Gola Gokarnanath Mandir: इस मंदिर को कहा जाता है छोटी काशी, दूर-दूर से आते हैं भक्त, रावन से है कनेक्शन

Gola Gokarnanath Mandir: इस मंदिर को कहा जाता है छोटी काशी, दूर-दूर से आते हैं भक्त, रावन से है कनेक्शन


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Gola Gokarnanath Mandir: उत्तर प्रदेश के काशी नरेश के बारे में तो आप जानते ही होंगे. लेकिन क्या आपको पता है यहां काशी में एक छोटा काशी भी बसता है? जानें महादेव को समर्पित गोला गोकर्णनाथ मंदिर के बारे में, जिसके बारे में मान्यता है कि भगवान शिव को यहां रावन लेकर आया था. यहां एक कुंड भी है, जहां श्रद्धालु स्नान करने के बाद भगवान के दर्शन करते हैं.

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Gola Gokarnanath Mandir: उत्तर प्रदेश के गोला गोकर्णनाथ को छोटी काशी के नाम से जाना जाता है. ये स्थान भगवान शिव के प्रसिद्ध मंदिर और अद्भुत शिवलिंग के लिए विशेष पहचान रखता है. मान्यता है कि यहां भगवान शिव की स्थापना रावण से जुड़ी एक पौराणिक कथा के कारण हुई थी. यही वजह है कि इस मंदिर में दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.

मंदिर परिसर में भगवान गोकर्णनाथ के अलावा मां काली, मां दुर्गा और काशी विश्वनाथ के भी दर्शन किए जा सकते हैं. यहां स्थित प्राचीन कुंड का भी धार्मिक महत्व बताया जाता है. श्रद्धालु कुंड में स्नान करने के बाद भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना करते हैं. आइए जानते हैं छोटी काशी के इस प्रसिद्ध मंदिर की खासियत और इससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में.

मंदिर में विराजमान मां काली और मां दुर्गा
गोकर्णनाथ मंदिर में भगवान शिव के दर्शन करने के बाद भक्त अन्य देवी-देवताओं के दर्शन भी करते हैं. यहां काले पत्थर से बनी मां काली की विशाल प्रतिमा स्थापित है. माता की आठ भुजाएं हैं और वे लाल वस्त्रों से सुसज्जित दिखाई देती हैं. माता के गले में कपालों की माला भी दिखाई देती है. मंदिर परिसर में मां दुर्गा की प्रतिमा भी विराजमान है. इसके अलावा यहां भगवान काशी विश्वनाथ के लिंग स्वरूप के दर्शन किए जा सकते हैं.

छोटी काशी के शिवलिंग की क्या है खासियत?
छोटी काशी के नाम से जाने जाने वाला गोला गोकर्णनाथ मंदिर का शिवलिंग अपने स्वरूप और पौराणिक महत्व के कारण अद्वितीय है. स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव का इस स्थान पर विराजमान होना रावण से जुड़ी कथा से संबंधित है. कहा जाता है कि रावण भगवान शिव को यहां लेकर आया था. एक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव के क्रोधित होने पर उन्हें अंगूठे से दबाया गया और वे इसी स्थान पर स्थापित हो गए.

प्राचीन कुंड में स्नान के बाद करते हैं दर्शन
गोकर्णनाथ मंदिर के पास स्थित प्राचीन कुंड का भी विशेष महत्व माना जाता है. यहां आने वाले कई श्रद्धालु कुंड में स्नान करने के बाद भगवान शिव के दर्शन करते हैं. भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने पर भगवान उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

श्रद्धालुओं के लिए खास है छोटी काशी
गोला गोकर्णनाथ की धार्मिक पहचान केवल मंदिर तक सीमित नहीं है. यहां का वातावरण, प्राचीन परंपराएं और भगवान शिव के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा इस स्थान को खास बनाती हैं. सड़क या हवाई मार्ग से यहां पहुंचने वाले यात्रियों को आसपास के क्षेत्र में जंगल भी दिखाई देते हैं. यही वजह है कि यह धार्मिक स्थल आस्था के साथ-साथ अपनी प्राकृतिक विशेषताओं के लिए भी जाना जाता है.



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