Ground Report: कभी पूरे शहर की प्यास बुझाता था करौली का शाही कुंड, आज है बदहाली का शिकार

Ground Report: कभी पूरे शहर की प्यास बुझाता था करौली का शाही कुंड, आज है बदहाली का शिकार


Last Updated:

Karauli Shahi Kund Ground Report: करौली का ऐतिहासिक तीन मंजिला ‘शाही कुंड’ आज प्रशासनिक उपेक्षा के कारण बदहाली की कगार पर है. रियासत काल में रानियों के स्नान के लिए निर्मित यह कुंड भद्रावती नदी के किनारे स्थित है और कभी पूरे करौली शहर की प्यास बुझाता था. अपनी अद्भुत स्थापत्य कला और नक्काशीदार छतरियों के लिए मशहूर यह कुंड भरतपुर संभाग की अनूठी धरोहर है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि केवल वीआईपी दौरों पर खानापूर्ति करने के बजाय यदि सरकार इसका जीर्णोद्धार करे तो यह पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है.

Top Deals Inside

करौली: राजस्थान का करौली जिला अपनी समृद्ध प्राचीन संस्कृति और रियासतकालीन भव्य धरोहरों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. यहाँ की ऐतिहासिक इमारतें और किले आज भी अपनी शान की गवाही देते हैं. इन्हीं में से एक बेहद खास और ऐतिहासिक इमारत है ‘शाही कुंड’. तीन मंजिला यह ऐतिहासिक कुंड अपनी बेजोड़ स्थापत्य कला और आकर्षक वास्तुकला के लिए मशहूर है. रियासत काल में राजा-महाराजाओं के दौर में यहाँ रानियाँ स्नान किया करती थीं. इसके अलावा जब आधुनिक नलों की व्यवस्था नहीं थी, तब यही ऐतिहासिक कुंड पूरे करौली शहर की प्यास बुझाता था. लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि कभी शहर की जीवनरेखा रहा यह शाही कुंड आज प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली की मार झेल रहा है.

इतिहासकारों और जानकारों के अनुसार, पूरे भरतपुर संभाग में इस तरह का भव्य और कलात्मक शाही कुंड कहीं और देखने को नहीं मिलता. यह राजस्थान के सबसे खूबसूरत और अनूठे कुंडों में गिना जाता है. लेकिन वर्तमान में स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि यदि समय रहते इस जर्जर इमारत के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में यह ऐतिहासिक धरोहर पूरी तरह ध्वस्त होने की कगार पर पहुँच सकती है.

भद्रावती नदी के किनारे स्थित है तीन मंजिला कुंड
करौली के स्थानीय निवासी डालचंद शर्मा बताते हैं कि वे बचपन से इस कुंड से जुड़े रहे हैं. यह तीन मंजिला कुंड भद्रावती नदी के किनारे स्थित है. मानसून के समय जब नदी में पानी आता था, तो सीधे इसी कुंड में पहुँचता था. शर्मा के अनुसार, पहले इसका पानी इतना शुद्ध था कि पूरे शहर में यहीं से पेयजल आपूर्ति होती थी. वर्तमान में मानसून के बाद यह कुंड पानी से लबालब भरा हुआ है, लेकिन साफ़-सफ़ाई न होने के कारण अब कोई इसके पास जाना भी पसंद नहीं करता. स्थानीय लोग इस दुर्दशा का ज़िम्मेदार सीधे तौर पर जिला प्रशासन और नगर परिषद को ठहराते हैं.

वीआईपी दौरे के समय होती है खानापूर्ति
स्थानीय निवासी डालचंद शर्मा और नगर परिषद पार्षद यतेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले साल 2025 में जब यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा करौली के दौरे पर आए थे, तब प्रशासन ने महज़ एक दिन में कुंड के आसपास चूना-पुताई करवाकर और टूटी बाउंड्रीवॉल ठीक कराकर ख़ानापूर्ति की थी. यहाँ तक कि एक ‘सेल्फी पॉइंट’ भी बना दिया गया था. लेकिन मंत्री के जाते ही इस धरोहर को फिर से अपने हाल पर छोड़ दिया गया, जिसके बाद से आज तक किसी अधिकारी ने इसकी सुध नहीं ली.

रानियों के स्नान और मनोरंजन के लिए हुआ था निर्माण
करौली के वरिष्ठ इतिहासकार वेणुगोपाल शर्मा बताते हैं कि शाही कुंड करौली की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख हिस्सा है. रियासत काल में इसे विशेष रूप से रानियों के स्नान और मनोरंजन के उद्देश्य से बनवाया गया था. इसकी छतरियों की नक़्क़ाशी, चारों दिशाओं में बनी सुंदर सीढ़ियाँ और सुरक्षात्मक बनावट वास्तुकला का अद्भुत नमूना प्रस्तुत करती हैं. इतिहासकार और स्थानीय नागरिक विष्णु शर्मा का कहना है कि यदि राज्य सरकार और जिला प्रशासन इसे सही ढंग से संरक्षित करे, तो यह स्थल करौली में पर्यटन का एक बेहद बड़ा केंद्र बन सकता है.



Source link