आधी रात में घर में घुसे बदमाश, पूरे परिवार को कर दिया लहूलुहान, महिलाओं के साथ किया.. पुलिस ने नहीं की कार्रवाई

आधी रात में घर में घुसे बदमाश, पूरे परिवार को कर दिया लहूलुहान, महिलाओं के साथ किया.. पुलिस ने नहीं की कार्रवाई


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भोपाल के बैरागढ़ में आधी रात को बदमाशों ने एक घर में घुसकर महिलाओं और परिजनों पर हमला कर दिया. घटना में कई लोग घायल हुए हैं, जिन्हें हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पीड़ितों ने हमले के पीछे प्रदीप मेवाड़ा का नाम लिया है. वारदात के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.

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आधी रात को घर में घुसकर महिलाओं और परिजनों पर जानलेवा हमला

भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ इलाके से मानवता को झकझोर देने वाली और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है. आधी रात को कुछ दबंग किस्म के बदमाश एक घर में जबरन घुस गए और वहां मौजूद महिलाओं और परिजनों पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया. इस खौफनाक वारदात में परिवार के कई लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

पीड़ितों के अनुसार, इस पूरे हमले के पीछे प्रदीप मेवाड़ा का नाम सामने आ रहा है, जिसके इशारे पर हमलावरों ने घर में घुसकर इस आपराधिक कृत्य को अंजाम दिया. इस घटना के बाद इलाके दहश्त फैल गई है. आधी रात में इस तरह की घटना में आसपास के लोगों में डर फैल गया है.

रात के 3 बजे बैरागढ़ थाने पहुंचे पीड़ित
घटना के तुरंत बाद, लहूलुहान हालत में परिजन और रिश्तेदार अपने घायलों को लेकर रात के ठीक 3:00 बजे बैरागढ़ थाने पहुंचे. पीड़ित परिवार का आरोप है कि इतनी बड़ी घटना और आपातकालीन स्थिति होने के बावजूद बैरागढ़ थाने की पुलिस ने पीड़ितों की मदद के लिए कोई कदम नहीं उठाया और न ही आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की.

पुलिस ने नहीं की कोई कार्रवाई
पीड़ितों का कहना है कि पुलिस ने फौरन एफआईआर दर्ज करने या मदद करने के बजाय संवेदनहीनता दिखाते हुए कह दिया ‘पहले जाकर अस्पताल में अपना मेडिकल करवा कर आओ’ न्याय की गुहार लगाने थाने पहुंचे परिजन रोते-बिलखते रहे, लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी. फिलहाल, हमीदिया अस्पताल में घायलों का उपचार चल रहा है.

अब सवाल उठ रहे हैं कि आधी रात को घर में घुसकर महिलाओं और परिजनों पर जानलेवा हमला होने के बाद भी बैरागढ़ थाने की पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न करना और पीड़ितों को बैरंग लौटाना गहरी लापरवाही को दर्शाता है. क्या बैरागढ़ थाने की पुलिस किसी बड़े दबाव में है, या फिर राजधानी में आम जनता की सुरक्षा और न्याय की उम्मीद सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है?



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