Last Updated:
राम गोपाल वर्मा एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं. डायरेक्टर ने संदीप रेड्डी वांगा का सपोर्ट किया जिसकी वजह से वो बुरा फंस गए. राम गोपाल वर्मा ने फिल्मों में बढ़ती हिंसा का सपोर्ट करते हुए कहा कि समाज के बिगड़ते हाल के लिए सिर्फ फिल्मों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. ये ऐसा होगा जैसे रामायण को अपहरण को बढ़ावा देने का दोष दिया जा रहा हो.
राम गोपाल वर्मा अपने बयान की वजह से ट्रोल हो रहे हैं. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. राम गोपाल वर्मा अपनी फिल्मों के साथ ही अपने बेतूके बयानों की वजहों से भी खबरों में रहते हैं. वो अक्सर कुछ ऐसा अटपटा कह देते हैं जिसकी वजह से वो सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ जाते हैं. अब राम गोपाल वर्मा ने फिल्मों में बढ़ती हिंसा पर एक बार फिर ऐसा रिएक्शन दिया है जिसकी वजह से वो ट्रोल्स के निशाने पर आ गए हैं. दरअसल, काफी समय से फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा रही है कि लगातार फिल्मों में हिंसा बढ़ती जा रही है. अब राम गोपाल वर्मा ने अपने अटपटे बयान से इस बहस को एक नया रुख दे दिया है.
डायरेक्टर ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि फिल्मों को हिंसा बढ़ने के लिए जिम्मेदार ठहराना वैसा ही है, जैसे किडनैपिंग की घटनाएं बढ़ने के लिए रामायण को दोष देना. अब उनके इस पोस्ट के बाद से उन्हें लगातार सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है. लोगों ने कहा कि वो ऐसे बेतूके बयान देकर फिल्मों में बढ़ती हिंसा को सही नहीं ठहरा सकते हैं.
बुरा फंसे राम गोपाल वर्मा
राम गोपाल वर्मा एक्स पोस्ट.
संदीप रेड्डी वांगा का सपोर्ट करना राम गोपाल वर्मा को पड़ा भारी
अब राम गोपाल वर्मा को ट्रोल करते हुए लोगों ने कहा कि क्या वो संदीप रेड्डी वांगा की ‘स्पिरिट’ का बचाव भी कर पाएंगे. लोगों ने उनकी खूब क्लास लगाई है. साथ ही रामायण को लेकर उनकी टिप्पणी की भी कड़ी आलोचना हो रही है.
राम गोपाल वर्मा की यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब सोशल मीडिया पर फिल्मों में दिखाई जाने वाली हिंसा के युवा दर्शकों पर पड़ने वाले असर को लेकर बहस छिड़ी हुई है. कई यूजर्स ने इस चर्चा के बीच संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘एनिमल’ का भी जिक्र किया है. रणबीर कपूर स्टारर इस फिल्म के एक सीन पर खास तौर पर सवाल उठ रहे हैं, जिसमें अभिनेता का किरदार हाथ में लोडेड बंदूक लेकर स्कूल के क्लासरूम में पहुंच जाता है.
आंध्र प्रदेश में हुई घटना के बाद इस सीन को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा और तेज हो गई है. कुछ लोगों का मानना है कि फिल्मों में बार-बार दिखाई जाने वाली अत्यधिक हिंसा का दर्शकों, खासकर कम उम्र के लोगों पर असर पड़ सकता है. इसी के साथ यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या ऐसी कहानियां पर्दे पर पेश करने के लिए फिल्ममेकर्स और कलाकारों की कोई जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.