India QUAD Declares Independent Foreign: QUAD का मेंबर होने पर भी अमेरिका पर क्‍यों भड़का भारत? चीन को भी सुनाई खरी-खरी

India QUAD Declares Independent Foreign: QUAD का मेंबर होने पर भी अमेरिका पर क्‍यों भड़का भारत? चीन को भी सुनाई खरी-खरी


India QUAD Declares Independent Foreign: भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि उसकी विदेश नीति किसी एक ताकत के इशारे पर नहीं चलती. अमेरिका के साथ QUAD जैसे रणनीतिक समूह में साझेदारी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि भारत हर मुद्दे पर वॉशिंगटन की बात से सहमत होगा. अटलांटा में हुई G20 विदेश मंत्रियों की बैठक और QUAD की बातचीत के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर के रुख से भारत की इसी कूटनीतिक सोच की झलक मिली.

एक तरफ भारत ने अमेरिका के सामने अपनी स्वतंत्र सोच और फैसले लेने के अधिकार को अहमियत दी, तो दूसरी तरफ चीन की आर्थिक और रणनीतिक गतिविधियों पर भी गंभीर सवाल उठाए. इस पूरे घटनाक्रम को केवल अमेरिका और चीन के बीच मुकाबले के तौर पर देखना सही नहीं होगा. इसके पीछे भारत के अपने आर्थिक हित, ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और रणनीतिक स्वतंत्रता जैसे बड़े मुद्दे जुड़े हैं.

विदेश नीति से कोई समझौता नहीं

अटलांटा में G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जयशंकर से पूछा गया कि क्या दिसंबर में होने वाले शिखर सम्मेलन तक सदस्य देशों के बीच साझा सहमति बन पाएगी. इस पर उन्होंने कहा कि अभी शिखर सम्मेलन में समय है और उम्मीद है कि सभी देश किसी साझा रास्ते पर पहुंच सकेंगे. उन्होंने BRICS का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग विचार रखने वाले देश भी महत्वपूर्ण मुद्दों पर साझा बयान के लिए सहमत हो सकते हैं. यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि G20 में अमेरिका समेत कई देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को लेकर मतभेद हैं. अमेरिका की नीतियों और उसके आर्थिक फैसलों पर भी अलग-अलग देशों की चिंताएं हैं. ऐसे माहौल में भारत का जोर किसी एक देश के दबदबे के बजाय बातचीत और सामूहिक सहमति पर है.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर. (आईएएनएस)

जयशंकर का जोर- कोई दबाव नहीं सहेंगे

विदेश मंत्री जयशंकर ने साफ कर दिया है कि वो किसी भी तरह का दबाव सहने वाले हैं. खासतौर पर रूस से तेल खरीदने के मामले में जिस तरह का रुख अमेरिका ने अपनाया, उसे लेकर भारत ने साफ किया है कि वो किसी भी दबाव में अपनी नीति तय नहीं करेगा. इतना ही नहीं जयशंकर ने अपने पिछले अमेरिका दौरे पर आतंकवाद को लेकर रुख साफ किया कि इस मुद्दे पर जीरो टॉलरेंस भारत की पॉलिसी का हिस्सा है और अगर कोई देश भारत से डील चाहता है, तो उसे ये समझना ही होगा.

QUAD की बैठक में चीन पर निशाना, बिना नाम लिए उठाए सवाल

31 अक्टूबर को अटलांटा में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों की QUAD बैठक हुई. इसमें जयशंकर के साथ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग शामिल हुईं. बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में आर्थिक दबाव बनाने, मनमाने तरीके से निर्यात पर पाबंदी लगाने और बाजार के सामान्य नियमों से अलग नीतियों के जरिए वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित करने पर गंभीर चिंता जताई गई. बयान में चीन का नाम नहीं लिया गया लेकिन इन टिप्पणियों का इशारा मुख्य रूप से चीन की व्यापारिक और आर्थिक नीतियों की तरफ माना जा रहा है. चीन कई अहम उद्योगों और खासतौर पर रेयर अर्थ की वैश्विक आपूर्ति में बड़ी भूमिका रखता है. ऐसे में यदि वह निर्यात पर रोक लगाता है या आपूर्ति को प्रभावित करता है, तो भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है.यहां भारत का संदेश दोहरा है। वह चीन पर आर्थिक निर्भरता कम करना चाहता है, लेकिन इसके लिए केवल अमेरिका पर निर्भर रहना भी उसके हित में नहीं होगा.

अमेरिका को भी है भारत की जरूरत.

अमेरिका को भी क्यों है भारत की जरूरत?

QUAD में अमेरिका की मौजूदगी के बावजूद भारत की अपनी प्राथमिकताएं हैं. भारत इस समूह को केवल चीन के खिलाफ सैन्य या राजनीतिक गठबंधन के रूप में नहीं देखता. उसके लिए समुद्री सुरक्षा, तकनीक, व्यापार, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं. बैठक में चारों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भरोसेमंद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का विस्तार करने के लिए 8.5 करोड़ डॉलर से अधिक की तकनीकी और वित्तीय सहायता देने की योजना भी घोषित की. इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और तकनीकी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी. यहां अमेरिका की भूमिका अहम है, लेकिन भारत भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है. भारत के पास बड़ा बाजार, तकनीकी क्षमता और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक महत्व है.

भारत की कूटनीति का असली संदेश क्या है?

पूरे घटनाक्रम को देखें तो भारत एक साथ कई मोर्चों पर अपने हित साधने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका के साथ तकनीक और सुरक्षा में सहयोग करना है, चीन की आर्थिक नीतियों से पैदा होने वाले जोखिमों को कम करना है और रूस सहित दूसरे देशों के साथ भी संवाद बनाए रखना है. यही भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ है. भारत किसी एक शक्ति के खेमे में पूरी तरह खड़ा होने के बजाय मुद्दों के आधार पर साझेदारी करना चाहता है. इसलिए अटलांटा की बैठक को अमेरिका या चीन के खिलाफ भारत की सीधी लड़ाई कहना सही नहीं होगा. इतना जरूर स्पष्ट है कि भारत ने अपने हितों को प्राथमिकता देते हुए दोनों बड़ी शक्तियों के सामने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का संदेश दिया है. जयशंकर की कूटनीति का मूल संदेश यही है कि भारत दोस्ती निभाएगा, सहयोग भी करेगा, लेकिन अपने फैसले खुद लेगा.



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