सर्दियों में आम देखकर रह जाएंगे हैरान! बिहार के इस जिले में लहलहा रहा फल
Last Updated:
West Champaran Kusum Aam Variety: बिहार के पश्चिम चंपारण में किसान सालभर फल देने वाले सदाबहार कुसुम आम की बागवानी कर रहे हैं. बेतिया के किसान अयोध्या प्रसाद ने यह पेड़ लगाया है, जिससे ऑफ सीजन में भी आम मिल रहा है और किसानों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है. आइये जानते हैं इस आम की खेती कैसे की जा सकती है.
पश्चिम चंपारण: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के कुछ किसान आम की एक ऐसे वैरायटी की बागवानी कर रहे हैं, जिसका फलन सिर्फ गर्मियों में ही नहीं, बल्कि सर्दियों सहित साल के 12 महीने होता है. जिला मुख्यालय बेतिया के सुभाष नगर निवासी अयोध्या प्रसाद उन्हीं किसानों में से एक हैं, जिन्होंने अपने बागीचे में इस बारहमासी आम की बागवानी की है. बता दें कि इस खास आम को सदाबहार कुसुम के नाम से जाना जाता है, जिसकी तुड़ाई अक्टूबर आखिरी से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक की जाती है. आइये जानते हैं इस वैरायटी के बारे में.
आम की ये है खास दुर्लभ वैरायटी
करीब 20 वर्षों से खेती किसानी पर आरएनडी (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) कर रहे बेतिया निवासी रविकांत पांडे बताते हैं कि जहां देश के ज्यादातर भागों में आम की साधारण प्रजातियों की बागवानी की जाती है. वहीं, बिहार के कुछ जिलों सहित राजस्थान जैसे राज्यों में आम की कुछ खास किस्मों की बागवानी की जाती हैं, जो साल में तीन बार फलन की अवस्था में रहते हैं.
सर्दियों में आम का फलन
रविकांत ने बताया कि पश्चिम चंपारण जिले में भी इसी खास वैरायटी की बागवानी की जा रही है. जिले के बेतिया निवासी अयोध्या प्रसाद ने सदाबहार आम की जिस वैरायटी को लगाया है, उसे ‘सदाबहार कुसुम’ के नाम से जाना जाता है. इस पेड़ पर नवंबर के महीने में भी आम का फलन बेहद खूबसूरती से हुआ है.
ऑफ सीजन में भी आम का फलन
कृषक अयोध्या बताते हैं कि उन्होंने इस पेड़ को करीब दो साल पहले लगाया था. फिलहाल पेड़ पर आम का फलन चालू है. जहां सामान्य पेड़ पर 1 साल में एक बार ही सीजन में आम आता है. वहीं, सदाबहार कुसुम प्रजाति की इस आम के पेड़ पर ऑफ सीजन में भी फलन होता है. विशेषज्ञों की मानें तो, ऑफ सीजन में बाजार में आम का भाव 200 रुपए किलो तक बड़ी आसानी से मिल जाता है. ऐसे में इसकी बागवानी किसानों के लिए बेहद लाभप्रद हो सकती है.
इन तरीकों से करें आम की बागवानी
बता दें कि परंपरागत तरीके से बागवानी करने पर एक एकड़ में करीब 63 आम के पेड़ लगाए जा सकते हैं, लेकिन यदि इजरायली तरीके से इसकी बागवानी की जाए तो एक एकड़ में ही करीब 252 आम के पेड़ लगाए जा सकते हैं. क्योंकि इजरायली पद्धति से बागवानी में पौधे से पौधे का डिस्टेंस बेहद कम रहता है. इसलिए इस पद्धति से बागवानी में पेड़ों की संख्या अधिक हो जाती है.