राधाकुंड स्नान कब है? रात में नहाने का विधान, नि:संतान लोगों के लिए खास दिन
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Radha Kund Snan 2026 Date: कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि यानी अहोई अष्टमी के दिन गोवर्धन के राधाकुंड में स्नान करने से संतान की प्राप्ति होती है. इस मान्यता की वजह से हजारों दंपत्ति राधाकुंड स्नान के लिए जाते हैं. इस कुंड को राधारानी ने अपने कंगन से बनाया था, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने स्नान किया था. राधाकुंड स्नान रात के समय में होता है और इसकी विधि अलग है.
गोवर्धन के राधाकुंड में स्नान करने से संतान की प्राप्ति होती है. (Photo: AI)
Radha Kund Snan 2026 Date: भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की नगरी मथुरा में गोवर्धन के पास एक राधाकुंड है, जहां हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को स्नान होता है. इस वजह से इसे राधाकुंड स्नान कहते हैं. इस दिन अहोई अष्टमी भी मनाते हैं. जिन दंपत्तियों को संतान का सुख प्राप्त नहीं होता है, वे शादीशुदा जोड़े स्नान के लिए वहां पहुंचते हैं. मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जो दंपत्ति राधाकुंड में स्नान करता है, उसे संतान की प्राप्ति होती है. राधाकुंड में स्नान का नियम अन्य स्नान से थोड़ा अलग है. जानते हैं राधाकुंड स्नान की तारीख और मुहूर्त.
राधाकुंड स्नान 2026 तारीख
राधाकुंड स्नान के लिए इस साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर दिन रविवार को दोपहर में 2 बजकर 51 मिनट से शुरू हो रही है और यह 2 नवंबर को दोपहर में 1 बजकर 10 मिनट तक मान्य है. उदयातिथि के आधार पर अष्टमी तिथि 1 नवंबर को है. लेकिन स्नान के मुहूर्त के आधार पर ही राधाकुंड स्नान का दिन तय होता है. हालांकि इस साल राधाकुंड स्नान 1 नवंबर को है.
राधाकुंड स्नान 2026 मुहूर्त
हर पर्व के दिन स्नान का समय ब्रह्म मुहूर्त से शुरू होता है. लेकिन राधाकुंड स्नान का मुहूर्त दिन में न होकर रात में शुरू होता है. राधाकुंड स्नान का मुहूर्त रात 11 बजकर 37 मिनट से देर रात 12 बजकर 29 ए एम तक है. उस दिन स्नान के लिए आपको 52 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. यह स्नान निशिता मुहूर्त में करते हैं.
संतान के लिए पति-पत्नी करते हैं स्नान
जिस पति और पत्नी को संतान की प्राप्ति नहीं हुई है, वे दंपत्ति राधाकुंड में स्नान करते हैं और राधारानी की कृपा प्राप्त करते हैं. वे कुंड के जल में खड़े होकर कुष्मांडा यानी कुम्हड़ा और कच्चा सफेद कद्दू यानि पेठा राधारानी को अर्पित करते हैं. कुम्हड़ा और कद्दू को लाल रंग के कपड़े में रखकर राधारानी को चढ़ाते हैं.
लोक मान्यताओं के अनुसार, इस तरह से स्नान और पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है. जिनकी मनोकामना पूरी होती है, वे फिर दोबारा इस कुंड में स्नान करके राधारानी को धन्यवाद देते हैं. इस उम्मीद में हजारों दंपत्ति राधाकुंड स्नान के लिए पहुंचते हैं.
राधाकुंड की कथा
श्रीमद्भागवत की कथा में बताया गया है कि कंस ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए अरिष्टासुर को भेजा था. उसने बैल का स्वरूप धारण किया और श्रीकृष्ण को मारने पहुंच गया, लेकिन श्रीकृष्ण ने उसका वध कर दिया. इस घटना के बाद एक बार राधाजी ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि आपने गौ हत्या की है, आपको पाप से मुक्ति के लिए तीर्थों में स्नान करना चाहिए.
तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी से धरती पर श्याम कुंड बनाया और उसमें सभी तीर्थों के जल को डाल दिया. तब राधाजी ने अपने कंगन से एक कुंड बना दिया, जिसे राधा कुंड कहा गया. भगवान श्रीकृष्ण ने राधाकुंड में स्नान किया और वरदान दिया कि यह श्याम कुंड से भी अधिक पवित्र होगा.