नैनीताल की झील में गिर जाए मोबाइल तो याद आएंगे पप्पू, 15 फीट गहराई में उतरकर मिनटों में निकाल लाते हैं फोन

नैनीताल की झील में गिर जाए मोबाइल तो याद आएंगे पप्पू, 15 फीट गहराई में उतरकर मिनटों में निकाल लाते हैं फोन


नैनीताल: उत्तराखंड का नैनीताल अपनी खूबसूरत वादियों, प्राकृतिक नजारों और विश्व प्रसिद्ध नैनीझील के लिए जानी जाती है. यहां हर साल हजारों पर्यटक घूमने और झील में नौकायन का आनंद लेने पहुंचते हैं, लेकिन कई बार नाव में बैठकर खूबसूरत नजारों को कैमरे में कैद करने के दौरान पर्यटकों का मोबाइल फोन गलती से झील में गिर जाता है. ऐसे में लोगों को अपना महंगा फोन खोने का दुख सताने लगता है. हालांकि, नैनीताल में एक शख्स ऐसा भी है, जो झील की गहराइयों में उतरकर पर्यटकों के खोए मोबाइल वापस निकालने की कोशिश करता है. इनका नाम है पप्पू, जो पिछले 10 से 12 वर्षों से इस काम में जुटे हुए हैं.

नैनीताल में नाव चलाने वाले पप्पू मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के रहने वाले हैं. वह पिछले करीब 10 से 12 वर्षों से नैनीताल में रहकर नाव चलाने के साथ ही नैनीझील में गिरे मोबाइल और दूसरे जरूरी सामान तलाशने का काम कर रहे हैं. पप्पू के मुताबिक, बचपन से ही उन्हें तैराकी का शौक रहा है. उन्होंने गंगा नदी में तैराकी का अनुभव हासिल किया, जिसका फायदा उन्हें नैनीझील में काम करते समय मिलता है.

अब तक 500 से ज्यादा मोबाइल निकाल चुके हैं पप्पू

पप्पू बताते हैं कि अगर किसी पर्यटक का मोबाइल झील में गिर जाता है और उसे यह जानकारी होती है कि फोन किस जगह पर गिरा है, तो उसे तलाशना आसान हो जाता है. वह पानी में करीब 10 से 15 फीट की गहराई तक उतरकर मोबाइल खोजने की कोशिश करते हैं. सही जगह का पता चलने पर कई बार वह कुछ ही मिनटों में फोन बाहर निकाल लाते हैं. नैनीझील में मोबाइल तलाशने का हुनर अब पप्पू की खास पहचान बन चुका है. उनके मुताबिक, वह पिछले कई वर्षों में झील से 500 से अधिक मोबाइल फोन निकाल चुके हैं.

झील में नौकायन के दौरान पर्यटकों के फोन गिरने की घटनाएं होती रहती हैं. ऐसे में जब लोगों को अपना मोबाइल वापस मिलने की उम्मीद कम नजर आती है, तब वे पप्पू की मदद लेने पहुंचते हैं. पप्पू बताते हैं कि नैनीझील के अलग-अलग हिस्सों में उन्होंने कई मोबाइल तलाशे हैं. हालांकि, मोबाइल निकालने के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि फोन किस स्थान पर पानी में गिरा था, इसकी सही जानकारी मिल सके. यदि गिरने की जगह का पता नहीं हो, तो पानी के भीतर मोबाइल तलाशना मुश्किल हो सकता है.

ठंडे पानी में मोबाइल निकालना आसान नहीं
नैनीताल में मौसम बदलने के साथ नैनीझील के पानी का तापमान भी कम होने लगता है. खासकर सर्दियों में झील के ठंडे पानी में उतरकर मोबाइल निकालना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. पप्पू के मुताबिक, ज्यादा ठंड होने पर पानी के भीतर उतरना और मोबाइल तलाशना मुश्किल होता है. वहीं, धूप निकलने और मौसम अनुकूल रहने पर उन्हें इस काम में अपेक्षाकृत आसानी होती है. पानी में उतरकर मोबाइल तलाशने के लिए शारीरिक क्षमता और तैराकी के अनुभव की जरूरत होती है. पप्पू का कहना है कि बचपन से गंगाजी में तैराकी करने के कारण उन्हें इस काम में मदद मिलती है. हालांकि, हर बार मोबाइल मिल ही जाए, इसकी गारंटी परिस्थितियों पर निर्भर करती है.

मोबाइल निकालने पर मिलता है इनाम
पप्पू के इस काम से पर्यटकों को राहत मिलती है. अपना खोया हुआ मोबाइल वापस मिलने पर कई पर्यटक उन्हें इनाम के तौर पर पैसे देकर जाते हैं. पप्पू बताते हैं कि ठंडे पानी में उतरकर मोबाइल निकालने पर उन्हें कभी-कभी 2,000 से 3,000 रुपये तक का इनाम भी मिल जाता है. हालांकि, यह राशि पर्यटकों की ओर से खुशी से दी जाती है. उनके मुताबिक, नैनीझील में मोबाइल तलाशने के लिए अक्सर पर्यटक खुद उन्हें ढूंढते हुए पहुंचते हैं, फोन किस जगह गिरा है, यह पता होने पर वह उसे खोजने का प्रयास करते हैं. नैनीताल आने वाले पर्यटकों के लिए नैनीझील में मोबाइल गिरना किसी परेशानी से कम नहीं है. महंगे फोन में लोगों की यादें, तस्वीरें और जरूरी जानकारियां भी होती हैं, ऐसे में फोन वापस मिलने की उम्मीद उनके लिए बड़ी राहत बन जाती है.



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