अरब पार्टी बनी किंगमेकर… तो कितने दिन चलेगी इजराइल की सरकार, 2021 में 18 महीने में टूट गया था गठबंधन

अरब पार्टी बनी किंगमेकर… तो कितने दिन चलेगी इजराइल की सरकार, 2021 में 18 महीने में टूट गया था गठबंधन


तेल अवीव: इजराइल उस दौर में राजनीतिक तौर पर स्थिर नहीं था. अप्रैल 2019 से लेकर मार्च 2021 तक चार बार चुनाव हुए, लेकिन किसी भी पार्टी को सरकार बनाने लायक बहुमत नहीं मिला. बेशक नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे ज्यादा सीटें लाने वाली बनी रही, मगर सरकार बनाने के लिए तो 61 सीटें चाहिए होती हैं. यहीं से एक बदलाव का दौर शुरू हुआ और कुछ ऐसा हुआ जिसने इजराइल के राजनीतिक इतिहास को ही बदल दिया. पहली बार देश में एक ऐसा गठबंधन बना जिसमें राष्ट्रवादी दक्षिणपंथी नेता नफ्ताली बेनेट, मध्य मार्गी यायर लैपिड और अरब पार्टियां शामिल थीं. तय हुआ कि रोटेशन में सरकार चलेगी, मगर महज 18 महीने बाद ही ये गठबंधन टूट गया.

एक बार इजराइल में ऐस ही हालात बन रहे हैं. अब तक 90 प्रतिशत वोटों की गिनती होने के बाद ये साफ है कि न तो नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को बहुमत मिल रहा है और न ही उनके धुर विरोधी आइजेनकोट का गठबंधन इतनी ताकत से आ रहा है कि सरकार बना सके. ऐसे में जो तीसरा मोर्चा सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है वह हैं अरब पार्टियां. यानी इजराइल में अगर इस चुनाव के बाद सरकार बनती है तो वह अरब पार्टियां के सहयोग के बिना नहीं बन सकेगी. मगर सबसे बड़ा सवाल है कि दो अलग-अलग विचारधाराओं की पार्टियां गठबंधन में साथ कैसे आएंगीं. अगर आईं भी तो क्या इजराइल को फिर एक अस्थिर सरकार मिलेगी.

इजराइल में 2021 में कैसे बनी थी सरकार?

इजराइल की जनता ने 2021 में बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. देश में एक ऐसी सरकार बनी थी जिसमें दक्षिणपंथी, मध्यमार्गी, वामपंथी और एक अरब इस्लामी पार्टी शामिल थी. चार अलग अलग विचारधाराओं के साथ सरकार चलाना बेहद मुश्किल साबित हुआ और जून 2022 में संसद में यह सरकार अपना बहुमत खो बैठी. दरअसल 2019 से इजराइल में राजनीतिक अस्थितरता का दौर शुरू हुआ था. 2021 तक देश की जनता 4 चुनाव देख चुकी थी. अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक लिकुड बड़ी पार्टी रही, मगर सरकार बनाने लायक सीटें नहीं ला पाई.

नेतन्याहू को हटाने के लिए बना गठबंधन

देश के सामने बड़ा सवाल था. आखिर येश अतीत पार्टी के नेता यायर लैपिड ने नेतन्याहू को हटाने के लिए एक प्रमुख गठबंधन बनाने की तैयारी की. इसमें दूसरा प्रमुख चेहरा बने यामिना पार्टी के नफ्तारी बेनेट जो दक्षिणपंथी राजनीति के प्रमुख चेहरे माने जाते हैं. आखिरकार राष्ट्रपति ने लैपिड को सरकार बनाने का मौका दिया. इसे इजराइल के इतिहास का सबसे अजीब गठबंधन इसलिए कहा गया क्योंकि इसमें मध्य मार्गी, दक्षिण पंथी, वामपंथी और अरब इस्लामिक राजनीतिक दल शामिल थे.

उस गठबंधन में क्या था सबसे खास?

2021 में हुए उस गठबंधन में दक्षिणपंथ से लेकर वामपंथ तक सभी पार्टियां एक साथ थीं. इस गठबंधन में पहली बार अरब इस्लामी पार्टी Ra’am किसी इजराइली सरकार को समर्थन देने वाले औपचारिक सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा बनी थीं. यह इजराइल की अरब आबादी के लिए एक अहम बदलाव की तरह था.

सबसे खास बात ये है कि इस गठबंधन में बेनेट पीएम बने थे, जबकि उनकी पार्टी के पास सिर्फ 6 सीटें थीं. उनके बाद लैपिड को पीएम बनना था. दोनों दलों के बीच रोटेशन प्रणाली के तहत समझौता हुआ था. इजराइली संसद नेसेट में बेनेट ने एक वोट के अंतर से विश्वास मत हासिल किया और नेतन्याहू के लगातार 12 साल के कार्यकाल का अंत हुआ.

कैसे बनी असहमति

सरबार बनने के बाद शुरुआती समय में राजनीतिक गतिरोध के बाद राष्ट्रीय बजट पारित हुआ. मगर इजराइल फिलिस्तीन विवाद, धर्म और धर्मनिरपेक्षता और अरब पार्टियों के समर्थन को लेकर विवाद की स्थिति रहा. द इजराइल डेमोक्री इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार का अस्तित्व इस बात पर निर्भर था कि मुद्दों पर मतभेद के बावजूद सरकार बचाने के लिए सांसद समर्थन करते रहें, ये ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया.

सबसे पहले बेनेट की यामिका पार्टी के साथ अमिचाई चिकली ने सरकार से दूरी बनाई. उन्होंने वामपंथी और अरब पार्टी के साथ गठबंधन पर आपत्ति जताई. अप्रैल 2022 में यामिना की सांसद इदित सिलमैन ने गठबंधन छोड़ दिया. आखिरकार सरकार अल्पमत में आ गई. 30 जून 2022 को गठबंधन सरकार का औपचारिक अंत हो गया. यायर लैपिड ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री का पद संभाला और चुनाव हुए.



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