बिहार एमएलसी चुनाव परिणाम: बीजेपी से बगावत कर सारण शिक्षक सीट पर राहुल राज ने कैसे पलटा खेल, NDA के लिए बड़ा झटका क्यों?

बिहार एमएलसी चुनाव परिणाम: बीजेपी से बगावत कर सारण शिक्षक सीट पर राहुल राज ने कैसे पलटा खेल, NDA के लिए बड़ा झटका क्यों?


छपरा. बिहार विधान परिषद की सारण शिक्षक निर्वाचन सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. राहुल राज ने जीत दर्ज कर राजनीतिक दलों को चौंका दिया है. भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले राहुल राज ने दूसरी वरीयता के मतों की गिनती के बाद एनडीए समर्थित जेडीयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर को 1815 वोटों से हरा दिया. इस जीत ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति में उम्मीदवार की अपनी पकड़, शिक्षकों के मुद्दों और दलों के चुनावी गणित पर नई चर्चा शुरू कर दी है.

दरअसल, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि राहुल राज ने पार्टी का टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया था. वह भाजपा में प्रदेश स्तर पर पदाधिकारी रहे थे. निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने पर भाजपा ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था. इसके बावजूद राहुल राज ने चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी.

भाजपा से बगावत, फिर निर्दलीय जीत

दूसरी ओर, एनडीए की ओर से जेडीयू के आनंद पुष्कर मैदान में थे. जन सुराज ने निवर्तमान विधान पार्षद आफाक अहमद को उम्मीदवार बनाया था, जबकि राजद ने प्रो. जयराम यादव पर भरोसा जताया था. इन सभी के बीच राहुल राज की जीत बताती है कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी का समर्थन महत्वपूर्ण होने के साथ उम्मीदवार का व्यक्तिगत संपर्क और शिक्षकों के बीच उसकी स्वीकार्यता भी अहम हो सकती है.

पहली वरीयता में भी राहुल राज आगे थे

बता दें कि मतगणना के दौरान पहली वरीयता के मतों में राहुल राज ने बढ़त बनाई थी. उन्हें 2723 वोट मिले थे. जेडीयू के आनंद पुष्कर को 2440, जन सुराज के आफाक अहमद को 1999 और राजद के जयराम यादव को 1708 वोट मिले थे. कोई भी प्रत्याशी जीत के लिए निर्धारित मतों का कोटा हासिल नहीं कर सका. इसलिए दूसरी वरीयता के मतों की गिनती जरूरी हुई. अंतिम परिणाम में राहुल राज को 4965 वोट मिले, जबकि आनंद पुष्कर को 3150 मत प्राप्त हुए. इस तरह जीत का अंतर 1815 वोट रहा. आफाक अहमद को 2454 और जयराम यादव को 1708 वोट मिले. दूसरी वरीयता की गिनती ने पहले से बनी बढ़त को जीत में बदल दिया.

शिक्षक मतदाताओं ने क्या संदेश दिया?

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में इस बार 89.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था. कुल 10,748 पंजीकृत मतदाताओं में से 9,570 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. इतनी बड़ी भागीदारी बताती है कि इस चुनाव में शिक्षकों ने अपने प्रतिनिधि के चयन में सक्रिय भूमिका निभाई. राहुल राज की जीत को केवल भाजपा से बगावत के नतीजे के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि उनके पक्ष में पहली वरीयता के मतों में बढ़त भी थी. इससे संकेत मिलता है कि उन्हें चुनाव की शुरुआत से ही पर्याप्त समर्थन मिल रहा था.

सातवें वेतनमान और लंबित मांगों पर रहेगी नजर

चुनाव जीतने के बाद राहुल राज ने शिक्षकों का आभार जताया. उन्होंने कहा कि उन्होंने शिक्षकों के मुद्दों को लेकर राजनीति की और शिक्षकों ने उनका समर्थन किया. उन्होंने भरोसा दिया कि शिक्षकों की लंबित मांगों को विधान परिषद में उठाएंगे. सातवें वेतनमान को लागू कराने की मांग भी उनके प्रमुख मुद्दों में शामिल रही है. चुनाव प्रचार के दौरान वह इस मांग को लेकर शिक्षकों से संवाद करते रहे थे. हालांकि, अब उनकी जीत के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह शिक्षकों की मांगों को विधान परिषद में कितनी मजबूती से उठा पाते हैं. चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा कराने के लिए उन्हें सरकार और संबंधित विभागों के सामने मुद्दे रखने होंगे. शिक्षकों के लिए वेतनमान, सेवा संबंधी समस्याएं और लंबित मांगें उनकी प्राथमिकता की परीक्षा लेंगी.

निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका फिर चर्चा में

एक अहम तथ्य यह भी है कि सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत कोई नई बात नहीं है. वर्ष 2023 के उपचुनाव में भी निर्दलीय प्रत्याशी आफाक अहमद ने जीत दर्ज की थी. उस चुनाव में भी दूसरी वरीयता के मतों की भूमिका अहम रही थी. इस बार वही आफाक अहमद जन सुराज के उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे, लेकिन जीत राहुल राज के खाते में गई.

निर्दलीयों का गढ़ बनता जा रहा है सारण शिक्षक सीट

सारण शिक्षक सीट का इतिहास देखें तो यह निर्दलीय प्रत्याशियों का गढ़ बनता जा रहा है. लगातार अलग-अलग चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों का सफल होना इस क्षेत्र की राजनीति की एक खास प्रवृत्ति को सामने लाता है कि यहां पार्टी का समर्थन निर्णायक होने की गारंटी नहीं है. राहुल राज की जीत ने फिर साबित कर दिया कि इस सीट पर शिक्षक मतदाता पार्टी से ज्यादा प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ और शिक्षक हितों के मुद्दों को देखते हैं. यही वजह है कि बड़े दलों के उम्मीदवार होने के बावजूद निर्दलीय बाजी मार ले जाते हैं.

एनडीए के लिए झटका, जन सुराज के लिए भी सबक

वहीं, यह जीत एनडीए के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगी है. बागी प्रत्याशी का जीतना संगठन के अंदर नाराजगी को भी दिखाता है. दूसरी ओर, जन सुराज के लिए भी यह सबक है क्योंकि 2023 में जीतने वाले आफाक अहमद इस बार 2454 वोट पर सिमट गए. जन सुराज ने इस सीट पर खूब जोर लगाया था लेकिन शिक्षक मतदाताओं ने जन सुराज से ज्यादा निर्दलीय चेहरे पर भरोसा जताया. आरजेडी के जयराम यादव भी 1708 वोट के साथ चौथे नंबर पर रहे.

सारण में नए समीकरण की शुरुआत

राहुल राज की जीत के साथ ही सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में नए राजनीतिक समीकरण बनने की चर्चा शुरू हो गई है. यह जीत बिहार की शिक्षक राजनीति में एक अहम बदलाव के रूप में देखी जा रही है. दरअसल, राहुल राज की जीत भाजपा के लिए इसलिए भी राजनीतिक संदेश है कि पार्टी से जुड़े रहे एक नेता ने टिकट नहीं मिलने के बाद अलग रास्ता चुना और विधान परिषद पहुंचने में सफल रहे. स्थानीय और दम-खम वाले प्रत्याशियों की पकड़ को नजरअंदाज करना आसान नहीं है और आने वाले अन्य चुनावों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है.



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