महादेव ऐप केस: CBI को मिली सौरभ चंद्राकर की 2 दिन की ट्रांजिट रिमांड, अब रायपुर अदालत में होगी पेशी

महादेव ऐप केस: CBI को मिली सौरभ चंद्राकर की 2 दिन की ट्रांजिट रिमांड, अब रायपुर अदालत में होगी पेशी


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Mahadev App Case: महादेव ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाए जाने के बाद सीबीआई ने नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया. कोर्ट ने सौरभ चंद्राकर को 2 दिनों की ट्रांजिट रिमांड पर सीबीआई को सौंप दिया है. अब सीबीआई उसे 4 नवंबर 2026 तक रायपुर की विशेष अदालत में पेश करेगी.

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महादेव ऐप केस के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर की ट्रांजिट रिमांड मंजूर.

Saurabh Chandrakar Latest News: महादेव बुक ऐप सट्टेबाजी मामले में सीबीआई को मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर की 2 दिनों की ट्रांजिट रिमांड मिल गई है. ओमान से भारत लाए गए सौरभ चंद्राकर को दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में सीबीआई ने पेश किया था. राउज एवेन्यू कोर्ट के जज (सीबीआई) निखिल चोपड़ा ने 2 नवंबर 2026 को यह आदेश जारी किया.

सीबीआई ने आरोपी सौरभ चंद्राकर को अदालत में पेश कर दो दिनों की ट्रांजिट रिमांड मांगी थी. अदालत ने सीबीआई की याचिका स्वीकार करते हुए आरोपी को 4 नवंबर 2026 तक या उससे पहले छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित विशेष सीबीआई अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है.

ओमान से हुई धरपकड़ और गिरफ्तारी
बता दें कि सौरभ चंद्राकर भिलाई (छत्तीसगढ़) के सेक्टर-8 का निवासी है. उसे ओमान में फर्जी यात्रा दस्तावेजों के जरिए अवैध प्रवेश करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था. इसके बाद ओमान सरकार ने उसे भारत को सौंप दिया. सीबीआई ने सौरभ चंद्राकर को 1 नवंबर 2026 को शाम 7:35 बजे गिरफ्तार किया. रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत ने उसके खिलाफ 9 सितंबर 2026 को खुला गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया था.

दुबई से चलता था सट्टेबाजी का सिंडिकेट
सीबीआई के अनुसार, सौरभ चंद्राकर और उसके साथी रवि उप्पल ने महादेव बुक ऐप को प्रमोट किया. दोनों ने ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए कई प्लेटफॉर्म तैयार किए. इस सिंडिकेट का मुख्य कार्यालय (हेड ऑफिस) दुबई में बनाया गया था. इस अवैध सट्टेबाजी से कमाए गए पैसों को विभिन्न बैंक खातों के जरिए यूएई भेजा जाता था.

बचाव पक्ष ने उठाया ये मुद्दा
आरोपी के वकीलों ने तर्क दिया कि ओमान कोर्ट ने प्रत्यर्पण की मंजूरी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले में दी थी, न कि सीबीआई के मामले में. उन्होंने प्रत्यर्पण अधिनियम की धारा 21 का हवाला दिया. हालांकि, सीबीआई के वरिष्ठ सरकारी वकील ने कहा कि यह मामला केवल ट्रांजिट रिमांड का है. आरोपी को गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर संबंधित क्षेत्राधिकार अदालत में पेश करना अनिवार्य है.

वहीं, जज निखिल चोपड़ा ने स्पष्ट किया कि इस अदालत का क्षेत्राधिकार केवल ट्रांजिट रिमांड तक सीमित है. मामले की सुनवाई और कानूनी पहलुओं पर निर्णय लेने का अधिकार रायपुर की विशेष अदालत को ही है.



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