पश्चिम चंपारण के किसान ने मशरूम खेती से बदली तकदीर, लागत से तीन गुना मुनाफा
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पश्चिम चंपारण के एक किसान ने मशरूम की खेती से अपनी तकदीर बदल ली है. बटन मशरूम की खेती में लागत बहुत कम आती है. इससे लागत से तीन गुना तक मुनाफा कमाया जा सकता है. बाजार में इसकी भारी मांग है. जिससे किसानों को लाखों रुपये की बंपर कमाई हो रही है.
पश्चिम चंपारणः मशरूम की फार्मिंग तो सब करना चाहते हैं, लेकिन इसमें आने वाली लागत, होने वाले नुकसान और उपलब्ध बाज़ार की जानकारी के आभाव में ज्यादातर लोग बीच में ही हार मान लेते हैं. हालांकि मशरूम की फार्मिंग में बड़ा मुकाम हासिल करने वाले व्यवसायियों का कहना है कि न तो इसमें अधिक लागत की समस्या है और न ही नुकसान का चिंता.जहां तक बात बाज़ार की है, तो बिहार सहित आस पास के ज्यादातर राज्यों के बाज़ारों में इसकी डिमांड भी हर वक्त बनी रहती है.
उपेंद्र बताते हैं कि बटन मशरूम की फार्मिंग के लिए एक किलो कंपोस्ट बनाने में लगभग 10 से 12 रुपए का खर्च आता है. व्यवसायिक रूप से फार्मिंग के लिए तैयार किए जाने वाले एक बैग का वजन 10 किलो होता है, इस प्रकार इसमें आने वाली लागत 100 से 120 रुपए होती है.जहां तक बात इससे होने वाले उत्पादन और उससे होने वाली आमदनी की है, तो एक बैग से औसतन दो किलो बटन मशरूम की उपज होती है, जिसकी बाज़ार में औसत कीमत 150 रुपए प्रति किलो होती है.
एक बैग से 300 रुपए की कमाई
इस प्रकार हार्वेस्टिंग के बाद एक बैग से लगभग 300 रुपए की कमाई होती है, जबकि लागत सिर्फ 120 रुपए तक की आती है. उपेंद्र ने एक क्लस्टर में मशरूम के 1600 बैग्स को रखा है. जिससे हर 40 दिन पर लगभग 3000 किलो तक मशरूम की हार्वेस्टिंग संभव हो पाती है.मजे की बात यह है कि उनके पास ऐसे 8 क्लस्टर की सुविधा है, जिनमें लगभग एक समान संख्या में मशरूम के बैग्स भरे गए हैं.
नुकसान और फलन के हर हिसाब को छांट कर भी यदि लाभ की बात की जाए तो, हार्वेस्टिंग के एक चक्र से उपेंद्र को 12 टन तक मशरूम की प्राप्ति होती है. जिसे बाज़ार में मिनिमम 150 रुपए प्रति किलो की दर से बेचते हैं. बेतिया के स्थानीय बाजारों के अतिरिक्त पूर्वी चम्पारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, सिवान और पटना सहित यूपी के कई जिलों में भारी डिमांड होने की वजह से कुछ ही दिनों में ब्रिकी पूरी हो जाती है. जिससे एक चक्र में ही उपेंद्र को 17 लाख रुपए से भी अधिक की आमदनी का मौका मिल जाता है.