बिना मिट्टी के होगी हल्दी की खेती, जहानाबाद KVK ने खोजी नई तकनीक
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Turmeric Farming Without Soil: हमारे देश में कृषि पद्धति आधुनिक होता जा रहा है. लगातार नए नए तकनीक लाया जा रहा है, जिससे खेती आसान हो. साथ ही बेहतर उत्पादन भी प्राप्त किया जा सके. कृषि वैज्ञानिक तकनीक आधारित पर लगातार कार्य करते रहते हैं. इसी कड़ी में अब एक ऐसा तकनीक ईजाद किया गया है, जिसमें हल्दी की खेती करने को मिट्टी की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह एक ऐसी पद्धति है, जिसमें हल्दी की फसल मशरूम की तरह वर्मी कंपोस्ट से उगाया जा सके और बेहतर उत्पादन भी प्राप्त हो. जहानाबाद में कृषि प्रदर्शनी मेले का आयोजन हुआ, जिसमें यह मॉडल प्रस्तुत किया गया.
यह मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र गंधार के वैज्ञानिकों से प्रस्तुत हुआ था. साथ ही खासियत के बारे में बताया गया. Local 18 से KVK गंधार के कृषि प्रसार एक्सपर्ट डॉक्टर निराला ने कहा कि हमारे केंद्र में लगातार नई तकनीक पर कार्य किया जाता रहता है. इसी क्रम में एक ऐसा ही मॉडल प्रस्तुत किया गया. अब तक हल्दी की खेती को मिट्टी में ही किया जाता रहा है.
लेकिन अब एक ऐसी तकनीक आ गई है, जिसके माध्यम से बिना मिट्टी भी हल्दी की खेती संभव है. इसमें मिट्टी के मुकाबले बेहतर उत्पादन भी प्राप्त किया जा सकता है. डॉ. निराला ने कहा कि हल्दी खेती बिना मिट्टी हो जा सकता है. वर्मी कंपोस्ट से जिस प्रकार मशरूम उगाया जाता हो, उसी तरह हल्दी की खेती की जा सकती है. इसमें डेढ़ गुना तक उत्पादन ज्यादा हो सकता है.
हमारे यहां जिस तरह एक प्लास्टिक की थैली में वर्मी कंपोस्ट के माध्यम से लटकाकर मशरूम उगाया जाता रहा है ठीक उसी तरह हल्दी की खेती भी संभव है. इसमें ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है. बहुत आसानी से वर्मी कंपोस्ट तैयार कर सकते हैं. इसके बाद उस वर्मी कंपोस्ट में हल्दी का बीज डालकर जिस तरह सिंचाई होती है वैसे ही सिंचाई करनी है.”
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एक्सपर्ट आगे कहते हैं कि जिस अवधि में हल्दी की फसल मिट्टी में उगता है, ठीक ववैसा ही वर्मी कंपोस्ट बैग में भी उगेगी. ऐसे आप फसल उगाते हैं तो न तो ज्यादा जगह की जरूरत पड़ेगी और न ही ज्यादा मेहनत करने की. साथ ही मिट्टी से 1.5 गुना बेहतर उत्पादन पा सकते हैं.
हमारे जिले के किसानों को इस बाबत प्रेरित करने का कार्य किया जा रहा है. साथ ही कुछ स्थानों पर ट्रायल के तौर पर भी लगाया गया है. ऐसे में यदि इस विधि से हल्दी की खेती करते हैं तो बेहतर उत्पादन प्राप्त कर अच्छी कमाई कर सकते हैं. हम तो किसानों से यही आग्रह करेंगे कि अगर समस्या है तो हम वैज्ञानिकों से आकर तकनीक समझ सकते हैं.