हैदराबाद में दिवाली पर क्यों लटकाया जाता है कद्दू, जानें परंपरा
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Why Pumpkin Hung on Doors: हैदराबाद में दीपावली के मौके पर घरों और दुकानों के मुख्य द्वार पर कद्दू लटकाने की परंपरा है. वास्तु और सनातन मान्यताओं के अनुसार इसे नकारात्मक ऊर्जा से बचाव का माध्यम माना जाता है.
हैदराबाद: हैदराबाद और आसपास के इलाकों में दीपावली व कार्तिक अमावस्या के मौके पर घरों और दुकानों के मुख्य द्वार पर कद्दू लटकाने की एक बेहद पुरानी और खास परंपरा है. सनातन परंपरा और वास्तु मान्यताओं के अनुसार, कद्दू नकारात्मक ऊर्जा को सोखने का सबसे मजबूत माध्यम माना जाता है. लोगों का मानना है कि दीपावली अमावस्या की रात साल की सबसे गहरी रात होती है. जिस दौरान अनिष्टकारी शक्तियां और दृष्टि दोष बढ़ने की आशंका रहती है. ऐसे में मुख्य चौखट पर विधिवत पूजित कद्दू बांधने से किसी भी तरह की बुरी नजर, नकारात्मक हवा और संकट घर के भीतर प्रवेश नहीं कर पाते.
दिवाली के दिन लोग साधारण बाजार से कद्दू खरीदकर सीधे लगाने के बजाय उसे मंदिर में देवी माँ के चरणों में अर्पित करवाकर ही बांधना शुभ मानते हैं. हैदराबाद के इसामिया बाज़ार, कोटी स्थित प्रसिद्ध श्री कनकदुर्गा नागालक्ष्मी मंदिर में कार्तिक अमावस्या के दिन इसके लिए खास पूजा रखी जाती है. मंदिर में देवी के समक्ष कद्दू रखकर विधि-विधान से अनुष्ठान होता है और उस पर हल्दी-कुमकुम से पवित्र धार्मिक प्रतीक बनाए जाते हैं. यह पूजित कद्दू केवल अमावस्या के दिन ही वितरित किया जाता है. जिसके लिए भक्त पहले से ही अपनी अग्रिम बुकिंग कराते हैं.
श्रद्धालु अमावस्या पर यह कद्दू लेने पहुंचते
नागालक्ष्मी मंदिर मुख्य पुजारी के अनुसार जब श्रद्धालु अमावस्या पर यह कद्दू लेने पहुंचते हैं तो पुरोहित उनके नाम और गोत्र के साथ विशेष अर्चना और संकल्प करवाते हैं. इसके बाद ही यह सुरक्षा कवच के रूप में सौंपा जाता है. इसके साथ ही एक और अहम नियम का पालन किया जाता है—हर बार जब पुराना कद्दू हटाया जाता है, तो उसके साथ पुरानी जालीदार रस्सी भी बदलनी जरूरी होती है. इसलिए मंदिर प्रशासन कद्दू के साथ नया शिकाह भी देता है ताकि भक्त इसे बिना किसी परेशानी के सीधे मुख्य द्वार पर टांग सकें.
हर पूर्णिमा के दिन जरूरतमंदों के लिए आयोजित
इस अनुष्ठान की एक बड़ी खूबी इसका सामाजिक पक्ष भी है. मंदिर प्रबंधन द्वारा इस सेवा के लिए जो भी सहयोग राशि ली जाती है उसे हर पूर्णिमा के दिन जरूरतमंदों के लिए आयोजित होने वाले अन्नदान में खर्च किया जाता है. इससे भक्तों के नाम पर अन्नदान का पुण्य भी दर्ज होता है.