दशहरा खत्म होने के बाद भी पंडाल में ही विराजमान है मां दुर्गा की प्रतिमा, पूजा समिति का सवाल- ये कैसी है व्यवस्था?

दशहरा खत्म होने के बाद भी पंडाल में ही विराजमान है मां दुर्गा की प्रतिमा, पूजा समिति का सवाल- ये कैसी है व्यवस्था?


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Godda Maa Durga Idol Immersion dispute: देशभर में दशहरा खत्म हो गया, मां दुर्गा की प्रतिमाएं विसर्जित हो गईं, लेकिन गोड्डा जिले के प्रसिद्ध काली पीठ में मां दुर्गा आज भी पंडाल में विसर्जन का इंतजार कर रही हैं. पूजा खत्म होने के बाद भी प्रतिमा अनाथों की तरह पड़ी है. मंदिर कमेटी का आरोप है कि प्रशासन के Ego की वजह से विसर्जन नहीं हो पा रहा है. सवाल उठ रहा है, क्या हेमंत सरकार का प्रशासन सनातन विरोधी हो गया है, मंदिर में पड़ी मूर्ति का विसर्जन क्यों नहीं?

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गोड्डा में मां दुर्गा प्रतिमा विसर्जन पर विवाद, मंदिर कमेटी का आरोप- प्रशासन के फैसले से फंसा मामला

गोड्डा. बीते 21 अक्टूबर को देशभर में दशहरा के बाद मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन हो चुका है, लेकिन झारखंड के गोड्डा में एक दुर्गा प्रतिमा अब भी पंडाल में विराजमान है. प्रसिद्ध कालीपीठ में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन का इंतजार कर रही है. मंदिर कमेटी का आरोप है कि जिला प्रशासन ने पहले राजकचहरी तालाब में विसर्जन की अनुमति दी, लेकिन बाद में अपना फैसला बदल दिया. अब कमेटी के सामने प्रतिमा को विसर्जित करने की जगह और वहां तक पहुंचने के रास्ते की समस्या है. इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है. भाजपा ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए हैं, जबकि मंदिर कमेटी का कहना है कि विवाद का समाधान नहीं होने से मां दुर्गा की प्रतिमा पंडाल में ही रुकी हुई है.

बता दें कि गोड्डा के प्रसिद्ध कालीपीठ में पिछले चार वर्षों से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है. इस बार पूजा के बाद भी मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन नहीं हो सका है. मंदिर कमेटी के अनुसार, प्रशासन ने विसर्जन के लिए 22 अक्टूबर की तारीख तय की थी और राजकचहरी तालाब को विसर्जन स्थल के रूप में निर्धारित किया था. कमेटी के सदस्यों ने इसी आदेश के आधार पर विसर्जन की तैयारी शुरू कर दी थी. लेकिन कुछ दिनों बाद प्रशासन ने अपना फैसला बदल दिया. आयोजकों को पास के दूसरे तालाब में प्रतिमा विसर्जित करने के लिए कहा गया. इसके बाद से ही विवाद शुरू हो गया.

कमेटी का आरोप- पास के तालाब तक जाने का रास्ता नहीं

मंदिर कमेटी का कहना है कि प्रशासन की ओर से जिस दूसरे तालाब में विसर्जन करने को कहा गया है, वहां तक प्रतिमा ले जाने का रास्ता ही नहीं है. ऐसे में भारी प्रतिमा को वहां तक ले जाना मुश्किल है. रास्ते की समस्या के कारण प्रतिमा खंडित होने का भी खतरा है. कमेटी का आरोप है कि विसर्जन की तय तारीख बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई. आयोजकों का कहना है कि वे मां दुर्गा की प्रतिमा का सम्मानजनक तरीके से विसर्जन करना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन के फैसले में बदलाव के कारण समस्या खड़ी हो गई है.

दशहरा के बाद भी पंडाल में मां दुर्गा, गोड्डा में विसर्जन स्थल को लेकर प्रशासन और मंदिर कमेटी आमने-सामने

मानव सेवा के लिए सम्मानित वंदना दुबे के पंडाल में रुकी है प्रतिमा

कालीपीठ में दुर्गा पूजा का आयोजन मानव सेवा के क्षेत्र में काम करने वाली वंदना दुबे की ओर से किया जाता रहा है. वंदना दुबे को अनाथ बच्चों की देखभाल और मानव सेवा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है. उनके अनाथ आश्रम के माध्यम से सैकड़ों बच्चों के पालन-पोषण और देखभाल का काम किया गया है. इस बार मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन नहीं हो पाने से आयोजकों में नाराजगी है. मंदिर कमेटी का कहना है कि प्रशासन की ओर से समय रहते समाधान नहीं निकाले जाने के कारण प्रतिमा अब तक पंडाल में ही विराजमान है.

भाजपा ने उठाए सवाल, प्रशासन के रवैये को बताया दुर्भाग्यपूर्ण

मामले को लेकर भाजपा ने भी जिला प्रशासन पर सवाल उठाए हैं. भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर प्रशासन के रवैये को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने लिखा कि पहले राजकचहरी तालाब में विसर्जन की अनुमति देना और फिर उसे वापस लेना, उसके बाद आयोजकों को जमीन विवाद के नाम पर परेशान करना कई सवाल खड़े करता है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह संयोग है या किसी दबाव का परिणाम. अजय साह ने कहा कि आस्था, परंपरा और धार्मिक आयोजनों के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने प्रशासन से अपनी भूमिका स्पष्ट करने और आयोजकों के साथ समन्वय कर शांतिपूर्ण एवं सम्मानजनक विसर्जन सुनिश्चित करने की मांग की.

दशहरा के बाद भी पंडाल में मां दुर्गा, गोड्डा में विसर्जन स्थल को लेकर प्रशासन और मंदिर कमेटी आमने-सामने

मंदिर के पास तालाब की खुदाई, अब उसी में होगा विसर्जन?

मंदिर कमेटी के अनुसार, विवाद का समाधान नहीं निकलने के बाद मंदिर के नजदीक ही एक तालाब की खुदाई कराई जा रही है. कमेटी का कहना है कि खुदाई का काम पूरा होने के बाद उसी तालाब में मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा. हालांकि, इस पूरे मामले में जिला प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है. प्रशासन ने पहले राजकचहरी तालाब में विसर्जन की अनुमति क्यों दी और बाद में फैसला क्यों बदला, इस पर आधिकारिक जवाब का इंतजार है.



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