दीक्षित ने बताया कि कॉलेज वर्ष 1998 में शुरू हुआ था, लेकिन आज तक रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए हॉस्टल सुविधा उपलब्ध नहीं है. उन्हें संजौली और आसपास के क्षेत्रों में किराये पर रहना पड़ता है. कुछ डॉक्टर जंगल के आसपास के क्षेत्रों में रहते हैं. हाल ही में एक रेजिडेंट डॉक्टर पर बंदरों के हमले की घटना भी हुई है.
मांगें पूरी नहीं होनें पर ओपीडी सेवाएं होंगी ठप
डॉ. तनुजा ठाकुर ने बताया कि विभाग में मरीजों के उपचार के लिए जरूरी बुनियादी सामग्री उपलब्ध नहीं होती. कई बार डॉक्टरों को खुद सामान खरीदना पड़ता है. स्टाइपेंड के लिए अकाउंट सेक्शन में संपर्क करने पर अलग-अलग कार्यालयों में भेज दिया जाता है. डॉक्टरों ने प्रिंसिपल को औपचारिक पत्र भी भेजा है. उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो ओपीडी सेवाएं बंद कर हड़ताल की जाएगी. कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. योगेश भारद्वाज ने कहा कि एमडीएस रेजिडेंट डॉक्टरों को जल्द लंबित स्टाइपेंड जारी किया जाएगा. इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया चल रही है और संबंधित फाइलों पर उनके हस्ताक्षर होने हैं.