अस्पतालों पर बमबारी, डॉक्टरों को धमकी… युद्ध के बीच WMA ने क्या कहा?

अस्पतालों पर बमबारी, डॉक्टरों को धमकी… युद्ध के बीच WMA ने क्या कहा?


एक्सप्लेनर | दुनिया भर के चिकित्सकों ने युद्ध और हिंसा के बीच अस्पतालों, एंबुलेंस और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन WMA ने 10 अक्टूबर 2026 को अपनी महासभा में ‘डिक्लेरेशन ऑफ रॉटरडैम ऑन द प्रोटेक्शन ऑफ मेडिकल न्यूट्रैलिटी’ को सर्वसम्मति से स्वीकार किए जाने के बाद सभी संघर्षरत पक्षों से चिकित्सा सेवाओं की सुरक्षा करने की अपील दोहराई है.
WMA ने कहा कि गाजा, लेबनान, सूडान, ईरान, यूक्रेन, म्यांमार, सीरिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य सहित संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा तटस्थता के सिद्धांतों के संभावित उल्लंघन को लेकर वह गंभीर रूप से चिंतित है. संगठन ने स्पष्ट किया कि मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों को हमलों, धमकियों, दबाव और हस्तक्षेप से बचाना जरूरी है.

अस्पतालों पर हमले अब भी जारी
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2286 को अपनाए जाने के दस साल बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं पर हमले व्यापक स्तर पर जारी हैं. अस्पतालों पर बमबारी की जाती है, एंबुलेंस का रास्ता रोका जाता है और मरीजों का इलाज करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को धमकियों, हिरासत, यातना और हत्या का सामना करना पड़ता है.

WMA के अध्यक्ष डॉ. जंग युल पार्क ने कहा, “डॉक्टरों को संघर्ष में उनकी भूमिका चाहे जो भी हो, मरीजों का इलाज करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए. उन्हें प्रतिबंधों, डराने-धमकाने या हस्तक्षेप का डर नहीं होना चाहिए.”

उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चिकित्सा सेवा देते समय डॉक्टरों या दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है. ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.

क्या है मेडिकल न्यूट्रैलिटी?
मेडिकल न्यूट्रैलिटी यानी चिकित्सा तटस्थता का मतलब है कि डॉक्टर और दूसरे स्वास्थ्यकर्मी मरीज की जरूरत के आधार पर उसका इलाज करें. मरीज की उम्र, बीमारी, दिव्यांगता, धर्म, जातीय मूल, लिंग, राष्ट्रीयता, राजनीतिक जुड़ाव, नस्ल, संस्कृति, यौन रुझान, सामाजिक स्थिति या किसी अन्य आधार पर उसके साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए.

WMA की अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा नैतिकता संहिता के मुताबिक, डॉक्टरों का कर्तव्य है कि वे निष्पक्ष और न्यायसंगत तरीके से चिकित्सा सेवा दें और मरीज की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को प्राथमिकता दें. इसे चिकित्सा निष्पक्षता कहा जाता है.

चिकित्सा तटस्थता में डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों का मरीजों को निष्पक्ष इलाज देने का कर्तव्य शामिल है. इसके साथ ही राज्यों, संबंधित अधिकारियों और संघर्ष में शामिल पक्षों की जिम्मेदारी है कि स्वास्थ्य सेवाएं सुरक्षित, स्वतंत्र और बिना किसी हमले, धमकी, दबाव या रुकावट के जारी रह सकें.

WMA की घोषणा के मुताबिक, डॉक्टर हर समय चिकित्सा तटस्थता के सिद्धांतों से बंधे होते हैं और उन्हें इसका संरक्षण भी मिलना चाहिए.

हालांकि, चिकित्सा तटस्थता का मतलब यह नहीं है कि डॉक्टर या चिकित्सा संस्थान संघर्ष के दौरान राजनीतिक रूप से तटस्थ रहें. डॉक्टरों को राजनीतिक विचार रखने का अधिकार है, लेकिन मरीजों का इलाज निष्पक्ष तरीके से करना उनका पेशेवर दायित्व है.

डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों, चिकित्सा कर्मियों या स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के संभावित उल्लंघनों का दस्तावेजीकरण करने और उनकी जानकारी देने का अधिकार है. जहां नैतिक या कानूनी रूप से जरूरी हो, वहां ऐसा करना उनकी जिम्मेदारी भी हो सकती है.

अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत क्या है सुरक्षा?
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (IHL) ऐसे नियमों का समूह है, जिनका उद्देश्य मानवीय आधार पर सशस्त्र संघर्ष के प्रभावों को सीमित करना है. इसमें 1949 के जिनेवा कन्वेंशन, 1977 के अतिरिक्त प्रोटोकॉल और अंतरराष्ट्रीय प्रथागत कानून शामिल हैं. जिनेवा कन्वेंशन को सभी देशों ने स्वीकार किया है और ये सार्वभौमिक रूप से लागू होते हैं.

युद्ध के दौरान चिकित्सा कर्मियों और स्वास्थ्य सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत संरक्षण मिलता है. रेड क्रॉस, रेड क्रिसेंट और रेड क्रिस्टल जैसे विशेष चिह्न चिकित्सा सेवाओं की पहचान करने में मदद करते हैं. हालांकि, अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं को मिलने वाला संरक्षण इन चिह्नों के इस्तेमाल पर निर्भर नहीं करता.

WMA ने कहा कि संघर्ष वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधे और जानबूझकर हमले किए जाने के मामले सामने आते रहे हैं. ये अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन हैं.

घोषणा में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं पर हमले केवल बमबारी या गोलीबारी तक सीमित नहीं हैं. इनमें साइबर हमले, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल और जरूरी चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति रोकना भी शामिल है. चिकित्सा तटस्थता का उल्लंघन स्वास्थ्यकर्मियों की मनमानी गिरफ्तारी, मुकदमा चलाने, हिरासत में रखने, यातना देने या उनके साथ दुर्व्यवहार के रूप में भी हो सकता है.

घायल सैनिकों का इलाज करने पर डॉक्टरों को धमकियां
सशस्त्र संघर्ष के दौरान डॉक्टरों पर विशेष दबाव पड़ सकता है. संघर्ष में शामिल पक्ष उनसे अपने सैनिकों को प्राथमिकता देने या विरोधी पक्ष के सैनिकों का इलाज नहीं करने की मांग कर सकते हैं. विरोधी पक्ष के घायलों का इलाज करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को बदले की कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है. WMA ने कहा कि चिकित्सा सेवाओं का गलत इस्तेमाल करने से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत उन्हें मिलने वाला संरक्षण कमजोर होता है.

घोषणा के मुताबिक, कुछ सीमित परिस्थितियों में स्वास्थ्य सुविधाएं और चिकित्सा कर्मी अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत अपना विशेष संरक्षण खो सकते हैं, यदि उनका इस्तेमाल दुश्मन को नुकसान पहुंचाने वाले कामों के लिए किया जाए. लेकिन इसके बावजूद संघर्ष में शामिल पक्षों को कानून का पालन करना जरूरी है.

WMA ने चिंता जताई कि कई बार स्वास्थ्य सेवाओं पर हमले करने से पहले उन्हें दुरुपयोग रोकने के लिए जरूरी चेतावनी नहीं दी जाती. इसके अलावा, हमलों के दौरान सावधानी, सैन्य और नागरिक लक्ष्यों के बीच अंतर तथा आनुपातिकता के सिद्धांतों का भी ठीक से पालन नहीं किया जाता.

संगठन ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिकित्सा तटस्थता को लेकर गलत धारणाएं, गलत जानकारी और जानबूझकर फैलाई जाने वाली भ्रामक जानकारी मौजूद हैं. संघर्ष में शामिल पक्ष कई बार अपनी सेनाओं को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और स्वास्थ्य सेवाओं को मिलने वाले संरक्षण के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं देते.

