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DA Hike : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट बैठक में महंगाई भत्ते में 3 फीसदी की बढ़ोतरी की गई. अब कर्मचारियों को 63 फीसदी डीए मिलेगा. डीए में वृद्धि से कर्मचारियों की सैलरी में इजाफा हो जाता है. किस कर्मचारी का कितना वेतन बढ़ेगा, जानिए…
डीए बढ़ने से सैलरी में बढ़ोतरी बेसिक पे के आधार पर तय होती है. (Photo : Canva)
नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने आज कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 3 फीसदी का इजाफा कर दिया है. इस बढ़ोतरी से डीए 60% से बढ़कर 63% हो जाएगा. सरकार ने अप्रैल में डीए में 2 फीसदी का इजाफा किया था. महंगाई भत्ते में वृद्धि से 48 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा. डीए और डीआर की नई दरें 1 जुलाई से लागू मानी जाएगी. डीए में वृद्धि होने से कर्मचारियों की सैलरी भी बढ़ जाएगी. आपके वेतन में कितना इजाफा होगा, आइये जानते हैं.
डीए बढ़ने से सैलरी में बढ़ोतरी बेसिक पे के आधार पर तय होती है. इसका मतलब है कि डीएल बढ़ोतरी पूरी सैलरी पर लागू नहीं होती है. यानी आपकी जेब में आने वाला अतिरिक्त पैसा आपकी बेसिक सैलरी के हिसाब से तय होगा. सैलरी में आपको हर महीने कितना DA मिलेगा, इसकी गणना इस फॉर्मूले से होती है-
मासिक DA की रकम= बेसिक सैलरी x वर्तमान DA की दर %100
₹18,000 है बेसिक सैलरी तो कितना बढ़ेगा वेतन
अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 18,000 है तो 3% की बढ़ोतरी से हर महीने ₹540 का इजाफा होगा. इस तरह हर साल उसे 6480 रुपये ज्यादा मिलेंगे. ₹30,000 बेसिक सैलरी पर अब 63% की दर से अब हर महीने ₹18,900 का डीए मिलेगा. हर महीने महंगाई भत्ते के रूप में 900 रुपये ज्यादा मिलेंगे.
अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 40,000 है तो अभी उसे 60 फीसदी डीए पर महंगाई भत्ते के रूप में 24,000 मिल रहे हैं. डीए के 63 फीसदी हो जाने से महंगाई भत्ता सालाना 25,200 हो जाएगा. यानी हर महीने 1,200 अतिरिक्त मिलेंगे. अगर किसी वरिष्ठ अधिकारी की बेसिक सैलरी ₹56,100 है, तो उनकी मासिक सैलरी में ₹1,683 की बढ़ोतरी होगी. चूंकि यह फैसला जुलाई से प्रभावी है, इसलिए कर्मचारियों को जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने का बकाया (Arrears) भी आगामी सैलरी के साथ दिया जाएगा.
साल में दो बार होता है महंगाई भत्ते में संशोधन
केंद्र सरकार हर साल कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ते और औ महंगाई राहत में दो बार संशोधन करती है. डीए में बढ़ोतरी जनवरी से और फिर दूसरी बार जुलाई से प्रभावी होती है. सरकार ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) के आंकड़ों के आधार पर महंगाई का आकलन करती है और उसी अनुपात में महंगाई भत्ता बढ़ाने का फैसला लेती है.