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Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर सास की ओर से बहू को सर्गी देने की परंपरा है, लेकिन जिन महिलाओं की सास नहीं हैं, उनके मन में अक्सर सवाल रहता है कि वे सर्गी किससे लें और क्या इसके बिना व्रत पूरा होगा. ज्योतिषी अखिलेश पांडेय के अनुसार, सर्गी सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि प्यार और आशीर्वाद का प्रतीक है. अगर सास नहीं हैं, तो महिलाएं अपनी मां, ननद, जेठानी या परिवार की किसी दूसरी बड़ी महिला से सर्गी ले सकती हैं. यहां तक कि सर्गी देने वाला कोई न हो, तो वे खुद भी अपने लिए सर्गी तैयार कर सकती हैं. इसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे और दूसरी खाने-पीने की चीजें रखी जाती हैं.
ऋषिकेश: करवा चौथ पर सर्गी का खास महत्व होता है. इस दिन सास अपनी बहू को सर्गी देती हैं, जिसे खाकर महिलाएं अपने व्रत की शुरुआत करती हैं. सर्गी में खाने-पीने की चीजों के साथ सुहाग का सामान भी दिया जाता है. लेकिन जिन महिलाओं की सास नहीं हैं, उनके मन में अक्सर सवाल आता है कि उन्हें सर्गी कौन देगा और क्या इसके बिना व्रत पूरा माना जाएगा?
सास न हो तो कौन दे सकता है सर्गी?
अगर किसी महिला की सास नहीं हैं, तो उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है. ऐसी महिलाएं अपनी मां से सर्गी ले सकती हैं. इसके अलावा परिवार में ननद, जेठानी या किसी दूसरी बड़ी महिला से भी सर्गी लेने की परंपरा हो सकती है. अगर कोई सर्गी देने वाला नहीं है, तो महिला किसी दूसरी सुहागिन महिला से सर्गी ले सकती है या खुद भी अपने लिए सर्गी तैयार कर सकती है.
सर्गी में क्या-क्या रखा जाता है?
करवा चौथ की सर्गी में आमतौर पर फल, मिठाई, सूखे मेवे, मठरी, नारियल, फेनिया और सात्विक खाना रखा जाता है. इसके अलावा सास अपनी बहू को कपड़े, चूड़ियां और श्रृंगार का सामान भी देती हैं. सर्गी में रखी जाने वाली चीजें परिवार की परंपरा और सुविधा के हिसाब से अलग-अलग हो सकती हैं. महिलाएं सुबह जल्दी उठकर सर्गी खाती हैं, ताकि दिनभर के व्रत से पहले कुछ खा सकें. शास्त्रों के अनुसार, सर्गी सूर्योदय से पहले खाई जाती है. महिलाएं आमतौर पर सुबह 4 से 5 बजे के बीच उठकर सर्गी खाती हैं. इसके बाद उनका व्रत शुरू हो जाता है. इसलिए सर्गी सूर्योदय से पहले ही खा लेनी चाहिए. करवा चौथ पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती हैं.