हिमाचल में कितने बंदर? पंचायत वार डेटा जुटाएगी सरकार, CM ने वन्यजीव विंग से मांगी रिपोर्ट

हिमाचल में कितने बंदर? पंचायत वार डेटा जुटाएगी सरकार, CM ने वन्यजीव विंग से मांगी रिपोर्ट


शिमला. हिमाचल प्रदेश में बंदरों की समस्या और वन्यजीव संरक्षण को लेकर राज्य सरकार ने अहम कदम उठाने की तैयारी की है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य वन्यजीव बोर्ड की 12वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए वन्यजीव विंग से बंदरों की संख्या का पंचायतवार डेटा मांगा है. इस जानकारी के आधार पर प्रदेश में बंदरों की संख्या और उनके वितरण से संबंधित स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी.

बैठक में औद्योगिक विकास, सीमावर्ती क्षेत्रों में सामरिक आधारभूत ढांचे, सड़क सुविधाओं, वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की गई. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विकास की जरूरतों के साथ पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के कानूनी प्रावधानों का ध्यान रखने पर जोर दिया. बैठक में विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई.

सीएम सुक्खू ने वन्यजीव विंग से प्रदेश में बंदरों की संख्या का पंचायतवार डेटा उपलब्ध करवाने को कहा. बंदरों की संख्या और उनके क्षेत्रवार वितरण की जानकारी वन्यजीव प्रबंधन तथा उनसे जुड़ी समस्याओं के आकलन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है.हालांकि, बैठक में पंचायतवार आंकड़ों की संख्या, डेटा जुटाने की समयसीमा या इसके आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी नहीं दी गई.

सीमावर्ती क्षेत्रों में ITBP की चौकियों के लिए वन भूमि को मंजूरी

राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया गया. इनमें लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिलों में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की चौकियों तथा सैन्य आधारभूत ढांचे के विकास के लिए वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव शामिल रहे. लाहौल-स्पीति जिले की स्पीति तहसील के लालुंग और धार चोकुला, काजा में बॉर्डर आउट पोस्ट लालुंग स्थापित करने के लिए ITBP की 17वीं बटालियन के पक्ष में 1.7820 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित करने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई.

इसके अलावा किन्नौर जिले में फॉरवर्ड पोस्ट निथल थाच की स्थापना के लिए ITBP की दूसरी बटालियन के पक्ष में 1.60 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव पर विचार हुआ.

किन्नौर जिले की सांगला तहसील में नागस्ती के समीप उत्तरी सीमा पर सैन्य आधारभूत ढांचे के विकास के लिए रकछम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य के भीतर 0.2750 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित करने का प्रस्ताव भी रखा गया. यह भूमि 11 महार रेजिमेंट/मुख्यालय 136 (स्वतंत्र) इन्फैंट्री ब्रिगेड समूह के पक्ष में हस्तांतरित करने से संबंधित था. बैठक में विचार-विमर्श के बाद इन प्रस्तावों को लागू वैधानिक प्रावधानों और पर्यावरणीय सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप मंजूरी प्रदान की गई.

संसारपुर टैरेस में दवा निर्माण इकाई को मंजूरी

औद्योगिक विकास से जुड़े प्रस्ताव के तहत कांगड़ा जिले के संसारपुर टैरेस औद्योगिक क्षेत्र, फेज-1 में प्लॉट नंबर 53 और 54 पर मैसर्स सीएमजी बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड की ओर से सक्रिय औषधि सामग्री (API) और इंटरमीडिएट्स निर्माण इकाई स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. यह परियोजना प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से जुड़ी है. बोर्ड ने विकास संबंधी जरूरतों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव पर विचार किया.

गोयल फर्नेस की उत्पादन क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव मंजूर

बैठक में मैसर्स गोयल फर्नेस प्राइवेट लिमिटेड की मौजूदा सेकेंडरी मेटलर्जिकल इकाई के विस्तार पर भी चर्चा हुई. प्रस्ताव के अनुसार, कंपनी की एमएस इंगोट्स उत्पादन क्षमता को 19,200 टन प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 96,600 टन प्रतिवर्ष किया जाना है. इसके साथ अतिरिक्त इंडक्शन फर्नेस, कंटीन्यूअस कास्टिंग मशीन और रोलिंग मिल स्थापित करने का प्रस्ताव है. इनके माध्यम से प्रतिवर्ष 77,280 टन राउंड, एंगल, चैनल, टीएमटी बार और फ्लैट्स का उत्पादन किया जाएगा.बोर्ड ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद इस प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की.

शिकारी देवी अभयारण्य में सड़क चौड़ीकरण का रास्ता साफ

मंडी जिले के सराज वन मंडल में शिकारी देवी वन्यजीव अभयारण्य के भीतर भुलाह-शिकारी देवी सड़क के विस्तारीकरण और उन्नयन का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया. इसके लिए हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के सराज मंडल के पक्ष में 4.72 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित करने के प्रस्ताव पर विचार किया गया. बोर्ड ने इस प्रस्ताव को भी मंजूरी दी. वहीं, मंडी जिले के सुकेत वन मंडल में कीरतपुर-मनाली फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग-154 के पुंग-भुवाणा टनल खंड पर सड़क दुर्घटनाओं के कारण वन्यजीवों की मौत की बढ़ती घटनाओं को रोकने के उपायों पर चर्चा की गई. बैठक में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया.

बनखंडी में दुर्गेश अरण्य प्राणी उद्यान का काम तेज करने के निर्देश

सीएम सुक्खू ने कांगड़ा जिले के देहरा स्थित बनखंडी में निर्माणाधीन दुर्गेश अरण्य प्राणी उद्यान की प्रगति की भी समीक्षा की. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए. यह प्राणी उद्यान प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है. मुख्यमंत्री ने परियोजना से जुड़े कार्यों की प्रगति पर अधिकारियों से जानकारी ली.

वन्यजीवों पर जारी हुईं दो पोस्टकार्ड श्रृंखलाएं

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वन्यजीव विंग और हिमाचल प्रदेश डाक परिमंडल, शिमला के सहयोग से जारी दो पोस्टकार्ड श्रृंखलाओं का विमोचन भी किया. इनका नाम ‘हिमाचल्स वाइल्ड आइकॉन्स’ और ‘हिमाचल्स वाइल्ड हेरिटेज’ है. इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने प्रधान मुख्य अरण्यपाल (हॉफ) डॉ. संजय सूद की लिखित पुस्तक ‘सिंप्लिफाइड प्रोसीजर्स फॉर एनालिसिस ऑफ फिजियो केमिकल टैस्ट्स इन वाटर सैंपल्स’ का भी विमोचन किया. बैठक में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, हिमाचल प्रदेश योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया, विधायक संजय अवस्थी, प्रधान सचिव एम. सुधा देवी, बोर्ड के सदस्य, प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्यजीव) आलोक प्रेम नगर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.



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