पटना. शरद पूर्णिमा का पर्व धार्मिक आस्था, प्रेम और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा की रोशनी का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान के नीचे खीर रखने और सुबह खाने से वह अमृत का रूप हो जाती है. साथ ही मां लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस खास अवसर पर पति द्वारा पत्नी को 16 श्रृंगार की सामग्री भेंट करना भी प्रेम, विश्वास और वैवाहिक रिश्ते की मधुरता से जोड़कर देखा जाता है.
पत्नी को 16 श्रृंगार भेंट करने की है खास मान्यता
ज्योतिषाचार्य पंडित ओम तिवारी ने बताया कि शरद पूर्णिमा के दिन पति अपनी पत्नी के लिए 16 श्रृंगार की सामग्री खरीदकर भेंट कर सकते हैं. मान्यता है कि इस दिन प्रेमपूर्वक दिया गया उपहार पति-पत्नी के रिश्ते में स्नेह और विश्वास को मजबूत करने का प्रतीक बन सकता है. इसी तरह प्रेमी-प्रेमिका भी एक-दूसरे को श्रृंगार की सामग्री भेंट कर अपने प्रेम का इजहार कर सकते हैं.
इस परंपरा का भाव केवल उपहार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने जीवनसाथी को सम्मान देने, उनकी खुशियों का ख्याल रखने और रिश्ते में अपनापन बढ़ाने से भी जुड़ा है. इस दिन पति अपनी पत्नी को बाहर घुमाने ले जा सकते हैं, साथ में भोजन कर सकते हैं या उनकी पसंद का कोई छोटा-सा उपहार देकर दिन को खास बना सकते हैं.
मां लक्ष्मी को प्रिय मानी जाती है शरद पूर्णिमा
हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी की आराधना के लिए विशेष दिन माना जाता है. इस दिन कोजागरी पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस रात्रि मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और उनकी आराधना करने वाले भक्तों पर कृपा करती हैं.
उन्होंने आगे बताया कि धार्मिक कथाओं में पति को भगवान विष्णु और पत्नी को मां लक्ष्मी का स्वरूप मानने की परंपरा भी मिलती है. इसी भाव के आधार पर कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन पत्नी को प्रसन्न रखना, उनका सम्मान करना और उनके प्रति प्रेम व्यक्त करना शुभ माना जाता है. हालांकि, ये धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं, जिनका उद्देश्य परिवार में प्रेम, सद्भाव और खुशहाली को बढ़ावा देना है.
पूर्णिमा तिथि का क्यों है विशेष महत्व?
हिंदू पंचांग में पूर्णिमा तिथि को पूर्णता और धार्मिक साधना से जोड़कर देखा जाता है. अक्षय तृतीया और विजयादशमी की तरह कुछ तिथियों को धार्मिक परंपराओं में विशेष शुभ माना गया है. शरद पूर्णिमा भी इन्हीं महत्वपूर्ण पर्वों में शामिल है. इस दिन भक्त मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं. कई स्थानों पर व्रत रखा जाता है और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है.
शरद पूर्णिमा की रात खीर खुले आसमान में रखने की परंपरा
शरद पूर्णिमा की सबसे चर्चित परंपराओं में से एक है रात में खीर बनाकर उसे खुले आसमान के नीचे रखना. पंडित ओम तिवारी बताते हैं कि इस रात चंद्रमा की किरणों से खीर में अमृततुल्य गुण समाहित हो जाते हैं. इसी कारण कई परिवार रातभर खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखकर अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. मान्यता के अनुसार, चावल और दूध से खीर तैयार की जाती है. इसमें केसर, मेवे और अन्य सामग्री मिलाई जा सकती है. इसके बाद भगवान विष्णु और चंद्रमा को भोग अर्पित कर खीर को खुले स्थान पर रखा जाता है.
शरद पूर्णिमा पर इन बातों का रखें ध्यान
शरद पूर्णिमा को केवल पूजा-पाठ तक सीमित रखने के बजाय परिवार और रिश्तों के लिए भी खास बनाया जा सकता है. इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें, अपनी परंपरा के अनुसार व्रत रखें और जरूरतमंदों की सहायता करें. जीवनसाथी को समय देना, उनकी भावनाओं को समझना और आपसी विश्वास को मजबूत करना भी इस पर्व के संदेश को सार्थक बना सकता है.
खीर को खुले स्थान पर रखते समय उसे साफ और ढके हुए जालीदार बर्तन में रखें, ताकि धूल-मिट्टी और कीड़े-मकोड़ों से बचाव हो सके. देर तक बाहर रखे दूध से बने पकवानों को खाने से पहले उनकी सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है.