Trump Vs Obama: स्टार पावर में डोनाल्ड ट्रंप पर भारी पड़ रहे बराक ओबामा, क्या सुप्रीम लीडर बनेंगे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति?

Trump Vs Obama: स्टार पावर में डोनाल्ड ट्रंप पर भारी पड़ रहे बराक ओबामा, क्या सुप्रीम लीडर बनेंगे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति?


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स्टार पावर में ट्रंप पर ओबामा भारी, क्या सुप्रीम लीडर बनेंगे पूर्व राष्ट्रपति?

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Donald Trump Vs Barack Obama: अमेरिका में मिडटर्म चुनावों के बीच पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के समर्थन में रैलियां कर रहे हैं और डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की तीखी आलोचना कर रहे हैं. वह अपनी पार्टी के स्टार प्रचारक हैं. उनकी रैलियों में खूब भीड़ जुट रही है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या बराक ओबामा फिर से अमेरिका के राष्ट्रपति बनेंगे.

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अपनी पार्टी उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार करते पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा. फोटो- रायटर

US Mid Term Elections and Donald Trump Vs Barack Obama: अमेरिका में मिडटर्म चुनाव हो रहे हैं. इस दौरान हाउस की 435 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे. ऊपरी सदन सीनेट के 35 सदस्य भी चुने जाएंगे. यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक तरह की अग्नि परीक्षा है. क्योंकि उनके राष्ट्रपति कार्यकाल का दो साल का समय बीत गया है. इस चुनाव को उनके कामकाज पर एक तरह की रायशुमारी भी माना जा रही है. लेकिन, अमेरिका चुनाव के जानकारों का दावा है कि इस चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप का स्टार पावर धूमिल हो गया है. वह अब जनता के बीच उतना लोकप्रिय नहीं हैं जितना 2024 में थे. उनके समर्थक भी उनसे दूर होने लगे हैं. दूसरी तरफ अमेरिकी चुनाव में एक ही नेता का स्टारडम बोल रहा है. वो हैं पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा. करीब 10 साल पहले राष्ट्रपति पद से हटे बराक ओबामा के प्रति अमेरिकियों में दीवानगी सर चढ़कर बोल रही है. वह आज भी डेमोक्रेट पार्टी के सबसे भीड़ जुटाने वाले नेता हैं. वह इस चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार की कड़ी आलोचना कर रहे हैं और उनको सुनने के लिए खूब भीड़ उमड़ रही है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या ओबामा फिर से चुनावी राजनीति में कूदेंगे? क्या वह फिर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनेंगे? अगर इस मिड टर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स को बड़ी जीत मिलती है तो क्या वह अमेरिका की राजनीति में एक सुप्रीम लीडर की तरह भूमिका निभाएंगे.

अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं. 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के ठीक दो साल बाद होने वाले इन चुनावों में सत्ता पक्ष के कामकाज का आकलन भी होता है. इस बार मुकाबला इसलिए अहम है, क्योंकि कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी आमने-सामने हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मतदाताओं से इन चुनावों को अपने कामकाज से जोड़कर देखने की अपील कर रहे हैं. दूसरी तरफ, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के समर्थन में मैदान में उतर गए हैं. 24 अक्टूबर को उन्होंने क्लीवलैंड और डेट्रॉयट में रैलियां कीं. यहां उन्होंने ट्रंप प्रशासन की नीतियों, ईरान के साथ उसके टकराव और व्हाइट हाउस में कराए जा रहे बदलावों पर निशाना साधा.

मिशिगन में सीनेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सय्यद के समर्थन में ओबामा ने चुनाव को सरकार को जवाबदेह बनाने का मौका बताया. उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे अपने वोट के जरिए ट्रंप प्रशासन के फैसलों पर लगाम लगाने का रास्ता खोलें.

ओबामा ने ट्रंप पर भ्रष्टाचार और निजी हितों को बढ़ावा देने के आरोप भी लगाए. उन्होंने व्हाइट हाउस की सजावट पर तंज कसते हुए कहा कि राष्ट्रपति का ध्यान घर की मरम्मत और साज-सज्जा पर ज्यादा है. ईरान नीति को लेकर भी उन्होंने प्रशासन की आलोचना की. उनका तर्क था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव से ईरान को वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बनाने का मौका मिला है.

बराक ओबामा 2009 से 2017 तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे. पद छोड़ने के करीब एक दशक बाद भी वह डेमोक्रेटिक पार्टी के सबसे चर्चित नेताओं में शामिल हैं. उनकी रैलियों में भीड़ जुटती है और उनके भाषण पार्टी के समर्थकों को चुनाव प्रचार में सक्रिय करने का जरिया बनते हैं. डेमोक्रेटिक पार्टी इस चुनाव में इसी पहचान का फायदा उठाना चाहती है. मिडटर्म चुनाव में स्थानीय उम्मीदवारों का अपना प्रभाव होता है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर के लोकप्रिय नेता प्रचार को व्यापक चर्चा दे सकते हैं. ओबामा की मौजूदगी से उन मतदाताओं को सक्रिय करने की कोशिश हो रही है, जो ट्रंप प्रशासन की नीतियों से असहमत हैं.

अपने समर्थकों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. फोटो- रायटर

मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की पार्टी के सामने कांग्रेस में अपना प्रभाव बनाए रखने की चुनौती है. अगर रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान होता है, तो राष्ट्रपति के लिए कानून पारित कराना और अपनी नीतियों को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है. वहीं, डेमोक्रेट्स को बढ़त मिलती है तो पार्टी को ट्रंप प्रशासन पर निगरानी और जवाबदेही की मांग उठाने का ज्यादा अवसर मिलेगा.

लेकिन इस चुनाव को केवल ट्रंप बनाम ओबामा की लड़ाई मानना सही नहीं होगा. ओबामा खुद उम्मीदवार नहीं हैं. वह डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं. उनकी भूमिका पार्टी के समर्थकों को एकजुट करने और ट्रंप प्रशासन के खिलाफ राजनीतिक संदेश को मजबूत करने की है. यह भी देखना होगा कि चुनाव के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी में नेतृत्व की तस्वीर कैसी रहती है.

ओबामा के दोबारा राष्ट्रपति बनने की संभावना पर सबसे स्पष्ट जवाब अमेरिकी संविधान देता है. अमेरिका के संविधान के 22वें संशोधन के अनुसार कोई व्यक्ति दो बार से अधिक राष्ट्रपति निर्वाचित नहीं हो सकता. बराक ओबामा 2008 और 2012 में राष्ट्रपति चुने गए थे. इसलिए वह तीसरी बार राष्ट्रपति निर्वाचित नहीं हो सकते. इसका मतलब यह नहीं कि वह राजनीति से दूर हो गए हैं. पूर्व राष्ट्रपति पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर सकते हैं, नीतिगत बहस में हिस्सा ले सकते हैं और अपने समर्थकों को लामबंद कर सकते हैं. ओबामा भी फिलहाल इसी भूमिका में नजर आ रहे हैं.

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