4 बीघे से 20 बीघे तक फैला मछली पालन, जहानाबाद के नरेंद्र पाल ने ऐसे बढ़ाया काम
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Jehanabad Fish Farmer Success Story: जहानाबाद के नरेंद्र सिंह ने मत्स्य विभाग की मदद से मछली पालन शुरू किया. उन्होंने चार साल में इस काम को 4 बीघा से 20 बीघा तक फैलाया. वे तालाब और बायोफ्लॉक विधि से मछली पालन कर रहे हैं और कई बार नुकसान होने के बावजूद अच्छी कमाई करते हैं.
जहानाबाद. कई लोग ऐसे होते हैं जो नौकरी की जगह व्यापार करके पैसा कमाना चाहते हैं लेकिन पूंजी की समस्या होती है. मछली पालन भी ऐसा ही काम है और इसके महत्व के बारे में जितना कहा जाए कम है. हालांकि समय के साथ चीजें बदली हैं और सरकार ऐसे लोगों की मदद के लिए कई सारी स्कीम चला रही है. इन योजनाओं की मदद से कई ऐसे लाभार्थी हैं, जिन्होंने फायदा लेकर अपने बिजनेस की शुरुआत की है. उन्हीं में से एक हैं – जहानाबाद के मोदनगंज प्रखंड के मननपुर गांव के रहने वाले नरेंद्र सिंह.
नरेंद्र मत्स्य विभाग से योजना का लाभ लेकर मछली पालन कर रहे हैं. 4 साल पहले मछली पालन शुरू किया और अभी 4 बीघा जमीन से शुरुआत की. इस तरह से मेहनत के बलबूते मछली पालन का दायरा बढ़ाकर 20 बीघा तक कर लिया. वह न सिर्फ तालाब में ही मछली पालन का कार्य कर रहे हैं, बल्कि बायोफ्लॉक में भी फिश फार्मिंग कर रहे हैं.
मछली पालन ने बदली किस्मत
जानकारी के अनुसार, नरेंद्र सिंह पांगेसियस, आईएमसी, सिंघी और देसी मांगुर मछलियां तालाब और बायोफ्लॉक में रखे हुए हैं. इस तरह से जासर का दो कल्चर निकालते हैं तो अन्य मछलियों का एक कल्चर प्राप्त कर रहे हैं. उनका मानना है कि अगर आप मछली पालन कर रहे हैं तो आपको हमेशा तैयार रहना होगा. कभी-कभी नुकसान भी उठाना पड़ता है.
ठंड का मौसम घातक होता है. दवाई से अन्य ट्रीटमेंट करने के बाद भी कई बार मछली मर जाती है. इससे मछली पालक को बड़ा घाटा होता है. ऐसे में हमेशा सतर्क रहना पड़ता है. कमाई की बात करें तो 4 बीघा में फिश फार्म है तो हर साल ₹1000000 तक की कमाई हो सकती है.
4 बीघा से 20 बीघा कर लिया मछली का तालाब
नरेंद्र ने लोकल 18 से कहा, ‘हम बेरोजगार बैठे थे. कुछ समझ नहीं आ रहा था. जिम्मेदारी बढ़ती जा रही थी तो ऐसे में हमारे पास कुछ जमीन थी. इसके बाद हमने मछली पालन का आइडिया लेकर कार्य करना शुरू कर दिया. विभाग से योजना का लाभ भी उठाया. इस तरह से हमारे कार्य की शुरुआत 4 साल पहले हुई. हम अभी 4 बीघा तालाब से 20 बीघा तालाब विस्तार कर चुके हैं. बहुत रिस्क है, लेकिन क्या ही कर सकते हैं?
काम करना है तो करते हैं. पिछले वर्ष ही ठंड में 30000 मछलियां मर गई थीं. इससे बड़ा झटका लगा था. हालांकि, फिर भी एक कल्चर से ही अच्छी कमाई हो गई थी.’ इस प्रकार काम में खतरा है तो फायदा भी है. धीरे-धीरे अनुभव बढ़ने के साथ मछली पालक समस्याओं का सफलतापूर्वक निस्तारण कर लेते हैं. यही वजह है कि नरेंद्र जैसे मत्सय पालकों का काम छोटी शुरुआत से यहां तक पहुंचा है.