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Carrots Gardening: सर्दियों के मौसम में गाजर का हलवा काफी पसंद किया जाता है. पूरे सीजन भर बाजार में लाल और मीठी गाजर खूब मिलती हैं. सिर्फ हलवा ही नहीं लोग गाजर का सलाद, अचार और कई तरह की स्वादिष्ट डिश भी बनाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाजार से गाजर खरीदने के बजाय आप इन्हें अपने घर के गार्डन या गमले में भी उगा सकते हैं? यहां जानिए घर पर गाजर उगाने का आसान तरीका.
घर पर उगी ताजी गाजर का स्वाद बाजार में मिलने वाली गाजर से कहीं ज्यादा अच्छा हो सकता है. इतना ही नहीं मिट्टी से ताजी गाजर निकालने और उसे धोकर खाने का अपना अलग ही आनंद है. गाजर में बीटा-कैरोटीन और नेचुरल शुगर भरपूर मात्रा में होती है. ये सेहत के लिए भी फायदेमंद है. अच्छी बात है कि इसे उगाने के लिए आपको किसी खास अनुभव की जरूरत नहीं है. बस कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर आप घर पर ही मीठी और कुरकुरी गाजर उगा सकते हैं.
गाजर उगाने के लिए तैयार करें सही मिट्टी- गाजर की अच्छी फसल के लिए ऐसी मिट्टी की जरूरत होती है, जो भुरभुरी और पानी निकालने वाली हो. इससे गाजर की जड़ें बिना किसी रुकावट के नीचे की ओर बढ़ पाती हैं. इसके लिए मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद या कंपोस्ट मिलाएं. मिट्टी से पत्थर, कंकड़ और सख्त ढेले निकाल दें. करीब 10-12 इंच तक मिट्टी को अच्छी तरह तैयार करें. ध्यान रखें कि बीज बोने से ठीक पहले ताजा गोबर की खाद न डालें. इससे पत्तियां ज्यादा बढ़ सकती हैं और गाजर की जड़ें ठीक से विकसित नहीं होतीं.
सही तरीके से बोएं गाजर के बीज- गाजर के बीज बहुत छोटे होते हैं, इसलिए इन्हें सावधानी से बोना चाहिए. मिट्टी में करीब 1/4 से 1/2 इंच गहरी नाली बनाएं और बीज डालें. एक कतार से दूसरी कतार के बीच 6-12 इंच की दूरी रखें. बीजों को ऊपर से हल्की मिट्टी या कंपोस्ट से ढक दें. गाजर के बीजों को अंकुरित होने में 1 से 3 सप्ताह लग सकते हैं. इस दौरान मिट्टी की ऊपरी परत में नमी बनाए रखें और रोज हल्का पानी छिड़कें.
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पौधों की छंटाई करना न भूलें- जब गाजर के छोटे पौधे करीब 2 इंच बड़े हो जाएं, तो उनकी छंटाई करें. इसके लिए कमजोर और ज्यादा घने पौधों को हटा दें. बचे हुए पौधों के बीच 2-3 इंच की दूरी रखें. ऐसा करने से हर पौधे को पर्याप्त धूप, पोषण और जगह मिलती है. इससे गाजर की जड़ें अच्छी तरह मोटी और मजबूत बनती हैं.
पानी देने में न करें गलती- गाजर को अच्छी तरह बढ़ने के लिए नियमित नमी की जरूरत होती है. ऐसे में हर सप्ताह करीब 1 इंच पानी देना पर्याप्त हो सकता है. ध्यान रखें कि मिट्टी बहुत ज्यादा सूखे नहीं और उसमें पानी भी जमा न हो. मिट्टी कभी बहुत सूखी और कभी बहुत गीली होने से गाजर की जड़ें फट सकती हैं. इसके अलावा गाजर का स्वाद कड़वा और बनावट लकड़ी जैसी हो सकती है. नमी बनाए रखने के लिए पौधों के आसपास सूखी घास या कंपोस्ट की हल्की परत बिछा सकते हैं.
सही समय पर करें गाजर की कटाई- गाजर की फसल आमतौर पर बीज बोने के 65 से 80 दिनों में तैयार हो जाती है. हालांकि, ये समय गाजर की किस्म पर निर्भर करता है. जब गाजर अच्छी तरह विकसित हो जाए, तो उसे मिट्टी से निकाल सकते हैं. इसके लिए पहले आसपास की मिट्टी को खुरपी या गार्डन फोर्क की मदद से हल्का ढीला करें. इसके बाद पत्तियों के निचले हिस्से को पकड़कर गाजर को धीरे-धीरे बाहर निकालें. इससे गाजर टूटेगी नहीं और आपको ताजी, मीठी और कुरकुरी फसल मिलेगी.