Barmer News: जिसका नामांकन RO ने किया था खारिज अब वही बन गया गांव का सरपंच, वोटिंग को लेकर विवाद

Barmer News: जिसका नामांकन RO ने किया था खारिज अब वही बन गया गांव का सरपंच, वोटिंग को लेकर विवाद


बाड़मेर. राजस्थान के बाड़मेर जिले के गडरारोड़ में पंचायत चुनाव के दौरान नामांकन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. जिस प्रत्याशी पूरा राम मेघवाल का नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने खारिज कर दिया था, उसी नामांकन को बाद में सही कर दिया गया. इसके बाद पूरा राम मेघवाल ने सरपंच का चुनाव भी जीत लिया. अब इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं.

आरोप है कि नामांकन खारिज होने की सूची चस्पा होने के बाद तय समय निकल जाने पर भी नामांकन को सही किया गया. नियमों के मुताबिक, इस स्तर पर नामांकन से जुड़ा फैसला लेने का अधिकार रिटर्निंग ऑफिसर के पास होता है. ऐसे में उपखंड अधिकारी सुरेश कुमार मेघवाल पर नामांकन सही करने का आरोप लगा है.

जिला निर्वाचन अधिकारी ने मानी गंभीर चूक

मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी और जिला कलेक्टर चिन्मय गोपाल ने जांच कराने की बात कही है. अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि नामांकन किस प्रक्रिया के तहत सही किया गया और इसमें नियमों का पालन हुआ या नहीं.

ये है पूरा मामला

गडरा रोड ग्राम पंचायत में सरपंच पद के लिए 23 अक्टूबर को नामांकन प्रक्रिया हुई थी. इसके बाद निर्वाचन अधिकारियों ने उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच की. इसी दौरान पूरा राम के नामांकन में कमी पाई गई और उनका पर्चा खारिज कर दिया गया. सार्वजनिक की गई सूची में नामांकन खारिज होने की वजह भी बताई गई थी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पूरा राम के दस्तावेजों में आपराधिक रिकॉर्ड की पूरी जानकारी नहीं थी. इसी आधार पर उनका नामांकन अधूरा माना गया.

नाम खारिज होने के दावे

मामले ने तब तूल पकड़ा, जब नामांकन खारिज होने वाले उम्मीदवारों की सूची सोशल मीडिया पर वायरल हुई. सूची में पूरा राम का नाम भी शामिल था. इसके बावजूद जब मतदान हुआ, तो बैलेट पेपर पर उनका नाम और चुनाव चिह्न मौजूद था.

1786 वोट लेकर बने सरपंच

पूरा राम का नाम बैलेट पेपर पर होने के बाद चुनाव हुआ. नतीजे में वह विजेता घोषित कर दिए गए. उन्हें कुल 1786 वोट मिले. उन्होंने कुलदीप सिंह को 187 वोटों के अंतर से हराया. जीत के बाद नामांकन खारिज होने की सूची और बैलेट पेपर पर नाम मौजूद होने का मामला फिर चर्चा में आ गया. इससे चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे.

विरोधी पक्ष ने उठाए सवाल

कुलदीप सिंह के भाई भरत सिंह ने आरोप लगाया कि निर्वाचन अधिकारियों ने नामांकन खारिज होने वाली सूची नोटिस बोर्ड पर लगाई थी, जिसमें पूरा राम का नाम साफ लिखा था. इसके बावजूद उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति मिलना गंभीर मामला है. भरत सिंह का कहना है कि यह जानबूझकर किया गया या अधिकारियों की लापरवाही से हुआ, इसकी जांच होनी चाहिए. उन्होंने चुनाव परिणाम रद्द करने की मांग को लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत भी की है.

मेरी जीत वैध है- पूरा राम

दूसरी तरफ, पूरा राम ने अपने चुनाव को सही बताया है. उनका कहना है कि उनके विरोधी अफवाह फैला रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रिसाइडिंग ऑफिसर ने उन्हें आधिकारिक रूप से चुनाव चिह्न दिया था और उन्होंने चुनाव में जीत हासिल की है.

हाईकोर्ट पहुंच सकता है मामला

इस चुनाव में पूरा राम मेघवाल के प्रतिद्वंद्वी कुलदीप सिंह रहे. यदि हारने वाला प्रत्याशी इस मामले को लेकर हाईकोर्ट पहुंचता है, तो चुनाव के नतीजे और नामांकन की प्रक्रिया पर कानूनी सवाल उठ सकते हैं. फिलहाल मामले में जांच का इंतजार है. ऐसे में किसी भी गड़बड़ी की जानकारी जांच के बाद ही होगी.



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