Last Updated:
Chhath Festival Sarees: पूर्णिया के ‘हाउस ऑफ मैथिली’ में महिला-पुरुष कारीगर मधुबनी आर्ट के जरिए पारंपरिक छठ साड़ियां तैयार कर रहे हैं. इन साड़ियों पर सूर्य देव और सूप जैसे छठ के दृश्य उकेरे गए हैं. दिल्ली और मुंबई समेत कई बड़े शहरों से इनके लिए 4 लाख रुपये के ऑर्डर मिले हैं.
Chhath Festival Sarees: बिहार के लोक आस्था के महापर्व छठ की परंपरा अब साड़ियों पर भी देखने को मिलेगी. पूर्णिया के हाउस ऑफ मैथिली में स्थानीय महिला और पुरुष कारीगर मधुबनी आर्ट के जरिए छठ पूजा से जुड़ी पारंपरिक तस्वीरों को साड़ियों पर उकेर रहे हैं. इन खास साड़ियों को तैयार करने का काम पिछले 15 दिनों से चल रहा है. खास बात यह है कि इस साड़ी को तैयार करने के लिए बिहार के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मुंबई और लखनऊ समेत कई बड़े शहरों से ऑर्डर मिले हैं.
करीब 35 साड़ियों का ऑर्डर मिला है, जिसकी कुल कीमत लगभग 4 लाख रुपये बताई जा रही है. हाउस ऑफ मैथिली में काम करने वाली स्थानीय महिलाओं को हुनर के जरिए रोजगार और आमदनी का अवसर मिल रहा है. यहां तैयार होने वाले कई उत्पादों को देश-दुनिया में पहचान मिल चुकी है. इसी कड़ी में अब छठ महापर्व की परंपराओं को दर्शाने वाली खास साड़ी तैयार की जा रही है. इन साड़ियों पर छठ पूजा के दौरान इस्तेमाल होने वाले सूप, भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देने और व्रत से जुड़ी अन्य पारंपरिक तस्वीरों को मधुबनी पेंटिंग के माध्यम से बनाया जा रहा है.
15 दिनों से तैयार हो रही छठ थीम वाली साड़ी
हाउस ऑफ मैथिली में साड़ी पर आकर्षक डिजाइन बना रहीं महिला कारीगर दिव्या झा, शुभम कुमार और अन्य महिला-पुरुष कारीगरों की टीम इस काम में जुटी है. कारीगरों ने बताया कि पिछले 15 दिनों से लगातार इन साड़ियों को तैयार किया जा रहा है. कुल 35 साड़ियों पर छठ महापर्व की परंपराओं और धार्मिक महत्व को चित्रों के माध्यम से दर्शाया जा रहा है. साड़ी पर मधुबनी आर्ट के जरिए छठ पूजा की अलग-अलग झलकियां उकेरी जा रही हैं.
चार लाख रुपये का मिला ऑर्डर
हाउस ऑफ मैथिली के संस्थापक मनीष रंजन ने बताया कि बिहार के लोक आस्था के महापर्व छठ की परंपराओं को ध्यान में रखकर इन खास साड़ियों को तैयार किया जा रहा है. इसके लिए महिला और पुरुष कारीगरों की टीम पिछले 15 दिनों से मेहनत कर रही है. बिहार के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मुंबई और लखनऊ समेत कई बड़े शहरों से इन साड़ियों के ऑर्डर मिले हैं. करीब 35 साड़ियों का ऑर्डर मिला है, जिसकी कीमत लगभग चार लाख रुपये है. उन्होंने बताया कि आने वाले दो से तीन दिनों में इन साड़ियों की डिलीवरी कर दी जाएगी. इन खास साड़ियों के जरिए बिहार की लोक कला मधुबनी पेंटिंग और छठ महापर्व की परंपराओं को एक साथ प्रस्तुत किया जा रहा है. इससे जहां स्थानीय कारीगरों को रोजगार मिल रहा है. वहीं बिहार की सांस्कृतिक विरासत को भी नए अंदाज में पहचान मिल रही है.