करवाचौथ पर पति भी रखें व्रत तो क्या होगा? जानें क्या कहती हैं ज्योतिषाचार्या
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Karwa Chauth 2026: करवाचौथ का पर्व पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं. लेकिन क्या पति भी पत्नी के लिए करवाचौथ का व्रत रख सकते हैं? जयपुर की ज्योतिषाचार्या डॉ. दीप्ति शर्मा के अनुसार, पति भी अपनी पत्नी के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने के लिए यह व्रत रख सकते हैं. खासकर नवविवाहित जोड़ों के लिए साथ व्रत रखना आपसी समझ और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने का माध्यम बन सकता है. धार्मिक मान्यताओं में इस व्रत को अखंड सौभाग्य से जोड़ा गया है. हालांकि, पति का व्रत रखना अनिवार्य नहीं है, बल्कि यह उनकी व्यक्तिगत आस्था और इच्छा पर निर्भर करता है.
करवाचौथ का पर्व पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ व्रत रखती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि करवाचौथ पर पत्नी के साथ पति भी व्रत रख सकते हैं? ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यदि पति-पत्नी दोनों मिलकर यह व्रत करते हैं, तो इससे उनके रिश्ते में प्रेम, आपसी समझ और सामंजस्य को मजबूती मिल सकती है.
जयपुर की ज्योतिषाचार्या डॉ. दीप्ति शर्मा ने बताया कि करवाचौथ का व्रत परंपरागत रूप से महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखती हैं. हालांकि, पति भी अपनी पत्नी के प्रति प्रेम, सम्मान और समर्पण व्यक्त करने के लिए इस दिन व्रत रख सकते हैं. खासकर नवविवाहित जोड़ों के लिए यह परंपरा आपसी रिश्ते को और मजबूत बनाने का माध्यम बन सकती है.
इस बार करवाचौथ व्रत 29 अक्टूबर को मनाया जा रहा है. जब पति-पत्नी एक साथ व्रत रखते हैं, तो यह उनके बीच भावनात्मक जुड़ाव और एक-दूसरे की खुशियों के प्रति जिम्मेदारी की भावना को बढ़ाता है. धार्मिक मान्यताओं में इस व्रत को अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से जोड़ा जाता है.
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ज्योतिषाचार्या डॉ. दीप्ति शर्मा बताती हैं कि ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को प्रेम, आकर्षण, वैवाहिक सुख और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक माना गया है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुक्र की अनुकूलता दांपत्य जीवन में मधुरता और आपसी आकर्षण से जुड़ी होती है. ऐसे में पति-पत्नी का साथ मिलकर धार्मिक अनुष्ठान करना उनके रिश्ते में सकारात्मकता और सामंजस्य बनाए रखने का प्रतीक माना जाता है.
करवाचौथ के दिन महिलाएं सुबह से व्रत रखती हैं और परंपरा के अनुसार सोलह शृंगार कर भगवान गणेश और करवा माता की पूजा करती हैं. शाम को करवाचौथ की कथा सुनने के बाद चंद्रमा के दर्शन का इंतजार किया जाता है. चंद्रमा निकलने पर अर्घ्य देकर छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा है. इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोला जाता है. यदि पति भी व्रत रख रहे हों, तो दोनों एक-दूसरे के साथ इस परंपरा में शामिल हो सकते हैं.
करवाचौथ केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास, त्याग और समर्पण की भावना को व्यक्त करने का अवसर भी है. बदलते समय के साथ इस पर्व को मनाने के तरीकों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है. ऐसे में पत्नी के साथ पति का व्रत रखना आपसी सहयोग और समान भागीदारी का संदेश देता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन की गई पूजा अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से जुड़ी है. वहीं, एक-दूसरे के लिए समय निकालना, भावनाओं को समझना और साथ निभाने का संकल्प लेना वैवाहिक रिश्ते को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है.