Agriculture: दुधारू पशुओं के लिए फायदेमंद है जई, खेती का यही सही समय, किसान इन उन्नत किस्मों की करें बुवाई

Agriculture: दुधारू पशुओं के लिए फायदेमंद है जई, खेती का यही सही समय, किसान इन उन्नत किस्मों की करें बुवाई


नागौर. राजस्थान के नागौर जिले में रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही पशुपालकों ने हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जई की बुवाई शुरू कर दी है. पशुओं के लिए पौष्टिक हरे चारे के रूप में जई काफी उपयोगी मानी जाती है. इसकी खेती से पशुपालक न केवल सालभर चारे की व्यवस्था को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि बाजार से खरीदे जाने वाले पशु आहार पर होने वाले खर्च को भी कम कर सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नवंबर का शुरुआती समय जई की बुवाई के लिए उपयुक्त रहता है. ऐसे में किसान समय पर बुवाई कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

जई की हरी पत्तियां पशुओं के लिए स्वादिष्ट और पौष्टिक चारा होती है. इसमें मौजूद पोषक तत्व पशुओं के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन में सहायक माने जाते हैं. विशेष रूप से दुधारू पशुओं के लिए जई का हरा चारा उपयोगी रहता है. इसकी खेती सिंचित क्षेत्रों में आसानी से की जा सकती है. नागौर जिले में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. ऐसे में जई की खेती पशुपालकों के लिए चारे की उपलब्धता बढ़ाने का अच्छा विकल्प बन सकती है.

किसान उन्नत किस्मों का ही करें चयन

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट रामनिवास चौधरी ने बताया कि जई की अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए किसानों को उन्नत किस्मों के प्रमाणित बीजों का चयन करना चाहिए. उन्होंने बताया कि ओएस-6, ओएस-7 और कैंट जैसी किस्में हरे चारे के उत्पादन के लिए उपयोगी मानी जाती है. इन किस्मों का चयन करते समय किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु, सिंचाई की उपलब्धता और मिट्टी की स्थिति का ध्यान रखना चाहिए. प्रमाणित बीजों का उपयोग करने से फसल की स्थापना अच्छी होती है और उत्पादन की संभावना बढ़ती है.

जानें खेत की तैयारी और बुवाई का सही तरीका

युवा किसान अर्जुन चौधरी ने बताया कि जई की बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी करना जरूरी है. इसके लिए खेत में दो से तीन बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बना लें. खेत को समतल करने से सिंचाई के दौरान पानी का वितरण समान रूप से होता है. बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 75 से 100 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है. किसान कतारों में बुवाई करें और कतार से कतार की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर रखें. कतारों में बुवाई करने से पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है. इससे फसल की बढ़वार अच्छी होती है और खेत में निराई-गुड़ाई करना भी आसान रहता है. बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होना जरूरी है, ताकि बीजों का अंकुरण अच्छी तरह हो सके.

सिंचाई और देखभाल पर भी दें ध्यान

जई की फसल में अच्छी बढ़वार के लिए समय पर सिंचाई करना जरूरी है. खेत में नमी की कमी नहीं होने दें. सिंचाई की आवश्यकता मिट्टी की प्रकृति और मौसम के अनुसार तय करें. अधिक पानी भरने से भी बचें. फसल की शुरुआती अवस्था में खरपतवारों पर नियंत्रण रखना चाहिए, ताकि पौधों को पोषक तत्व और नमी पर्याप्त मात्रा में मिल सके.

जई की खेती पशुपालकों के लिए है फायदेमंद

जई की खेती से पशुपालकों को अपने पशुओं के लिए पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध हो सकता है. इससे चारे की कमी के समय राहत मिलने के साथ पशु आहार पर होने वाला खर्च भी घटाने में मदद मिल सकती है. किसान समय पर बुवाई, उन्नत किस्मों के चयन और उचित सिंचाई तरीकों को अपनाकर हरे चारे का उत्पादन बढ़ा सकते हैं. इससे पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने में सहायता मिल सकती है.



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