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Bihar MLC Chunav: बिहार एमएलसी चुनाव में दो कैंडिडेट निर्दलीय जीते थे. उन्होंने 31 अक्टूबर को बीजेपी ज्वाइन कर ली. इस पर तेजस्वी यादव ने दल-बदल विरोधी कानून याद दिलाया. साथ ही संविधान का हवाला देते हुए सभापति से दोनों की विधान परिषद की सदस्यता रद्द करने की मांग की है.
बिहार विधानसभा नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव. (फोटो साभारः एक्स @yadavtejashwi)
पटनाः बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद नया सियासी विवाद खड़ा हो गया. दो नए चुने गए एमएलसी ने बीजेपी ज्वॉइन कर ली. दोनों बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीते थे. इस पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उन्हें दल-बदल कानून याद दिलाते हुए सदस्यता रद्द करने की मांग उठाई. दरअसल, तिरहुत स्नातक निर्वाचन सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में बंशीधर ब्रजवासी चुनाव जीते थे. जबकि सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित डॉ. राहुल राज निर्दलीय जीते थे. दोनों 31 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए.
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का पोस्ट.
तेजस्वी ने संविधान की दसवीं अनुसूची का दिया हवाला
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2(2) का जिक्र किया. इसके अनुसार, कोई सदस्य यदि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतता है और निर्वाचन के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है, तो वह सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य हो सकता है. तेजस्वी का कहना है कि बंशीधर ब्रजवासी और डॉ. राहुल राज के मामले में यही प्रावधान लागू होता है. उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 191(2) का भी उल्लेख किया. इस अनुच्छेद के तहत दसवीं अनुसूची के आधार पर अयोग्य घोषित व्यक्ति राज्य के विधानमंडल का सदस्य बने रहने के योग्य नहीं होता. तेजस्वी ने यह भी कहा कि दल-बदल के आधार पर अयोग्यता से जुड़े सवाल पर फैसला लेने का अधिकार संबंधित सदन के सभापति को है.
बीजेपी पर भी साधा निशाना
तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बीजेपी के विधायक को अदालत से सजा मिलने के बाद भी उसकी सदस्यता रद्द नहीं की जाती. इसके लिए उन्होंने साहेबगंज के विधायक राजू सिंह का उदाहरण दिया. तेजस्वी ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के विधायकों को अपने पाले में लाने के मामलों में शिकायतों के बावजूद सदस्यता रद्द करने की कार्रवाई नहीं होती. उनका कहना है कि अब निर्दलीय उम्मीदवारों के बीजेपी में शामिल होने के मामले में भी संविधान के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए.
अब सभापति के फैसले पर नजर
तेजस्वी यादव ने बंशीधर ब्रजवासी और डॉ. राहुल राज को अयोग्य घोषित करने की मांग की है. हालांकि, दोनों की विधान परिषद सदस्यता पर अंतिम फैसला सदन के सभापति को लेना होगा. फिलहाल इस मामले में सभापति की ओर से कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाया जाता है.