अलवर रैणी के गढ़ गांव में 21 साल की उम्र में प्रेरणा नरुका बनीं सरपंच, फिजियोथेरेपी की पढ़ाई छोड़ संभाली गांव की कमान

अलवर रैणी के गढ़ गांव में 21 साल की उम्र में प्रेरणा नरुका बनीं सरपंच, फिजियोथेरेपी की पढ़ाई छोड़ संभाली गांव की कमान


अलवर: अलवर जिले की रैणी पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली गढ़ ग्राम पंचायत से एक बेहद प्रेरणादायक राजनीतिक खबर सामने आई है. महज 21 वर्ष की कम उम्र और हाथों में उच्च शिक्षा की किताबें लिए प्रेरणा नरुका ने गढ़ गांव की कमान संभाल ली है. जयपुर में फिजियोथेरेपी की पढ़ाई पूरी कर रही प्रेरणा ने पंचायत चुनाव में मैदान में उतरकर 387 वोटों के अंतर से शानदार जीत हासिल की है और क्षेत्र की सबसे युवा सरपंचों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है.

प्रेरणा के राजनीति में आने की प्रेरणा उन्हें अपने पारिवारिक माहौल से मिली. उनके पिता तेजवीर सिंह वर्ष 2015 में इसी गढ़ ग्राम पंचायत के सरपंच रह चुके हैं. इसके अलावा उनके परिवार में नाना-नानी भी सरपंच पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. बचपन से ही घर में सामाजिक सरोकारों और जनसेवा का माहौल देखने के कारण प्रेरणा के मन में भी गांव के विकास की इच्छा प्रबल हुई. जब इस बार सरपंच पद की सीट महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुई, तो उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ चुनावी मैदान में उतरने का साहसिक निर्णय लिया और ग्रामीणों ने भी उन पर पूरा भरोसा जताया.

गांव की बदहाल तस्वीर बदलने का संकल्प

प्रेरणा बताती हैं कि जयपुर में पढ़ाई के दौरान जब भी उनका गांव आना होता था, तो आसपास के दूसरे विकसित गांवों को देखकर वह अपने गांव की स्थिति पर विचार करती थीं. गांव में अच्छी सड़कों का अभाव, नालियों की समस्या, साक्षरता की सुस्त स्थिति और सीमित रोजगार के अवसर उन्हें हमेशा खलते थे. उनका मानना है कि उनके पिता के कार्यकाल में काफी विकास हुआ था, लेकिन बाद में विकास की गति धीमी पड़ गई. इन परिस्थितियों ने उन्हें चुनावी मैदान में उतरने के लिए प्रेरित किया. उनका उद्देश्य चिकित्सा सेवा के साथ-साथ राजनीति के माध्यम से भी अधिक से अधिक लोगों की मदद करना है.

महिला शिक्षा, लाइब्रेरी और बुनियादी विकास है मुख्य प्राथमिकता

नव निर्वाचित सरपंच प्रेरणा नरुका का कहना है कि उनकी प्राथमिकताओं में महिला शिक्षा और युवाओं का भविष्य सबसे ऊपर है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई परिवार बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर भेजने में संकोच करते हैं, इसलिए उनकी योजना गांव में ही एक आधुनिक लाइब्रेरी बनवाने की है, जहां लड़कियां और बच्चे सुरक्षित माहौल में अध्ययन कर सकें. इसके साथ ही महिलाओं को सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी दिलाना उनकी प्राथमिकता है.

सालार बाबा धाम और बुनियादी सुविधाओं का विकास

प्रेरणा के विकास एजेंडे में पूरी ग्राम पंचायत के सभी गांव शामिल हैं. पंचायत के अन्य गांवों में सड़क और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करना, मुस्लिम समुदाय के लिए कब्रिस्तान के पास पर्याप्त जगह उपलब्ध कराना और ऐतिहासिक सालार बाबा धाम का विकास करवाकर वहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देना उनका विशेष लक्ष्य है. वह युवाओं और नई पीढ़ी (Gen Z) को साथ लेकर गांव के विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना चाहती हैं.

पढ़ाई और जनसेवा के बीच संतुलन की चुनौती

वर्तमान में अपनी फिजियोथेरेपी की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंटर्नशिप के दौर से गुजर रही प्रेरणा के सामने शिक्षा और पंचायत की जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है, लेकिन उनका दृढ़ संकल्प है कि वह गांव की जनता के विश्वास को टूटने नहीं देंगी और गढ़ पंचायत को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी.



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