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मध्य प्रदेश के हरीश धवन मिट्टी से अनोखी और खूबसूरत ज्वेलरी बना रहे हैं. इसे तैयार करने में आठ महीने का समय लगता है. वे गहनों को रंगने के लिए पालक, धनिया, चिड़ियों की बीट और स्पर्म का उपयोग करते हैं. उनकी यह नायाब कला लोगों को काफी हैरान कर रही है.
नई दिल्ली: गहने तो आपने बहुत देखे होंगे लेकिन क्या कभी मिट्टी से बनी हुई खूबसूरत ज्वेलरी देखी है. जो देखने में मिट्टी की बिल्कुल भी नहीं लगती है. इस ज्वेलरी को देखकर आपको लगेगा जैसे यह बारीक कांच और महंगे मोतियों से बनाई गई है. असल में ऐसा नहीं है. ग्वालियर के रहने वाले हरीश धवन ने ज्वेलरी इंडस्ट्री में एक नया अविष्कार करके हर किसी को हैरान कर दिया है. इन दिनों वह दिल्ली के त्रिवेणी संगम कला में अपनी इस खूबसूरत और अनोखी ज्वेलरी को लेकर के आए हुए हैं.
जिसे देखने वाले देखते ही रह जा रहे हैं. इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि उन्होंने मिट्टी से ज्वेलरी बनाने के साथ-साथ इसमें नेचुरल रंगों का इस्तेमाल किया है. जो नेचुरल रंग हैं वो पालक, धनिया के साथ ही उन्होंने जो चिड़ियों की पॉटी होती है उससे भी रंग निकाला है. इसके अलावा स्पर्म से भी रंग बनाते हैं. ऐसा पूरे देश में करने वाला कलाकार आपको नहीं मिलेगा. हमने उनसे इस दौरान खास बातचीत की तो उन्होंने क्या कुछ कहा चलिए आपको बताते हैं.
मिट्टी को तैयार करने में लगते हैं 8 महीने
हरीश धवन ने बताया कि यह जो मिट्टी होती है वह अलग-अलग जगहों से ली जाती है. वह मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले हैं. ग्वालियर में खास जनजाति है जो आज भी इस काम को करती है. उन्होंने वहीं से प्रभावित होकर मिट्टी से ज्वेलरी बनाने का काम शुरू किया था. यह जो खास मिट्टी होती है इसे गूथने से लेकर के इसे आकार देने में पूरे 8 महीने का वक्त लगता है. उन्होंने बताया कि इस मिट्टी से वह अकेले ही ज्वेलरी बनाते हैं.
दिन-रात मेहनत करके एक-एक ज्वेलरी को बनाने का काम करते हैं. इसमें जो मोती लगते हैं उसे भी वह खुद ही अपने हाथों से लगाते हैं. उन्होंने बताया कि जो धागे का इस्तेमाल किया गया है वह कॉटन का इस ज्वेलरी में इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा पांच तरह के मेटल का इस्तेमाल करते हैं. अखरोट की लकड़ी तक का इस्तेमाल इसमें किया जाता है, इसलिए यह ज्वेलरी
पूरे भारत में आपको कहीं पर भी देखने के लिए नहीं मिलेगी.
स्पर्म और चिड़ियों की पॉटी से रंग
हरीश धवन ने बताया कि पूरे भारत में वह इकलौते ऐसे कलाकार हैं, जो चिड़ियों की पॉटी से भी रंग निकाल लेते हैं. इसके अलावा स्पर्म से भी रंग बनाया जा सकता है, इस बात को लोग बहुत कम जानते हैं, लेकिन वह इसका इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि नेचुरल रंगों के तौर पर वह पालक, धनिया और घास तक का इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने बताया कि इसीलिए उनकी ज्वेलरी की कीमत काफी महंगी है. 700 रुपए से लेकर 7000 रुपए तक की ज्वेलरी उनके पास मौजूद है. इस ज्वेलरी को बनाने के पीछे एक वजह यह भी थी कि जो बड़े घर की महिलाएं होती हैं वो आए दिन अलग-अलग पार्टी में जाती है. ऐसे में हर साड़ी की मैचिंग के लिए उन्हें एक अलग ज्वेलरी चाहिए होती है. इसी डिमांड को पूरा करने के लिए उन्होंने खूबसूरत और हर एक कलर की ज्वेलरी बनाना शुरू किया जिसे महिलाएं खूब खरीदती हैं.
फाड़कर फेंक दी थी अपनी डिग्री
हरीश धवन ने बताया कि उन्होंने काफी अलग-अलग विषय में पढ़ाई की हुई थी लेकिन उन्हें अपनी पढ़ाई कमाई का जरिया नहीं लग रही थी. उनकी पढ़ाई ने उन्हें कमाई का रास्ता खोलकर नहीं दिया था. इसलिए उन्होंने अपनी सारी डिग्री फाड़ कर फेंक दी थी. उन्हें कमाई का जरिया इन गहनों ने दिया है और यह अनोखी कला ही उन्हें दिल्ली में जो नया संसद भवन बना है वहां तक पहुंचा चुकी है. वहां पर उनकी 9 कलाकृतियां लगी हुई है, जबकि हर एक आर्टिस्ट कि वहां पर सिर्फ दो ही कलाकृति लगी है.