ट्रंप से होनी थी मुलाकात, उधर बिन बताए चीन पहुंचे किम जोंग उन, दक्षिण कोरिया की बढ़ी टेंशन

ट्रंप से होनी थी मुलाकात, उधर बिन बताए चीन पहुंचे किम जोंग उन, दक्षिण कोरिया की बढ़ी टेंशन


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Kim Jong Un China Visit: कहां किम जोंग उन से अमेरिकी राष्ट्रपति की मुलाकात को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं और कहां वो बिना किसी घोषणा के ही चीन पहुंच गए. वे उसी यालू रिवर ब्रिज से चीन पहुंचे, जिसका उद्घाटन 15 अक्टूबर को किया गया है.

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किंम जोंग उन. (रॉयटर्स)

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन करीब एक साल बाद चीन पहुंचे हैं. दक्षिण कोरिया के मीडिया और सरकारी सूत्रों के मुताबिक किम जोंग उन चीन के बॉर्डर के पास मौजूद शहर डांडोंग पहुंचे. उनकी इस यात्रा को चीन और उत्तर कोरिया के बीच आर्थिक सहयोग मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है. हालांकि दक्षिण कोरिया की सरकार ने अभी इस यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.

दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी योनहाप के अनुसार किम ने चीन में प्रवेश के लिए न्यू यालू रिवर ब्रिज का इस्तेमाल किया. यह पुल 2014 में बनकर तैयार हुआ था, लेकिन सड़क और सीमा शुल्क से जुड़ी सुविधाएं पूरी नहीं होने के कारण इसे आम इस्तेमाल के लिए खोलने में देरी हुई. इसे 15 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से खोला गया है.

चीन के साथ मजबूत हो गए रिश्ते 

चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. आर्थिक मदद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक समर्थन के लिए भी प्योंगयांग काफी हद तक बीजिंग पर निर्भर है. ऐसे में किम की यात्रा दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण है. दक्षिण कोरियाई अखबार कोरिया जूंगआंग डेली की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने डांडोंग पहुंचने पर किम का स्वागत किया. एक्सपर्ट्स का मानना है कि किम चीन से पहले हुए समझौतों पर तेजी से अमल करने की मांग कर सकते हैं. साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संभावित मुलाकात से पहले बीजिंग का समर्थन हासिल करना भी उनकी यात्रा का एक उद्देश्य हो सकता है.

ट्रंप से मुलाकात की चर्चा

नवंबर में चीन के शेनझेन शहर में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन होना है. इसमें दुनिया के कई प्रमुख नेता शामिल हो सकते हैं. ऐसे में किम और ट्रंप के बीच संभावित बातचीत को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं. हालांकि दोनों नेताओं की मुलाकात की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन ऐसी संभावनाएं बन रही हैं. किम की चीन यात्रा ऐसे समय हुई है, जब उत्तर और दक्षिण कोरिया के संबंधों में भी तनाव बना हुआ है.

उधर किम ने अपनी सेना को दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में शामिल होने के लिए प्रशिक्षण तेज करने का निर्देश दिया है. उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियारों को भी अपनी सुरक्षा का स्थायी हिस्सा बताता रहा है. ऐसे में किम की चीन यात्रा का असर क्षेत्रीय सुरक्षा और आने वाले कूटनीतिक घटनाक्रम पर पड़ सकता है.



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