ब्रह्मपुत्र नदी क्यों है खास? जहां बन रहे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर विवाद
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Siang Project Row: अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर बनने वाले हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर बवाल चल रहा है. प्राेजेक्ट के विरोध में चल रहे प्रदर्शन अब हिंसक हो गए हैं. यह एशिया की सबसे बड़े नदी है जो असम में जाकर ब्रह्मपुत्र बन जाती है. यह दुनिया की अकेली पुरुष नदी के तौर पर भी मान्यता प्राप्त है, जिसका जिक्र पुराणों में भी है.
असम में बहती ब्रह्मपुत्र नदी. (फोटो-Unplash)
अरुणाचल प्रदेश की जिस सियांग नदी पर बन रहे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का विरोध हो रहा है. असम में यही नदी पहुंचकर ब्रह्मपुत्र बन जाती है. एशिया की सबसे प्रमुख और शक्तिशाली इस नदी को चीन से लेकर बांग्लादेश तक अलग-अलग नामों से जाना जाता है. ये दुनिया की अकेली ऐसी नदी है जिसके बीच में ऐसा आईलैंड है जहां लोग रहते हैं. सिर्फ इतना ही नहीं दुनिया में जितनी भी नदियां हैं सभी के नाम स्त्रीलिंग हैं. अकेले ये नदी ऐसी है जिसका नाम पुल्लिंग में रखा गया है. इसीलिए इसे नदी की बजाय नद कहा जाता है.
ब्रह्मपुत्र यानी ब्रह्मा का पुत्र. चूंकि ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता माना जाता है. हालांकि नदी को यह पहचान असम में मिलती है. उससे पहले तिब्बत में इसे यारलुंग जांग्बो के नाम से जाना जाता है. चीन ने इसे एक और नाम यारलुंग त्संग्पो दिया है. यह मानसरोवर झील से पूर्व की ओर बहती है और नामचा बारवा शिखर के पास पहुंचकर अंग्रेजी के यू की तरह कर्व लेकर भारत के अरुणाचल प्रदेश में एंट्री करती है जहां इसे सियांग या दिहांग के नाम से जाना जाता है. यहां से आगे सहायक नदियों के साथ ये मूल ब्रह्मपुत्र बनती है और बांग्लादेश में गंगा नदी के साथ मिलकर जमुना बन जाती है. सरकार जो डैम बनाना चाहती है, उसके लिएअरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले को चुना गया है. इसीलिए इसका नाम सियांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट रखा गया है, जिस पर विवाद है.
क्या है हाइड्रोवर प्रोजेक्ट को लेकर विवाद?
चीन ने यारलुग त्संग्पो पर एक बड़ा डैम बनाने का काम शुरू किया है. काम पूरा होने के बाद नदी के पानी को रोकने और रिलीज करने की बड़ी शक्ति चीन के पास होगी. भारत ने जिस सियांग प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार की है ये चीन का जवाब माना जा रहा है. दरअसल सियांग पर डैम बनने के बाद भारत के पास भी पानी रोकने और रिलीज करने की ताकत होगी. ऐसे में अगर चीन ने अगर नदी का पानी रोका तो भारत इस डैम से अपनी जरूरतें पूरी कर सकेगा.
अगर चीन ने एकदम से पानी छोड़ दिया, तब भी इस डैम की मदद से रोककर भारत तबाही को बचा लेगा. हालांकि यहां आदिवासी इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं. उन्हें डर है कि उनके गांव और खेती की जमीन प्रभावित होगी. इसीलिए लगातार वहां प्रदर्शन हो रहा है जहां बार-बार हिंसक हो रहा है. एक दिन पहले ही यहां हिंसक प्रदर्शन हुए और पुलिस थाने, जीप और हाइड्रपोवर कंपनी NHPC के ऑफिस में तोड़फोड़ और आगजनी कर दी गई थी.
नदी के पीछे क्या हैं पौराणिक कथाएं
ब्रह्मपुत्र नदी के पीछे कई पौराणिक कथाएं हैं. कालिका पुराण के मुताबिक मुताबिक ऋषि शांतनु और उनकी पत्नी अमोघा के घर एक संतान का जन्म हुआ, जो साक्षात ब्रह्मा जी का अंश था. मगर वह पानी के रूप में था. ऋषि शांतनु ने उस दिव्य जल को चारों तरफ से पहाड़ों से घिरी एक जगह पर रख दिया. समय के साथ इसने विशाल झील का रूप ले लिया जिसे ब्रह्मकुंड कहा गया. पौराणिक कथा के मुताबिक जब परशुराम ने अपनी माता की हत्या की तो पाप से मुक्ति के लिए इसी कुंड में स्नान किया. उनके हाथ से जब फरसा छूट गया तो उन्होंने पहाड़ों को काटकर कुंड के पानी को रास्ता दिया, जिससे यह विशाल नदी धरती पर बहने लगी.ब्रह्मा का अंश होने की वजह से इसे नदी की बजाय नद माना गया.
सियांग भी पुल्लिंग नाम
अरुणाचल प्रदेश में जहां प्रोजेक्ट का विरोध हो रहा है, वहां इसे सियांग कहा जाता है. आदिवासी जनजाति की मान्यताओं के अनुसार सियांग का मतलब बड़ा होता है. आदिवासी इसे पितृसत्तात्मक संस्कृति का प्रतीक मानते हैं. नदी को वे एक परदाता या पूर्वज की तरह मानते हैं. जो इसे आने सियांग पुकारते हैं. सियांग का मतलब बड़ा या विशाल होता है जो नदी के रूप में परिभाषाषित करता है.
ब्रह्मपुत्र नदी (प्रतीकात्मक तस्वीर By- Unplash)
नदी की क्या है खासियतें?
- ब्रह्मपुत्र नदी मानसरोवर झील के पास आंग्सी ग्लेशियर से निकलती है.ये एशिया की सबसे लंबी नदी है जिसकी कुल लंबाई तकरीबन 3848 किमी तक है.
- इसके बीच में माजुली आईलैंड है, जहां लोग रहते हैं. यह दुनिया की अकेली पुरुष नदी है, इसे ये नाम इसके प्रवाह की वजह से दिया गया है.
- नदी जल प्रवाह के मामले में दुनिया की शीर्ष नदियों में हैं. असम में कहीं-कहीं इस नदी का पाट 10 से 20 किमी तक चौड़ा हो जाता है.
- मानसून के दौरान इस नदी में हर साल ही बाढ़ आती है, जिससे बड़े पैमाने पर तटों का कटाव होता है और लोग प्रभावित होते हैं.
- यह दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित सबसे बड़ी नदी है, जो समुद्र तल से तकरीबन 5150 मीटर है.