WMA के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्वास्थ्य सेवाओं पर हमले करने वालों को जवाबदेह ठहराने में नाकाम रहा है. संघर्ष में शामिल पक्ष भी कई बार अपने उन सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते, जिन्होंने इन कानूनों का उल्लंघन किया है.

WMA ने सभी संघर्षरत पक्षों से क्या मांग की?
रॉटरडैम में आयोजित WMA की 77वीं महासभा में अक्टूबर 2026 में स्वीकार की गई घोषणा में संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पूरी तरह पालन करने की अपील की गई है.

संगठन ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  • चिकित्सा तटस्थता का हर समय सम्मान किया जाए, ताकि डॉक्टर मरीजों की भूमिका या संघर्ष में उनकी स्थिति की परवाह किए बिना इलाज कर सकें. स्वास्थ्यकर्मियों को प्रतिबंधों, धमकियों या हस्तक्षेप के डर के बिना अपने नैतिक और पेशेवर दायित्व निभाने की स्वतंत्रता मिले.
  • रेड क्रॉस, रेड क्रिसेंट और रेड क्रिस्टल जैसे विशेष चिह्नों का सम्मान किया जाए. स्वास्थ्य सुविधाओं का सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल न हो और उन्हें हमलों का निशाना न बनाया जाए.
  • सभी मरीजों को सुरक्षित और बिना रुकावट स्वास्थ्य सेवाओं तथा इलाज तक पहुंच मिले.
  • जरूरी दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और अन्य आवश्यक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए.

जिन स्वास्थ्यकर्मियों को किसी भी व्यक्ति, यहां तक कि विरोधी पक्ष के लड़ाकों का इलाज करने के कारण गिरफ्तार किया गया है, हिरासत में रखा गया है या दंडित किया गया है, उन्हें बिना शर्त तुरंत रिहा किया जाए और आरोपों से मुक्त किया जाए. पेशेवर चिकित्सा नैतिकता के अनुरूप इलाज करने के लिए उन पर मुकदमा न चलाया जाए और न ही उन्हें दंडित किया जाए.

सरकारों और सेनाओं की भी जिम्मेदारी तय
WMA ने राज्यों और संबंधित अधिकारियों से कहा है कि वे अपने राष्ट्रीय कानूनों को स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा और उन तक पहुंच सुनिश्चित करने से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप बनाएं. सरकारों को स्वास्थ्य पेशे से जुड़े संगठनों के सहयोग से चिकित्सा कर्मियों को संघर्ष के दौरान उनके नैतिक दायित्वों और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के बारे में विशेष प्रशिक्षण देना चाहिए.

सेनाओं को भी अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों, खासकर स्वास्थ्य सेवाओं को मिलने वाले संरक्षण, के बारे में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए.

WMA ने स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करने वाले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. ऐसी जांच राष्ट्रीय कानूनों के तहत होनी चाहिए और जहां जरूरी हो, मामलों को अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही तंत्र के सामने भी ले जाना चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र से विशेष प्रतिवेदक नियुक्त करने की मांग
WMA ने संयुक्त राष्ट्र से सशस्त्र संघर्ष और हिंसा की अन्य परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा के लिए एक विशेष प्रतिवेदक (Special Rapporteur) नियुक्त करने की मांग की है.

संगठन ने संयुक्त राष्ट्र से यह भी कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं पर हमले करने या हमले की धमकी देने वाले सभी सदस्य देशों और सशस्त्र समूहों के नाम संबंधित संयुक्त राष्ट्र रिपोर्टों में शामिल किए जाएं. ऐसा करते समय राजनीतिक विचारों या सदस्य देशों के दबाव को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए.

WMA ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. जहां अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) का अधिकार क्षेत्र लागू होता है, वहां उसके माध्यम से जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए. इसके अलावा, अन्य सक्षम अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही तंत्रों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

संगठन ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के गंभीर उल्लंघनों, यानी युद्ध अपराधों के आरोपियों पर सक्षम राष्ट्रीय या क्षेत्रीय अदालतों में मुकदमा चलाया जाना चाहिए. जहां लागू हो, ऐसे मामलों को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के पास भेजा जा सकता है.



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