IIT Delhi के छात्रों ने बनाई अनोखी डिवाइस! सिर्फ सांस से लगाएगी बीमारी का पता, खून की जांच से भी मिलेगी राहत

IIT Delhi के छात्रों ने बनाई अनोखी डिवाइस! सिर्फ सांस से लगाएगी बीमारी का पता, खून की जांच से भी मिलेगी राहत


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IIT Delhi के छात्रों ने बनाई अनोखी डिवाइस! सिर्फ सांस से लगाएगी बीमारी का पता

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आईआईटी दिल्ली के स्टूडेंट्स ने एक ऐसा ब्रैथ मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया है, जो सांस के जरिए शरीर की बीमारियों का पता लगा सकेगा. इसे प्रोफेसर रितु गुप्ता के निर्देशन में तैयार किया गया है. इस पूरी डिवाइस को आईआईटी दिल्ली की केमेस्ट्री प्रोफेसर रितु गुप्ता के दिशा निर्देश में तैयार किया गया है. 

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नई दिल्ली: आपके शरीर में जब भी कोई बीमारी आपको महसूस होती है, तो सबसे पहले आपको डॉक्टर खून की जांच कराने की सलाह देते हैं. इस खून की जांच को करने के बाद आपको रिपोर्ट को इंतजार करना पड़ता है. उसके बाद आप डॉक्टर के पास जाते हैं, जिसमें एक लंबा खर्चा तो होता ही है. साथ में काफी वक्त बर्बाद हो जाता है. ऐसे में लोगों की इस दिक्कत को दूर करने के लिए आईआईटी दिल्ली के स्टूडेंट्स ने मिलकर एक ऐसी डिवाइस बनाई है या यूं कहें एक ऐसा ब्रैथ मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया है. जो आपकी सांस के जरिए ही बता देगा कि आपके शरीर के अंदर क्या गड़बड़ी चल रही है.

इस तरह काम करेगा यह सिस्टम

आपको बता दें कि आईआईटी दिल्ली में ओपन हाउस इवेंट के दौरान बीटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग सेकंड ईयर और डिपार्टमेंट ऑफ केमिस्ट्री के स्टूडेंट्स ने इस डिवाइस को लोगों के सामने प्रदर्शित किया. जिसे देखने के लिए अलग-अलग स्कूलों से आए हुए स्टूडेंट्स की भी भीड़ लग गई. इस पूरी डिवाइस को आईआईटी दिल्ली की केमेस्ट्री प्रोफेसर रितु गुप्ता के दिशा निर्देश में तैयार किया गया है.

लोकल 18 से खास बातचीत में स्टूडेंट दिव्यांश और आर्यमान ने बताया कि इस डिवाइस के जरिए डॉक्टर को यह फायदा होगा कि उन्हें मरीज की बीमारी का पता सिर्फ एक जांच से चल जाएगा. वहीं, मरीजों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सिर्फ सांस के जरिए ही उसे अपनी बीमारी का आइडिया हो जाएगा कि उसे असल में क्या दिक्कत है.

इसके लिए उसे 10 प्रकार की जांच कराने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं पड़ेगी. स्टूडेंट ने बताया कि हर किसी की सांस में अलग-अलग कंपाउंड होते हैं. यह उन कंपाउंड का मेजर करके बता देगी कि आपकी किडनी, लीवर या पैंक्रियाज कहां दिक्कत है. बीमारी का आइडिया इस डिवाइस के जरिए मिल जाएगा.

6 साल की मेहनत के बाद तैयार हुई डिवाइस

केमेस्ट्री प्रोफेसर रितु गुप्ता ने बताया कि लगभग 6 साल से स्टूडेंट और उनकी टीम इसे बनाने का काम कर रही थी. अब यह बनकर तैयार है, लेकिन अभी क्लिनिकल टेस्ट होने बाकी है. क्लिनिकल टेस्ट और टाइमिंग के बाद इसे इंडस्ट्री पार्टनर की भी जरूरत पड़ेगी. उन्होंने बताया कि अभी तक जितने भी रिजल्ट हमें मिले हैं. इसके जरिए काफी अच्छे मिले हैं. क्योंकि इस मशीन को 6 साल की कड़ी मेहनत की बात तैयार किया गया है. इस दौरान कई बार टेस्ट किए गए और तब इसे लोगों के सामने प्रदर्शित किया गया है. इसे सांस मॉनिटरिंग सिस्टम कहें या हेल्थ प्रोफाइल सिस्टम दोनों ही सटीक है.



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