सऊदी अरब को अब ऐसा टारगेटिंग टूल मिल गया हो जो जल्द ही हूतियों को जड़ से मिटा देगा. यह ब्रह्मास्त्र खुद यूएस प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने दिया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी की ओर से युद्ध में सीधी मदद मांगे जाने के बाद अमेरिका ने यह टूल सऊदी किंग को दिया है जो हूतियों को चुन-चुनकर मार रहा है.
हूती लगातार सऊदी अरब के लिए रक्तबीज साबित हो रहे हैं. सऊदी जब भी इन्हें टारगेट करता है, ये और ज्यादा ताकत के साथ वापस सऊदी पर हमला करते हैं. DW की एक रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी के शासक मोहम्मद बिन सलमान ने डोनाल्ड ट्रंप से सीधी मिलिट्री कार्रवाई की मदद मांगी थी. अमेरिका मिड टर्म चुनाव में पहुंच गया है. ऐसे में ट्रंप के फिलहाल ऐसा करना मुश्किल है, क्योंकि वह पहले ही ईरान युद्ध के परिणामों से जूझ रहे हैं. ऐसे में ट्रंप ने सऊदी को एक ऐसा AI टारगेटिंग टूल दिया है जो रियल टाइम डाटा देख हूतियों को चुन-चुनकर मार सकता है.
यूएस के कई अधिकारी सऊदी में
CNN ने हाल ही एक रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों की ओर से दावा किया था कि टारगेटिंग टूल को आसान बनाने के लिए जॉइंट फोर्स कमांड के हिस्से के तौर पर 100 से 200 यूएस सैनिक सऊदी अरब में तैनात हैं. ये अधिकारी टारगेटिंग टूल के इस्तेमाल में सऊदी सेना की मदद कर रहे हैं. इसके अलावा इंटेलीजेंस भी उपलब्ध करा रहे हैं.
यह टारगेटिंग टूल इसलिए खास है क्योंकि इससे रियल टाइम में देखा जा सकता है कि युद्ध के मैदान में क्या हो रहा है. इससे ये भी पता लगाया जा सकता है कि आखिर हमला करने के बाद हूती कहां छिप जाते हैं. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक यह मावेन स्मार्ट सिस्टम या शॉर्ट MSS जैसा ही है. इससे पहले अमेरिका ईरान और सीरिया में टारगेट की तलाश के लिए इसका इस्तेमाल कर चुकी है.
क्या है मावेन?
मावेन यूएस का ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्राम है जो मिलिट्री के लिए बनाया गया है. यह 2017 में लॉन्च किया गया था. इसमें इंटेलिजेंस, सर्विलास और रिकॉनिसेंस डेटा की स्ट्रीम को विजुलाइज करता है. वाशिंगटन में सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ के एनालिस्ट के हवाले से DW ने लिखा है कि यह सिस्टम लाइव सैटेलाइट फीड या ड्रोन कैमरों से आने वाले डेटा का पैटर्न पहचानता है और संभावित टारगेट को निशाना बनाता है.
CSIS रिसर्चर्स ने लिखा कि पहले इंसानी मिलिट्री एनालिस्ट को उन्हें खोजने के लिए कई अलग-अलग सोर्स देखने पड़ते थे. जैसे घंटे के सैटेलाइट या ड्रोन फुटेज. अब ये सभी को एक साथ एनालइट करता है और ये बता देता है कि संभावित टारगेट कहां हो सकता है.
कैसे काम करता है ये
मावेन दरअसल MSS का ही एक पार्ट है. ये सबसे पहले टारगेट ढूंढता है, फिर ये एनालिसिस करता है कि ये खतरनाक है या नहीं. अगर टारगेट खतरनाक है तो फिर ये आदेश मांगता है. फरवरी के आखिर में ईरान पर हमला करते समय US मिलिट्री ने MSS का इस्तेमाल किया था. डस समय इस पावर्ड सिस्टम की वजह से युद्ध के 24 घंटों में एक हजार से ज्यादा टारगेट ध्वस्त किए गए थे. अब जब हूती सऊदी को लगातार निशाना बना रहे हैं तब अमेरिका का यह हथियार हूतियों की नाक में दम करने के लिए तैनात हो चुका है.
क्या AI हूतियों को हरा सकता है?
अभी तक मिडिल ईस्ट में एआई आधारित टारगेटिंग सिस्टम का यूज करने के मामले में इजराइल सबसे आगे रहा है. अब सऊदी भी ये कह रहा है. हालांकि हूतियों पर ये बहुत कारगर रहेगा इस पर एक्सपर्ट का अलग अलग मानना है. खासतौर से हूतियों के बारे में. दरअसल हूती अलग अलग ग्रुपों में रहते हैं और मेाबाइल लॉन्चरों से ही मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करते हैं.
हमलों के बाद ये छिप भी जाते हैं, ऐसे में एआई टारगेटिंग टूल के लिए इन्हें ढूंढना और छिपने से पहले इन तक पहुंचना बड़ी चुनौती होगी. एनालिस्ट फ्रेडरिक वेहरे और एंड्रयू बोनी ने एक स्पेशलिस्ट मीडिया आउटलेट, वॉर ऑन द रॉक्स के लिए लिखा है कि एआई ने कमांडरों के लिए अेवयरनैस बढ़ाई है, हालांकि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली और इजराइल के एआई सिस्टम प रिसर्च करने वाली एंटनी का मानना है कि इससे बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला, क्योंकि हूतियों का टॉलरेंस लेवल बहुत ज्यादा है.