Israel Election 2026: गादी आइजनकोट के आगे कैसे हल्‍के पड़ रहे हैं नेतन्याहू, उनकी सत्ता को चुनौती देने वाले ये नेता कौन हैं? सत्ता का पूरा गणित

Israel Election 2026: गादी आइजनकोट के आगे कैसे हल्‍के पड़ रहे हैं नेतन्याहू, उनकी सत्ता को चुनौती देने वाले ये नेता कौन हैं? सत्ता का पूरा गणित


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Israel Election 2026: गादी आइजनकोट के आगे कैसे हल्‍के पड़ रहे हैं नेतन्याहू?

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7 अक्‍टूबर 2023 को हमास के हमलों के बाद इजरायल में मंगलवार, 27 अक्टूबर यानी आज पहली बार राष्‍ट्रपति चुनाव हो रहे हैं. इजरायल का ये चुनाव सिर्फ एक देश का चुनाव नहीं, बल्‍कि पूरे म‍िड‍िल ईस्‍ट की राजनीति को प्रभावित करने वाला इलेक्‍शन है. इसे इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू के कामकाज पर जनमत संग्रह के तौर पर भी देखा जा रहा है. इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है.

हालांकि ऐसा नहीं है कि नेतन्‍याहू के ल‍िए गद्दी तक पहुंचने का रास्‍ता आसान है. इस बार नेतन्याहू के बजाय पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट प्रधानमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे हैं. इजरायल में हुए छह में से चार ओपिनियन पोल में गादी आइजनकोट के गठबंधन को ज्यादा सीटें दी गई हैं. वहीं नेतन्याहू के गठबंधन को एक पोल में बढ़त और एक पोल में बहुमत मिला है. इजरायल की संसद नेसेट को 17 जुलाई, 2026 को भंग कर दिया गया था. अब 27 अक्टूबर को इजरायली नागरिक संसद के 120 सदस्यों का चुनाव करेंगे. 27 अक्टूबर वह आखिरी तारीख है, जिस दिन कानूनी रूप से चुनाव कराए जा सकते थे. 1988 के बाद यह पहला इजरायली चुनाव है, जो पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार ही हो रहा है.

कौन है गादी आइजनकोट? – इन चुनावों में नेतन्‍याहू को कड़ी टक्‍कर दे रहे गादी आइजनकोट, म‍िजराही यहूदी हैं और उनके माता-पिता मोरक्‍को से इजरायल आए थे. 19 मई, 1960 में जन्‍में गादी ने 1978 में इजरायली सेना जॉइन की. 1982 में हुए पहले लेबनान युद्ध में वो सेना के कमांडर बने थे. 2006 में लेबनान के हिजबुल्‍लाह के लड़ाकों ने सीमा पार कर इजरायल पर हमला क‍िया और 3 इजरायली सैनिकों की हत्‍या कर दी थी. इस हमले में उन्‍होंने 2 सैनिकों को बंदी भी बनाया था. तब इजरायली सेना ने लेबनान की राजधानी बेरूत के पास बसे ‘हिजबुल्‍लाह के गढ़ दाहिया शहर को खंडहर बना दिया था. इस जंग के दौरान गादी आइजेनकोट ही सेना की ऑपरेशंस डायरेक्‍ट्रेट के हेड थे. 34 द‍िन के इस युद्ध में 1191 लेबनानी लोगों की जान चली गई थी. (Image-AP)

गादी ने 41 सालों तक सेना में अपनी सेवाएं देने के बाद कॉर्पोरेट जॉइन कर ल‍िया. पर 2022 में वो राजनी‍ति में उतर गए. उन्‍होंने ‘नेशनल यूनिटी’ गठबंधन को जॉइन क‍िया और इसी साल हुए चुनावों में सांसद भी बन गए. आज नेतन्‍याहू के सामने राष्‍ट्रपति पद के उम्‍मीदवार के तरह खड़े गादी 2023 में खुद नेतन्‍याहू की वॉर कैब‍िनेट में ऑब्‍जरर्वर के तौर पर शाम‍िल हो चुके हैं. लेकिन 2024 में गादी ने नेतन्याहू की वॉर कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया. उनका कहना था कि उनके पास गाजा युद्ध के बाद के ल‍िए कोई प्‍लान नहीं है और वो बस सरकार बचाने में लगे हैं.
(Image-AP)

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प‍िछले साल सितंबर, 2025 में गादी ने अपनी पार्टी ‘याशर’ बनाई. इस नाम का अर्थ होता है ‘ईमानदार’. गादी ने जंग में अपना छोटा बेटा गाल आर 3 भतीजे खोए हैं. उनके छोटे बेटे की जंग में कुर्बानी के बाद उसके अंतिम संस्‍कार को टीवी पर लाइव द‍िखाया गया था, ज‍िसमें हजारों लोगों की भीड़ पहुंची थी. यही वो बाते हैं जो गादी को इन चुनावों में लोगों के इतना करीब जोड़ रही हैं. गादी आइजनकोट को भले ही नेतन्‍याहू का सबसे बड़ा मुकाबला माना जा रहा हो, लेकिन राष्‍ट्रपति पद तक पहुंचने का उनका सफर इतना आसान भी नहीं है. नेतन्याहू के खिलाफ बेनेट, लापिड, लिबरमैन, गोलान और अरब पार्टियों का व्यापक विपक्ष भी मैदान में है. (Image-REUTERS)

नफ्ताली बेनेट
नफ्ताली बेनेट इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री हैं और दक्षिणपंथी-धार्मिक पृष्ठभूमि वाले नेता हैं. वे पहले नेतन्याहू के करीबी थे, लेकिन 2021 में लापिड और अरब पार्टी राम समेत एक विविध गठबंधन बनाकर नेतन्याहू को सत्ता से हटाया था. इस चुनाव में वे अपनी पार्टी बेनेट 2026 को लापिड की येश अतिद के साथ मिलाकर बी’याचद गठबंधन बना रहे हैं. उनकी राह फिलिस्तीनी राज्य के विरोध और पश्चिमी किनारे में बस्तियों के समर्थन से जुड़ी है, लेकिन वे नेतन्याहू की जगह सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं. (Image-REUTERS)

यायर गोलान
यायर गोलान इजरायली सेना के पूर्व उपप्रमुख हैं और द डेमोक्रेट्स पार्टी का नेतृत्व करते हैं, जो पुरानी लेबर पार्टी और मेरेत्ज़ जैसी वामपंथी-उदारवादी ताकतों को मिलाकर बनी है. वे 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के दौरान लोगों को बचाने के लिए इनकी खूब तारीफ हुई थी. उनकी राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों, सुरक्षा और अधिक उदार सामाजिक नीतियों पर केंद्रित है, और वे नेतन्याहू के विकल्प के रूप में वाम-केंद्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. (Image-REUTERS)

एविग्डोर लिबरमैन
एविग्डोर लिबरमैन पूर्व रक्षा मंत्री और यिसरायल बेइतेनु पार्टी के नेता हैं, जिसका मुख्य समर्थन पूर्व सोवियत संघ से आए इजरायली प्रवासियों में है. वे राष्ट्रीय सुरक्षा पर कठोर रुख रखने वाले नेता माने जाते हैं, लेकिन नेतन्याहू के तीखे आलोचक बन गए हैं. 2018 में उन्होंने नेतन्याहू सरकार से इस्तीफा दिया था. इस चुनाव में वे नेतन्याहू के बिना सरकार बनाने वाले विपक्षी गठबंधन का हिस्सा हैं. (Image-REUTERS)

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