संसद के सेंट्रल हॉल में BRICS का शक्ति प्रदर्शन, ईरानी डेलीगेशन से मिले PM
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BRICS Summit: संसद भवन परिसर का ऐतिहासिक संविधान सदन एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का बड़ा केंद्र बन गया है. भारत की मेजबानी में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 का भव्य आगाज हो चुका है. सेंट्रल हॉल में सजे इस मंच पर पहले दिन पीएम मोदी खुद पहुंचे. उन्होंने साझेदार देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और फैमिली फोटो का हिस्सा बने.
पीएम मोदी और जयशंकर ने ईरान के डेलिगेशन से मुलाकात की.
BRICS Summit: दो दिवसीय 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 का आगाज हो चुका है. भारत की मेजबानी में इसका आयोजन संसद भवन परिसर के संविधान सदन स्थित सेंट्रल हॉल में हो रहा है. पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आयोजन स्थल पर पहुंचे, फैमिली तस्वीर का हिस्सा बने और साझेदार देशों के कुछ प्रतिनिधियों से मुलाकात की. ईरानी दूतावास ने पीएम मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वरिष्ठ सांसद शशि थरूर से बातचीत करते अपने प्रतिनिधि का वीडियो जारी किया.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में लिखा, “12वें संसदीय मंच 2026 के दौरान, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने ईरानी संसदीय प्रतिनिधियों से शिष्टाचार भेंट की.”
दूतावास के अनुसार, इन मुलाकातों से भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को रेखांकित किया गया. बता दें कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के पार्लियामेंट्री डेलीगेशन का नेतृत्व डॉ. अहमद नादेरी कर रहे हैं. साझा की गई वीडियो क्लिप में वो ही पीएम मोदी से बात करते देखे जा सकते हैं.
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ इस मंच में शामिल होने वाले थे. लेकिन फिर दूतावास ने शनिवार (24 अक्टूबर) को बयान जारी कर बताया, ” अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण वो नहीं आ पाएंगे. उनके बदले ईरान का एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल मंच की बैठक में हिस्सा लेगा.”
दो दिवसीय (26 और 27 अक्टूबर) कार्यक्रम में ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के पीठासीन अधिकारी और संसदीय नेता, केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, राज्य विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारी, सांसद और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हो रहे हैं.
सोमवार को फोरम का विधिवत उद्घाटन करते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने ठोस परिणाम देने की अपील ब्रिक्स समूह से की. उन्होंने कहा, “हमारी सफलता केवल चर्चाओं से नहीं, बल्कि उसके ठोस परिणामों से मापी जाएगी.” उन्होंने ब्रिक्स साझेदारों से ऐसे समाधान निकालने का आग्रह किया, जिनसे नागरिकों के जीवन में सुधार आए.